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पाकिस्तान को परमाणु रिएक्टरों की आपूर्ति पर चीन की सफ़ाई

शस्त्र नियंत्रण संघ (एसीए) का कहना था कि चीन द्वारा पाकिस्तान को परमाणु सामग्री का निर्यात किया जाना अन्तरराष्ट्रीय नियमों और स्थापित प्रक्रियाओं का उल्लंघन है।
Author बीजिंग | August 4, 2016 16:19 pm
चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग के साथ पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ। (फ़ोटो-एपी/पीटीआई)

अपने करीबी दोस्त पाकिस्तान के साथ अपने परमाणु सहयोग का बचाव करते हुए चीन ने गुरुवार (4 अगस्त) को कहा कि इस्लामाबाद को परमाणु रिएक्टरों की आपूर्ति एनएसजी के सिद्धांतों के अनुरूप संयुक्त राष्ट्र के परमाणु विशेषज्ञों की निगरानी में की गई। अमेरिका के एक थिंक थैंक की एक रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कि पाकिस्तान के साथ चीन का परमाणु सहयोग परमाणु आपूर्ति समूह के सिद्धांतों के विपरीत है, चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा कि चीन-पाकिस्तान सहयोग 48 सदस्यीय परमाणु संस्था के अनुरूप है। हुआ ने कहा, ‘चीन ने कई मौकों पर कहा है कि चीन और पाकिस्तान के बीच असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र का सहयोग पूरी तरह से शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।’ हुआ ने कहा, ‘यह सहयोग अन्तरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की निगरानी और सावधानी तथा एनएसजी के सिद्धांतों के अनुरूप दोनों देशों के अन्तरराष्ट्रीय दायित्वों को ध्यान में रखते हुए किया गया।’ शस्त्र नियंत्रण संघ (एसीए) ने इस बात पर चिंता जताई थी कि चीन द्वारा पाकिस्तान को परमाणु सामग्री का निर्यात किया जा रहा है। संघ का कहना था कि यह अन्तरराष्ट्रीय नियमों और स्थापित प्रक्रियाओं का उल्लंघन है।

एसीए की रिपोर्ट में कहा गया, ‘चीन ने अपने निर्यात नियंत्रण को मजबूत करने के लिए पिछले कई वर्षों में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। हालांकि पाकिस्तान को परमाणु रिएक्टर बेचने का चीन का निर्णय एनएसजी के विपरीत है और चिंतित करने वाले देशों को मिसाइल प्रौद्योगिकी देने से चीन की छवि में गिरावट आई है।’ परमाणु अप्रसार और निरस्त्रीकरण पर अपने 2013-2016 के अद्यतन आकलन में एसीए ने चीन को परमाणु हथियारों से संबंधित निर्यात नियंत्रण में एफ ग्रेड दिया है, जिसे असफलता का प्रतीक माना जाता है। रिपोर्ट में कहा गया, ‘निर्यात नियंत्रण में प्रगति के बावजूद चीन का पाकिस्तान को परमाणु रिएक्टर की आपूर्ति करना जारी है। हालांकि रिएक्टरों की बिक्री को एनएसजी ने सर्वसम्मति से छूट नहीं दी है।’ पाकिस्तान न तो एनपीटी का सदस्य है और न ही वह आईएईए सावधानियों का पूरी तरह से पालन करता है। ऐसे में एनएसजी नियमों के तहत वह इस तरह की सहायता पाने का पात्र नहीं है।

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