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‘वन चाइना पॉलिसी’ को लेकर बोले डोनाल्ड ट्रंप, हुक्म नहीं चला सकता चीन

अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्यापार पर चीन से कोई रियायत नहीं मिलने की स्थिति में ‘वन चाइना’ नीति की निरंतरता की प्रासंगिकता पर आज सवाल उठाया और कहा कि यह कम्युनिस्ट देश उन पर हुक्म नहीं चला सकता।
Author वाशिंगटन | December 12, 2016 19:52 pm
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो)

चीन ने सोमवार (12 दिसंबर) को अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को आगाह करते हुए कहा कि अगर उन्होंने ताइवान को महत्व देकर ‘एक चीन की नीति’ से ‘समझौता’ किया तो इससे चीन एवं अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों पर काफी बुरा असर पड़ेगा। ट्रम्प ने हाल में ताइवान को लेकर अमेरिकी की लंबी समय से चली आ रही नीति की आलोचना की थी जिसे लेकर चीन ने बेहद कड़ी प्रतिक्रिया दी। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने ट्रम्प की टिप्पणी को लेकर यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘एक चीन की नीति का पालन करना चीन-अमेरिका संबंधों का आधार है, अगर उससे समझौता किया गया या उससे छेड़छाड़ हुई तो चीन-अमेरिका संबंधों का ठोस एवं स्थिर विकास और साथ ही प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की गुंजाइश नहीं बचेगी।’ उन्होंने कहा, ‘चीन ने संबंधित खबर का संज्ञान किया है और उसे लेकर काफी चिंतित है।’

रविवार (11 दिसंबर) को ट्रम्प ने एक टीवी साक्षात्कार में सवाल उठाया था कि जब तक बीजिंग व्यापार और अन्य मुद्दों पर रियायतें नहीं देता तब तक क्या अमेरिका को ‘एक चीन की नीति’ को जारी रखना चाहिए? अमेरिका 1979 से ताइवान पर चीन के रूख का सम्मान करता रहा है जिसे चीन खुद से अलग हुआ एक प्रांत मानता है। लेकिन ट्रम्प ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि चीन से रियायतें मिले बिना इसे जारी रखना चाहिए। वह हाल के वर्षों में ताइवान को लेकर इस तरह की टिप्पणी करने वाले पहले अमेरिकी नेता हैं। गेंग ने ट्रम्प की टिप्पणी को लेकर पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए कहा, ‘मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि ताइवान का मुद्दा चीन की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता से जुड़ा हुआ है और चीन के मूल हितों से संबंधित है।’

लेकिन इन कड़ों शब्दों के साथ कठोर प्रतिक्रिया करने के बावजूद चीन ने कोई राजनयिक विरोध दर्ज नहीं कराया है। हालांकि कुछ दिन पहले ट्रम्प के ताइवानी राष्ट्रपति से फोन पर बात करने के बाद चीन ने इस तरह का विरोध दर्ज कराया था। गेंग ने कहा कि चीन चाहता है कि नया अमेरिकी प्रशासन और उसका नेतृत्व ताइवान के मुद्दे की संवेदनशीलता को पूरी तरह समझे, एक चीन की नीति और साथ ही चीन एवं अमेरिका के बीच तीन संयुक्त बैठकों में तय हुए सिद्धांतों पर कायम रहे। उन्होंने साथ ही कहा कि अमेरिका विवेकपूर्ण तरीके से ताइवान से जुड़े सवालों से निपटे ताकि द्विपक्षीय संबंधों के हित प्रभावित ना हों।

ट्रम्प ने अपनी टिप्पणी में कहा था, ‘मैं नहीं चाहता कि चीन मुझ पर हुक्म चलाए।’ हाल ही में ट्रम्प ने ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन के साथ फोन पर बातचीत की थी। इससे पहले, चीन के राजनीतिक विरोध की वजह से दशकों से किसी अमेरिकी नेता और किसी ताइवानी नेता के बीच बातचीत नहीं हुई थी। ट्रम्प ने फॉक्स न्यूज के साथ रविवार (11 दिसंबर) को एक साक्षात्कार में कहा, ‘मैं नहीं जानता कि जब तक व्यापार समेत अन्य मुद्दों पर चीन के साथ एक समझौता नहीं हो जाता तब तक क्यों हमें वन-चाइना पॉलिसी से बंधे रहना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि चीन मुद्रा नीति, उत्तर कोरिया और इसके परमाणु हथियारों और विवादित दक्षिण चीन सागर में तनाव जैसे मुद्दों पर अमेरिका के साथ सहयोग नहीं कर रहा है। ट्रम्प ने कहा कि साई का फोन नहीं उठाना अनुचित होता। वह चुनाव जीतने पर उन्हें (ट्रम्प को) बधाई देना चाहती थीं।

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