ताज़ा खबर
 

भारत के ‘अवैध कब्जे’ वाले क्षेत्र में खुश नहीं अरुणाचल प्रदेश के लोग, चीनी मीडिया का दावा

अरुणाचल प्रदेश के मुद्दे को चीनी मीडिया द्वारा उछाला गया है।
लेख में दलाई लामा का भी जिक्र किया गया। लिखा था कि भारत दलाई लामा द्वारा किए गए विश्वासघात की गवाही देता है।

सरकारी चाइना डेली ने दलाई लामा को अरूणाचल प्रदेश का दौरा करने की अनुमति देने पर भारत की आलोचना करते हुए आज दावा किया कि अरूणाचल के लोग भारत के ‘‘गैरकानूनी शासन’’ तले ‘‘कठिन परिस्थितियों में जीवन’’ जी रहे हैं और चीन लौटने के इंतजार में हैं। चीन दलाई लामा को अरूणाचल प्रदेश का दौरा करने देने के विरोध में है, खासकर उनके तवांग जाने देने के खिलाफ है। तवांग को वह दक्षिणी तिब्बत मानता है। चीन के मीडिया और विदेश मंत्रालय ने तिब्बत के बौद्ध धर्मगुरू के अरूणाचल प्रदेश में जारी दौरे पर बार-बार विरोध जताया है। चाइना डेली ने उकसावापूर्ण आलेख में कहा, ‘‘भारत के गैरकानूनी शासन तले दक्षिणी तिब्बत के रहवासी मुश्किल जीवन जी रहे हैं, उन्हें विभिन्न तरह के भेदभाव का सामना करना पड़ता है और वह चीन लौटने की प्रतीक्षा में हैं।’’

बहरहाल, इस आलेख में तिब्बत में समय-समय पर होने वाले विरोध प्रदर्शनों की मीडिया रिपोर्टों को दरकिनारे कर दिया गया। गौरतलब है कि 120 से ज्यादा तिब्बतवासी चीन के कम्युनिस्ट शासन के विरोध में आत्मदाह कर चुके हैं।नोबेल पुरस्कार से सम्मानित 81 वर्षीय दलाई लामा के बारे में आलेख में कहा गया कि दलाई लामा का दौरा यह दिखाता है कि अपने अलगाववादी समूह के वजूद के लिए भारत के समर्थन के बदले ‘‘तवांग जिला देने को बेताब ’’ जो छठे दलाई लामा की जन्मस्थली और तिब्बती बौद्ध धर्म का केंद्र है।

इसमें कहा गया, ‘‘14वें दलाई लामा की एक पहचान इतिहास में अगली तमाम पीढ़ियों के लिए दर्ज रखेगा कि वह समस्या खड़ी करने वाले व्यक्ति हैं।’’
आलेख में कहा गया कि दलाई लामा का दौरा ‘‘खुद से, जनता से, देश से, साथ ही क्षेत्रीय शांति से विश्वासघात का सबूत है।’’

आलेख में कहा गया, ‘‘अपने जीवनयापन के लिए भारत पर निर्भर दलाई लामा की अपने मालिक को खुश करने की बेताबी समझ में आती है, लेकिन अपने आका की हिमायत के एवज में दक्षिणी तिब्बत को बेच कर वह बहुत आगे चले गए हैं। आलेख में कहा गया कि दलाई लामा ने हाल के वर्षों में सार्वजनिक तौर पर 20 से भी ज्यादा बार खुद को ‘भारत का बेटा’ बताया है। भारत और चीन सीमा विवाद सुलझाने के लिए 20 साल से ज्यादा अर्से से बातचीत कर रहे हैं लेकिन अभी कोई समझौता नहीं हो सका है।

देखिए संबंधित वीडियो

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. M
    manoj verma
    Apr 12, 2017 at 4:59 pm
    samy Aa hai ki india apne sabhi sena ki tukdi ko bahut hi jyda majboot kerle ,kyu ki china bhi stan ki tarh arudanchal mein algav vadi bichar dhar paida kerna chahta hai jaise , stan kasmir aatankvaad faila rakha hai,es baat ko india hanke me na le nahi to kasmeer ki tarah yanha per bhi paresani jelni pad saki hai ,eska seedha jabab dena hai to india bhi tibbet ke baare mein yahi bbat bole ,ki tibbet ke log china se paesaan hai
    (0)(0)
    Reply
    1. चक्रपाणि पांडेय
      Apr 12, 2017 at 3:17 pm
      चीन ने अपना असली रन्ग दिखा दिया है ईससे सावधान रहने की ज़रूरत है,
      (0)(0)
      Reply
      सबरंग