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अरब देशों के प्रतिबंध के खिलाफ जाकर कतर ने 80 देशों को दी वीजा मुक्त एंट्री

सऊदी अरब, यूएई, मिस्र और बहरीन ने पिछले महीने कतर को 13 मांगों की एक सूची सौंपी थी, जिसमें अल-जजीरा टीवी स्टेशन बंद करने, आतंकवाद का वित्तपोषण रोकने और ईरान के साथ संबंध धीरे-धीरे समाप्त करने जैसी मांगें शामिल थी।
कतर सरकार ने कहा है कि विजिटर को राष्ट्रीयता के आधार पर छूट पत्र दिया जाएगा। (Photo: Reuters)

कतर सरकार ने सऊदी अरब के नेतृत्व में अरब देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के खिलाफ एक नया कदम उठाया है। कतर सरकार ने बुधवार को भारत सहित 80 देशों के नागरिकों को अब बिना वीजा के ही कतर में प्रवेश की अनुमति देने की घोषणा की है। कतर ने भारत के अलावा जिन देशों को यह छूट दी है उनमें ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा, साउथ अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और न्यू जीलैंड जैसे देश शामिल हैं।

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, कतर की ओर से आधिकारिक बयान में कहा गया, ‘इन 80 देशों के नागरिकों को कतर आने के लिए अब वीजा के लिए अप्लाई या कीमत चुकाने की जरूरत नहीं है।’ बयान में आगे कहा गया है, ‘यहां आने के बाद उन्हें एक छूट पत्र दी जाएगी। इसके लिए यात्रियों के पास वैध पासपोर्ट और रिटर्न टिकट दिखानी होगी।’

कतर सरकार ने कहा है कि विजिटर को राष्ट्रीयता के आधार पर छूट पत्र दिया जाएगा। उसकी वैधता 180 दिन होगी और विजिटर कतर में कुल 90 दिन बिता सकता है। इसमें मल्टीपल एंट्री भी हो सकती है, जिसमें विजिटर 30 दिनों के लिए रह सकता है। इसमें विजिटर 30 दिन तक और बढ़ाए जाने के लिए अप्लाई कर सकते हैं।

कतर टूरिजम अथॉरिटी के एक्टिंग चेयरमैन हसन अल इब्राहिम ने कहा, ’80 देशों के लोगों को वीजा मुक्त एंट्री की व्यवस्था करके कतर क्षेत्र का सबसे खुला देश बन गया है। हम अपनी सेवा, सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक खजाने का लुत्फ उठाने के लिए विजिटर्स को आमंत्रित करने के लिए उत्साहित हैं।’

उल्लेखनीय है कि सऊदी अरब, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और मिस्र ने कतर पर आतंकवाद का वित्तपोषण करने और अन्य देशों के आंतरिक मामलों में दखलअंदाजी करने का आरोप लगाते हुए उससे अपना संबंध समाप्त कर लिया था। सऊदी अरब, यूएई, मिस्र और बहरीन ने पिछले महीने कतर को 13 मांगों की एक सूची सौंपी थी, जिसमें अल-जजीरा टीवी स्टेशन बंद करने, आतंकवाद का वित्तपोषण रोकने और ईरान के साथ संबंध धीरे-धीरे समाप्त करने जैसी मांगें शामिल थी।

इन चारों देशों का कहना है कि यदि कतर ने उनकी मांगों को नहीं माना तो वे उस पर और राजनीतिक, आर्थिक एवं कानूनी प्रतिबंध लगा सकते हैं।

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