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चीन के इस आविष्कार से भारत की बढ़ सकती है टेंशन, बनाई समुद्र में द्वीप तैयार करने वाली शिप

अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में बने इन द्वीपों में से कुछ का इस्तेमाल मिसाइल बेस, हवाई अड्डों और रडार सिस्टम्स के लिए हो रहा है।
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतिकात्मक रूप से किया गया है। (फाइल फोटो)

चीन ने दक्षिणी चीन सागर के लिए सबसे बड़ी ‘ड्रेजिंग पोत’ बनाने का दावा किया है। आधिकारिक तौर पर इसे ‘मैजिक आईलैंड मेकर’ का नाम दिया गया है। कहा जा रहा है कि ये एक शिप है, जो कृत्रिम ट्वीपों का निर्माण कर सकती है। चीन के इस अविष्कार ने दुनियाभर के देशों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा से पहले इस पोत का अनावरण किया गया था। चाइना डेली की खबर के अनुसार ये पोत ‘एक घंटे तीन स्विमिंग पूल’ जितनी खुदाई करने में सक्षम है।

आशंका जताई जा रही है कि चीन पोत को दक्षिण चीन सागर में तैनात कर सकता है, जहां उसका पहले से ही अमेरिका, भारत सहित कई पड़ोसी देशों से मतभेद चल रहा है। बताया जा रहा है कि यह एशिया का सबसे बड़ा ड्रेजिंग पोत है। वहीं चीन की सरकारी समाचार एजेंसी ने खबर दी है कि यह खुदाई करने वाली एक शिप है जिसका इस्तेमाल लैंड रिक्लेमेशन के लिए किया जाता है। 140 मीटर लंबी ये ‘चियान कुन हाओ’ शिप समुद्र में 35 मीटर नीचे एक घंटे में 6000 क्यूबिक मीटर रेत को निकाल सकती है जिससे कृत्रिम द्वीप के लिए नई जमीन तैयार की जा सके।

दूसरी तरफ ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन का अपने तटीय क्षेत्रों में लैंड रिक्लेमेशन प्रॉजेक्ट चल रहा है, ऐसे में नए ड्रैजर की मौजूदगी असामान्य बात नहीं है। लेकिन चीन के पुराने विस्तारवादी और आक्रामक रवैए को देखते हुए दुनिया के कई देशों की चिंता बढ़ीं हैं। उन्हें लग रहा है कि चीन इस शिप का इस्तेमाल दक्षिण चीन सागर में कृत्रिम द्वीप बनाने में कर सकता है।

जानकारी के लिए बता दें कि बीजिंग ने पहले भी ड्रैजर के इस्तेमाल से सात द्वीपों को तैयार किया है। अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में बने इन द्वीपों में से कुछ का इस्तेमाल मिसाइल बेस, हवाई अड्डों और रडार सिस्टम्स के लिए हो रहा है। दूसरी तरफ क्षेत्रीय संप्रभुता के मसले पर वियतनाम, फिलीपींस, मलयेशिया, ब्रुनेई और ताइवान का चीन से विवाद चल रहा है। पूर्व में अमेरिका भा द्वीपों को लेकर चीन को दावों को चुनौती दे चुका है।

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