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भारत के NSG में प्रवेश पर फिर अड़ा चीन, कहा- बिना NTP पर साइन किए नहीं होगी एंट्री

गेंग ने कहा, "मैं इस ओर ध्यान दिलाना चाहता हूं कि विस्तार को लेकर एनएसजी के नियम स्पष्ट हैं और सियोल में पूर्ण सत्र के दौरान यह स्पष्ट कर दिया गया था कि मुद्दे से किस प्रकार निपटना है। हमें इन नियमों तथा सहमति से कार्य करने की जरूरत है।"
Author बीजिंग | June 23, 2017 21:04 pm
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (पीटीआई फोटो)

भारत की एनएसजी में एंट्री की पुरजोर कोशिशों को एक बार फिर से चीन की ओर से झटका मिलने वाला है। चीन फिर से एनएसजी में भारत की सदस्यता का विरोध किया है। चीन ने शुक्रवार को कहा कि वह भारत के परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (NSG) में दाखिल होने का विरोध करेगा। स्विट्जरलैंड की राजधानी बर्न में एनएसजी का पूर्ण सत्र चल रहा है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा, “जहां तक गैर-एनपीटी (परमाणु अप्रसार समझौता) देशों की बात है, तो मैं आपसे कह सकता हूं कि चीन के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है।” भारत को उम्मीद थी कि इस बार उसे एनएसजी की सदस्यता मिल सकती है।

गेंग ने कहा, “मैं इस ओर ध्यान दिलाना चाहता हूं कि विस्तार को लेकर एनएसजी के नियम स्पष्ट हैं और सियोल में पूर्ण सत्र के दौरान यह स्पष्ट कर दिया गया था कि मुद्दे से किस प्रकार निपटना है। हमें इन नियमों तथा सहमति से कार्य करने की जरूरत है।” उन्होंने कहा, “नए सदस्यों को एनएसजी में शामिल करने को लेकर स्विट्जरलैंड में जारी यह पूर्ण बैठक सियोल के पूर्ण सत्र के फैसले का पालन करेगा और सर्वसम्मति पर फैसले के सिद्धांत को बरकार रखेगा तथा समूह में गैर-एनपीटी देशों को शामिल करने के लिए तकनीकी, कानूनी जैसे विभिन्न पहलुओं पर चर्चा जारी रखेगा।”

पिछले साल सियोल में एनएसजी के पूर्ण सत्र के दौरान 48 सदस्यीय एनएसजी में प्रवेश के लिए भारत के आवेदन का चीन ने विरोध किया था। जारी पूर्ण सत्र शुक्रवार को समाप्त हो रहा है। बर्न में बीजिंग से भारत के एनएसजी में प्रवेश को लेकर जो उम्मीद की जा रही है, उससे नई दिल्ली को एक साल का और इंतजार करना पड़ेगा। वैश्विक स्तर पर परमाणु व्यापार पर नियंत्रण के लिए एनएसजी सर्वसम्मति के सिद्धांत पर कार्य करता है। चीन अतीत में भी यह स्पष्ट कर चुका है कि भारत जबतक परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर दस्तखत नहीं करेगा, उसे एनएसजी में शामिल नहीं किया जाएगा। सियोल में हुई पिछली बैठक में भी चीन समेत कुछ देशों ने भारत की एनएसजी सदस्यता का विरोध किया था जबकि अमेरिका समेत ज्यादातर देश भारत को सदस्यता मिलने के पक्ष में थे।

 

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