December 11, 2016

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चीन ने हॉन्गकॉन्ग की आजादी की मांग को दबाने के लिए बनाया नया कानून

हॉन्ग कॉन्ग को चीन से आजाद कराने की मांग करने वाले दो युवा नेता पिछले हफ्ते ही सांसद चुने गए हैं।

फाइल फोटो (Source: AP)

चीन ने हॉन्ग कॉन्ग की स्वतंत्रता की मांग को दबाने के लिए नया कड़ा कानून बनाया है। सोमवार (7 नवंबर) को चीन की सर्वोच्च विधायी संस्था ने ये कानून पारित किया। इस कानून के बाद हाल ही में चुनाव जीतने वाले हॉन्ग कॉन्ग के दो  युवा सांसदों याऊ वाइचिंग और बैजियो लियुंग पर अप्रत्यक्ष रोक लग जाएगी। ये दोनों सांसद हॉन्ग कॉन्ग की स्वतंत्रता के समर्थक हैं। अभी हॉन्ग कॉन्ग चीन के अधीन अर्ध-स्वायत्तशासी क्षेत्र है। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार हॉन्ग कॉन्ग एवं मकाऊ मामलों के मंत्रालय ने “बेसिक लॉ ऑफ हॉन्ग कॉन्ग स्पेशल एडमिनिस्ट्रेटिव रीजन” (एसएआर) से जुड़े नए कानून को “बहुत जरूरी” और “समयानुकूल” बताया है। मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार चीन की सर्वोच्च विधायी संस्था “हॉन्ग कॉन्ग की स्वतंत्रता” पर रोक लगाएगी। नए कानून के अनुसार हॉन्ग कॉन्ग पर चीन का केंद्रीय नियंत्रण और मजबूत किया जाएगा।चीनी मंत्रालय ने कहा है कि “नया कानून हॉन्ग कॉन्ग समेत समस्त चीनी जनता की भावनाओं” का प्रतिनिधित्व करता है।

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रविवार रात को हॉन्ग कॉन्ग स्थित चीन प्रतिनिधि कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किए गए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर मिर्च स्प्रे का प्रयोग किया। प्रदर्शनकारी हॉन्ग कॉन्ग की आजादी के आंदोलन को दबाने की चीन की कोशिशों का विरोध कर रहे थे। हॉन्ग कॉन्ग में पहली बार आजादी का समर्थन करने वाले युवा नेता सांसद चुने गए हैं। 2014 में बड़े स्तर पर निकाली गई लोकतंत्र समर्थक रैलियों के बाद से अब तक आयोजित सबसे बड़े चुनाव में जीत हासिल हुई है। चीन इस अर्द्ध स्वायत्त शहर पर अपनी पकड़ मजबूत किए जाने के डर के बीच हुए इस विधायी चुनाव में रिकॉर्ड 22 लाख लोगों ने मतदान किया।

1997 में ब्रिटेन की ओर से चीन को हांगकांग लौटाए जाने के बाद से यह अब तक का सबसे भारी मतदान फीसद है। यह भारी मतदान बेजिंग के बढ़ते दखल से उपजे तनाव की पृष्ठभूमि में हुआ है। हांगकांग की आजादी को हस्तांतरण समझौते के तहत 50 साल का संरक्षण दिया गया था। लेकिन कई लोगों का मानना है कि यह संरक्षण कमजोर पड़ रहा है। विशेष तौर पर युवा कार्यकर्ता ‘एक देश, दो तंत्र’ संधि में अपना विश्वास खो चुके हैं। इसी संधि के तहत इस शहर का संचालन किया जाता है। यह किसी अन्य मुख्य भूभाग की तुलना में हांगकांग को ज्यादा आजादी देता है।

राजनीतिक सुधार के लिए 2014 में निकाली गई रैलियों की विफलता से उपजी मायूसी के कारण अधिक स्वायत्तता की मांग करने वाली कई नई पार्टियां अस्तित्व में आ गईं। परिणाम आने पर चार नए उम्मीदवारों के सीटें जीतने की पुष्टि हो गई। पांचवां उम्मीदवार भी जीत की ओर बढ़ रहा है। इनमें से एक उम्मीदवार नाथ लॉ (23) था, जो 2014 के ‘अंब्रैला मूवमेंट’ रैलियों का नेता है। वह अपने निर्वाचन क्षेत्र में दूसरे स्थान पर रहा है। हांगकांग भौगोलिक रूप से पांच निर्वाचन क्षेत्रों में बंटा है। हर क्षेत्र के पास लेजिसलेटिव काउंसिल में कई सीटें हैं।
यह संस्था हांगकांग के कानून बनाती है। लॉ और उनकी नई पार्टी डेमोसिस्टो आजादी के मुद्दे पर जनमत संग्रह का आह्वान कर रहे हैं। उनका जोर इस बात पर है कि चीन के साथ रहने या न रहने का फैसला करने का अधिकार हांगकांग के लोगों को होना चाहिए। लॉ ने अपनी जीत का जश्न मनाते हुए कहा- मुझे लगता है कि हांगकांग के लोग वाकई बदलाव चाहते हैं।

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First Published on November 7, 2016 10:12 am

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