December 03, 2016

ताज़ा खबर

 

अमेरिकी राजदूत रिचर्ड वर्मा के अरुणाचल दौरे से तिलमिलाया चीन, कहा- इससे मामला और उलझेगा

चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत कहता है वहीं भारत का मानना है कि अकसाई चीन को लेकर विवाद है जिस पर चीन ने 1962 की जंग में कब्जा कर लिया था।

Author बीजिंग | October 24, 2016 19:53 pm
अरुणाचल प्रदेश के तवांग में अमरिकी राजनयिक रिचर्ड वर्मा के साथ असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू (दाएं)। (PTI Photo/21 Oct, 2016)

चीन ने सोमवार (24 अक्टूबर) को अमेरिका को चेतावनी दी कि चीन-भारत सीमा विवाद में उसका कोई भी हस्तक्षेप इस विषय को ‘और भी पेचीदा’ बनाएगा और सीमा पर कड़ी मेहनत से हासिल की गई शांति में खलल डालेगा। अमेरिकी राजदूत के अरुणाचल प्रदेश दौरा के कुछ दिनों बाद चीन ने यह चेतावनी दी है। चीन अरुणाचल के दक्षिण तिब्बत होने का दावा करता है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लु कांग ने यहां एक मीडिया ब्रीफिंग में अमेरिका से भारत-चीन सीमा विवाद में हस्तक्षेप करने से बचने को कहा। उन्होंने कहा कि चीन इस यात्रा का सख्त विरोध करता है। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के निमंत्रण पर अमेरिकी राजदूत रिचर्ड वर्मा 22 अक्तूबर को वहां गए थे। रिचर्ड की उस यात्रा का उल्लेख करते हुए लू ने कहा कि अमेरिकी राजदूत ने एक विवादित क्षेत्र का दौरा किया है। उन्होंने कहा, ‘हमने इस बात का संज्ञान लिया है कि अमेरिका के वरिष्ठ राजनयिक अधिकारी ने जिस जगह का दौरा किया है वह चीन और भारत के बीच विवादित क्षेत्र है। हम इस यात्रा के पूरी तरह खिलाफ हैं।’

चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा बताता है और इस इलाके में भारतीय नेताओं, विदेशी अधिकारियों तथा दलाई लामा की यात्रा का नियमित विरोध करता है। लु ने समाधान निकालने के लिए दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की अगुवाई वाली विशेष प्रतिनिधियों की प्रणाली का जिक्र करते हुए कहा, ‘चीन-भारत सीमा के पूर्वी क्षेत्र को लेकर चीन की स्थिति बहुत स्पष्ट है और एक जैसी है। दोनों देश बातचीत और परामर्श के माध्यम से क्षेत्रीय विवादों को सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं।’ दोनों पक्षों ने 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा से जुड़े विवादों को सुलझाने के लिए विशेष प्रतिनिधियों की 19वें दौर की वार्ता की थी। चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत कहता है वहीं भारत का मानना है कि अकसाई चीन को लेकर विवाद है जिस पर चीन ने 1962 की जंग में कब्जा कर लिया था। लु ने कहा, ‘किसी भी तीसरे पक्ष को जिम्मेदारी की भावना के साथ शांति, सुलह और अमन के लिए चीन और भारत के प्रयासों का सम्मान करना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि अमेरिका का व्यवहार चीन और भारत के प्रयासों के प्रतिकूल है।

उन्होंने कहा, ‘यह विवाद को और अधिक पेचीदा बनाएगा, सीमावर्ती इलाकों पर कड़ी मेहनत से हासिल की गई शांति एवं स्थिरता में खलल डालेगा और क्षेत्र के शांतिपूर्ण विकास पर बुरा असर डालेगा।’ लु ने कहा, ‘हम अमेरिका से चीन और भारत के बीच सीमा विवाद में हस्तक्षेप रोकने और क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता में अधिक योगदान देने का अनुरोध करता हूं।’ उन्होंने कहा कि चीन और भारत के बीच सीमा का सवाल बहुत पेचीदा और संवेदनशील है। ‘किसी तीसरे देश का हस्तक्षेप सिर्फ तनाव बढ़ाएगा।’ लु ने कहा कि आखिर में जाकर सिर्फ दोनों देशों के लोग ही पीड़ित होंगे। उन्होंने, ‘हमारा मानना है कि दो बड़े देशों के रूप में भारत और चीन इस मुद्दे से उचित तरीके से निपटने के लिए और दोनों देशों की जनता के बुनियादी हितों की सुरक्षा के लिहाज से पर्याप्त समझदार हैं।’

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

First Published on October 24, 2016 7:21 pm

सबरंग