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कार्बन उत्‍सर्जन रोक पाने में भारत की हालत खराब, चीन ने किया बेहतर प्रदर्शन

भारत में 2015 में जीवाश्म ईंधन जलाने से कार्बन उत्सर्जन 5.2 प्रतिशत बढ़ा।
Author लंदन | November 14, 2016 19:04 pm
एएएएस में अपना अध्ययन पेश किया, जिसमें कहा गया कि वायु प्रदूषण जनित बीमारियों के कारण 2013 में चीन में 16 लाख, जबकि भारत में 14 लाख लोगों की मौत हुई। (फाइल फोटो)

भारत में 2015 में जीवाश्म ईंधन जलाने से कार्बन उत्सर्जन 5.2 प्रतिशत बढ़ा, जबकि चीन के कार्बन उत्सर्जन में 0.7 प्रतिशत की कमी आई। इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर कार्बन उत्सर्जन स्तर तीन साल से एक जैसा बना हुआ है। ब्रिटेन स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट एंग्लिया (यूईए) और ग्लोबल कार्बन प्रोजेक्ट के अनुधांनकर्ताओं के अनुसार विश्व के समूचे कार्बन उत्सर्जन में भारत 6.3 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार रहा और इसकी वृद्धि को जारी रखते हुए 2015 में इसमें 5.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। जीवाश्म ईंधन जलाने से 2015 में वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में वृद्धि नहीं हुई और 2016 में इसमें मामूली सी वृद्धि अनुमानित है। लगभग तीन साल से इसमें कोई वृद्धि नहीं हुई है। इस साल केवल 0.2 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान उत्सर्जन में हो रही कमी को दर्शाता है।

2013 के दशक में हर साल उत्सर्जन में 2.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। वर्ष 2014 में महज 0.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई। ब्योरे से पता चलता है कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में तीन प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि के बावजूद उत्सर्जन वृद्धि की दर कम रही। चीन में कोयले का इस्तेमाल कम होना तीन साल से उत्सर्जन में हो रही कम वृद्धि के लिए मुख्य कारण है। यूईए में टिंडाल सेंटर के निदेशक कोरिने ली क्वेरे ने कहा, ‘मजबूत आर्थिक वृद्धि के समय लगातार तीसरे साल उत्सर्जन में लगभग कोई अभूतपूर्व वृद्धि देखने को नहीं मिली है।’ उन्होंने कहा, ‘जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए यह बड़ी मदद है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं हैं। वैश्विक उत्सर्जन को अब तेजी से कम किए जाने की आवश्यकता है।’

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