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अमेरिका को जवाब देने के लिए चीन जल्‍द लाने वाला है रडार को चकमा देने वाला फाइटर जेट

चीन को लगता है कि J-20 की मदद से उसकी और अमेरिकी के बीच सैन्‍य ताकत के अंतर को कम किया जा सकेगा। J-20 को अमेरिका के F-22 का कंपटीटर माना जा रहा है।
Author June 1, 2016 13:21 pm
चीन के सिचुआन प्रांत के चेंगडु में एक एयरक्राफ्ट नजर आया था, जिसे स्‍टील्‍थ विमान माना गया। तस्‍वीर 7 जनवरी 2011 को ली गई, जिसे क्‍योडो न्‍यूज एजेंसी ने 8 जनवरी 2011 को रिलीज की। (REUTERS/Kyodo)

चीन अपने पहले स्‍टील्‍थ (रडार को चकमा देने में सक्षम) लड़ाकू विमान J-20 का अभी भी टेस्‍ट कर रहा है। हालांकि, चायनीज एयरफोर्स का कहना है कि वे इसे जल्‍द ही इस्‍तेमाल में लाना शुरू कर देंगे। बता दें कि चीन की मीडिया में इस लड़ाकू विमान की कुछ तस्‍वीरें सर्कुलेट होने के बाद अंदाजा लगाया जा रहा था कि J-20 को वायुसेना के सक्रिय बेड़े में शामिल कर लिया गया है।

चीन को लगता है कि J-20 की मदद से उसकी और अमेरिकी के बीच सैन्‍य ताकत के अंतर को कम किया जा सकेगा। कुछ एक्‍सपर्ट्स का मानना है कि J-20 की सामने आई तस्‍वीरों से ऐसा लगता है कि वो अनुमानित से ज्‍यादा तेज रफ्तार से इस लड़ाकू विमान को विकसित करने में लगा हुआ है। J-20 को अमेरिका के F-22 का कंपटीटर माना जा रहा है। F-22 को लॉकहीड मार्टिन कंपनी ने विकसित किया है।

J-20 के ट्रेनिंग एक्‍सरसाइज में इस्‍तेमाल किए जाने की खबरों को चीन की वायुसेना ने ‘गैरभरोसेमंद’ करार दिया है। बता दें कि इससे पहले बीते हफ्ते के आखिर में चीन के सरकारी टेलिविजन के प्रसारण में कुछ धुंधली तस्‍वीरें दिखाई गईं। कुछ दर्शकों का मानना था कि ये J-20 लड़ाकू विमान की हैं। चीनी एयरफोर्स ने अपने आधिकारिक ब्‍लॉग पर मंगलवार शाम लिखा, ‘वर्तमान स्‍थ‍िति यही है कि J-20 को वायुसेना की सेवा में इस्‍तेमाल किया जाना शुरू नहीं किया गया है।’ वायुसेना के मुताबिक, J-20 और एक अन्‍य Y-20 ट्रांसपोर्टर विमान की टेस्‍ट फ्लाइट जारी है। बयान के मुताबिक, ‘निकट भविष्‍य में J-20 और Y-20 को एक-एक करके इस्‍तेमाल में लाना शुरू किया जाएगा। इससे वायुसेना की क्षमता बढ़ाने का मिशन प्रभावशाली ढंग से पूरा होगा।’

हालांकि, एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि चीन अब भी ऐसे अति विकसित इंजन बनाने के लिए संघर्ष कर रहा है, जिसकी मदद से उसके लड़ाकू विमान पश्‍च‍िमी फाइटर जेट्स से मुकाबला कर सकें। चीन सेना से जुड़े नए हथियार विकसित करने की दिशा में अपनी रिसर्च में लगातार तेजी ला रहा है। इसकी वजह से न केवल क्षेत्रीय ताकतों की, बल्‍क‍ि अमेरिकी की भी टेंशन बढ़ी हुई है। चीन न केवल न हथियार, बल्‍क‍ि पनडुब्‍बी, एयरक्राफ्ट करियर और एंटी सेटेलाइट मिसाइल्‍स भी विकसित कर रहा है। वहीं, चीन की वायुसेना का कहना है कि नई तकनीक विकसित करने में कुछ असामान्‍य नहीं है। ऐसा हर वो देश करता है, जो चाहता है कि उसकी सेना का आधुनिकीकरण हो।

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  1. R
    rahul
    Jun 1, 2016 at 10:06 am
    और एक हम लोग हैं जो make in India की नारेबाजी में उलझे, इंतजार कर रहे हैं कि कोई देश अपनी एेसी एडवांस टेक्नोलॉजी हमें दे देगा
    (0)(0)
    Reply
    1. S
      sunil singh
      Jun 1, 2016 at 3:26 pm
      यस
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      Reply