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चीनी मीडिया ने डोनाल्ड ट्रंप और हिलैरी क्लिंटन को बताया “अयोग्य और बड़बोला”, कहा- अमेरिका में सच्चा लोकतंत्र है ही नहीं

चीनी अखबार में इराक हमले का उदाहरण देकर कहा गया है कि अमेरिकी पार्टियों और राजनेताओं के आपसी झगड़े का असर अंतरराष्ट्रीय मामलों पर भी पड़ता है।
डेमोक्रेटिक उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन (बाएं) और रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप (दाएं) (फाइल फोटो)

सोवियत रूस के विघटन के बाद अमेरिका दुनिया की एकमात्र महाशक्ति रह गया। लेकिन पिछले कुछ सालों से चीन लगातार महाशक्ति होने की दावेदारी पेश कर रहा है। चीन अमेरिकी को आंख दिखाने या उसकी ताकत को चुनौती देने का कोई मौका हाथ से जाने नहीं देता। चीनी मीडिया में अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप और डेमोक्रेटिक उम्मीदवार हिलैरी क्लिंटन के बीच जारी रस्साकशी पर जमकर तंज कसा जा रहा है। दोनों नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप को चीनी मीडिया अमेरिकी और पश्चिमी लोकतंत्र की सीमाओं के तौर पर पेश कर रहा है। आपको पता ही होगा कि चीन में कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार है और वहां की मीडिया भी पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में है।

मंगलवार को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र पीपल्स डेली में प्रकाशित एक लेख का शीर्षक है, “दुनिया को अंकल सैम के नेतृत्व पर संदेह है।” इस लेख में एक अमेरिकी स्कॉलर के लेख के हवाले से कहा गया है कि अमेरिकी और पश्चिमी देशों का लोकतंत्र “दोषपूर्ण”, “अक्षम” और “ठस” है। इस लेख में कहा गया है कि अमेरिकी लोकतंत्र में “पूंजी द्वारा इस्तेमाल किया जाता है” और पूरी चुनावी प्रक्रिया दोनों सदस्यों हिलैरी क्लिंटने और डोनाल्ड ट्रंप के बीच निजी हमलों के बीच दब के रह गई है। लेख में दावा किया गया है कि “इसके अलावा दूसरी कई खामियों की वजह से अमेरिकी लोकतंत्र और इसके द्वारा चुने गए नेताओं पर पूरी दुनिया में सवाल उठने लगे हैं।” लेख में कहा गया है कि दोनों अमेरिकी पार्टियों के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार “अयोग्य और बड़बोले” हैं।

वीडियो: ट्रंप से हुई बहस में हिलैरी क्लिंटन ने उन्हें राष्ट्रपति बनने के नाकाबिल कहा-  

एक अन्य सरकार द्वारा नियंत्रित चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने मंगलवार को अमेरिकी लोकतंत्र पर ऐसे ही सवाल उठाए हैं। अखबार में प्रकाशित लेख में कहा गया है, “हाल ही में विकीलीक्स द्वारा प्रकाशित सामग्री के सामने आने के बाद बेपर्दा हो चुकी हिलैरी क्लिंटन को ट्रंप के आपत्तिजनक टिप्पणियों वाले वीडियो सामने आने के बाद चुनावी दौड़ में आगे निकल गई हैं…लेकिन सच ये है कि अमेरिका में लोकतंत्र है ही नहीं, वहां “चुनी गई अमीरशाही”….जिसमें राजनीतिक निर्णयों में आम लोगों की भागीदारी सिकुड़ जाती है। ये राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिए खतरे का लाल संकेत है।”

चीनी अखबार में दावा किया गया है कि अमेरिकी पार्टियों और राजनेताओं के आपसी झगड़े का असर अंतरराष्ट्रीय मामलों पर भी पड़ता है। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि “इसी तरह जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने 3 नवंबर 2003 को मध्य पूर्व में किे गए हमले को लोकतंत्र की राष्ट्रीय अभिव्यक्ति के रूप में पेश किया था।” नवंबर 2003 में अमेरिका ने इराक पर हमला किया था। पीपल्स डेली ने भी एक लेख में अमेरिका पर झूठे बहाने बनाकर इराक पर हमला करने का आरोप लगाया है। पीपल्स डेली के लेख में कहा गया है, “अमेरिका, उसेक पश्चिमी सहयोगी साथ ही पूरी दुनिया अब उसकी मनमर्जी का फल भोग रही है।” अखबार में कहा गया है कि 2008 की आर्थिक मंदी के बाद भी अमेरिका जागा नहीं है और अभी भी उसके विचारों “रूढ़िवादी और मिडियॉकर” प्रतीत होते हैं।

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