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चीन ने 100 मीटर पीछे हटने की खबरों का किया खंडन, कहा- संप्रुभता से कोई समझौता नहीं

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि शुक्रवार (11 अगस्त) को चीनी और भारतीय सेना के बीच नाथू ला में एक बैठक हो सकती है।
चीनी आर्मी (PLA) मिलिट्री परेड के दौरान।

चीन ने भारतीय मीडिया में आई उन खबरों का खंडन किया है जिनमें कहा गया था कि डोकलाम में चीनी सैनिक 100 मीटर पीछे हटने को तैयार हो गए हैं। चीनी विदेश मंत्रालय ने ऐसी खबरों का खंडन करते हुए कहा कि “चीन किसी भी सूरत में अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा।” भारतीय मीडिया में आई खबरों में कहा गया कि चीन डोकलाम में 100 मीटर पीछे हटने को तैयार है लेकिन भारत ने उससे मौजूदा स्थिति से 250 मीटर पीछे जाने की मांग की है। चीनी अखबार चाइना डेली में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन इस मसले पर अपने रुख को लेकर दृढ़ता और स्पष्टता से कायम है। चीनी विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि भारत तत्काल इस इलाके से अपनी सेना हटाए।

वहीं भारतीय मीडिया में आई रिपोर्ट में ये दावा किया गया है कि शुक्रवार (11 अगस्त) को चीनी और भारतीय सेना के बीच नाथू  ला में एक बैठक हो सकती है। चीन और भारत के बीच 3488 किलोमीटर लम्बी सीमा है। सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, हिमाचर प्रदेश और उत्तराखंड इत्यादि में भारत की सीमा चीन से लगती है। भूटान ने भी एक बार फिर साफ किया है कि डोकलाम उसका इलाका है और चीन उस पर गलत दावा जता रहा है।

16 जून को भारत और चीन के बीच तब विवाद शुरू हुआ जब चीनी सैनिक भूटान के डोकलाम इलाके में सड़क बनाने की कोशिश कर रहे थे। भारतीय सैनिकों ने चीनियों को सड़क निर्माण से रोका। चीन इस इलाके में 40 टन वजन वाले भारी सैन्य वाहनों के आवाजाही लायक सड़क बनाना चाहता है। भारतीय सैनिकों द्वारा रोके जाने के बाद से ही दोनों देशों के सैनिक मौके पर आमने-सामने हैं। भारत की सुरक्षा के लिए डोकलाम का इलाका काफी संवेदनशील है।

चीन ने कहा है कि भारत जब तक डोकलाम में अपने सैनिक पीछे नहीं हटाएग तब तक दोनों देशों के बीच कोई सार्थक बातचीत संभव नहीं है। चीन के बयान के जवाब में भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संसद में कहा था कि दोनों देशों को डोकलाम से एक साथ अपने सैनिक पीछे हटाने चाहिए। जब से विवाद शुरू हुआ है तब से चीनी मीडिया में चीनी अधिकारियों और सैन्य विशेषज्ञों के हवाले से युद्ध की धमकियां दी जा रही हैं। चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने भारत को 1962 के युद्ध का सबक याद रखने के लिए कहा। वहीं भारतीय रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि भारत अब 1962 वाला नहीं है। अभी हाल ही में जेटली ने कहा है कि चीन से 1962 में मिले सबक का लाभ भारत को 1965 और 1971 में मिला था। 1965 और 1971 में भारत ने पाकिस्तान को युद्ध में हराया था।

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