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विवादित साउथ चाइना सी में चीन ने उतारा प्‍लेन, वियतनाम आगबबूला, अमेरिका ने जताई चिंता

वियतनाम ने बीजिंग पर उसकी संप्रभुता का गंभीर उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। वियतनामी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उसके हिस्से में पड़ने वाले स्पार्टले द्वीप के एक हिस्से में हवाईपट्टी अवैध रूप से बनाई गई।
Author बीजिंग | January 3, 2016 20:24 pm
विवादास्‍पद साउथ चाइना सी का एरियल व्‍यू (FILE PHOTO: REUTERS)

चीन ने दक्षिण चीन सागर के विवादित हिस्से में बनाए गए कृत्रिम द्वीप पर पहली बार एक विमान उतारा है। इसके चलते वियतनाम ने बीजिंग पर उसकी संप्रभुता का गंभीर उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। वियतनामी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उसके हिस्से में पड़ने वाले स्पार्टले द्वीप के एक हिस्से में हवाईपट्टी अवैध रूप से बनाई गई। हनोई में विदेश मंत्रालय ने कहा कि इसने चीन के दूतावास को एक विरोध नोट सौंपा है और बीजिंग से इस कार्य का दोहराव नहीं करने को कहा है। इसने स्पार्टले द्वीप पर उड़ान को वियतनाम की संप्रभुता का गंभीर उल्लंघन बताया है। वहीं, चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने बताया कि चीन ने उड़ान परीक्षण इसलिए किया है कि यह जांचा जा सके कि सिविल एविएशन के मानदंडों को पूरा करता है या नहीं। हुआ ने कहा कि उड़ान परीक्षण असैन्य था। उन्‍होंने यह भी कहा, ‘‘गतिविधि पूरी तरह से चीन के संप्रभुता के दायरे में हुई है।’’ उन्होंने कहा कि चीन की नानशा द्वीपों और इससे जुड़े जल क्षेत्र पर अविवादित संप्रभुता है। वियतनाम के बेबुनियाद आरोपों को चीन स्वीकार नहीं करेगा।

इस बीच, अमेरिका ने कहा है कि यह चिंता की बात है कि शनिवार की उड़ान ने तनाव बढ़ा दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग की प्रवक्ता पूजा झुनझुनवाला के हवाले से बीबीसी ने बताया कि दावेदारों के लिए इस बात की अत्यधिक जरूरत है कि वे और अधिक भूमि कब्जाने को रोकने, नयी सुविधाओं का निर्माण करने और विवादित स्थलों के सैन्यीकरण को रोकने का सार्वजनिक वादा करें। बता दें कि दक्षिण चीन सागर प्राकृतिक संसाधनों के मामले में समृद्ध है। दुनिया के आधे से अधिक जहाज यहां से होकर गुजरते हैं। इनमें दुनिया के तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का एक तिहाई हिस्सा भी शामिल है। चीन लगभग समूचे दक्षिण चीन सागर पर दावा करता है, जिसके चलते वियतनाम और फिलीपींस, मलेशिया तथा ब्रुनेई जैसे कुछ अन्य देशों के साथ उसकी तकरार चल रही है। इन देशों का आरोप है कि चीन विवादित क्षेत्र में अवैध रूप से भूमि पर दावा कर रहा है ताकि वह सुविधाओं से युक्त कृत्रिम द्वीप बनाकर उनका इस्तेमाल सैन्य इस्तेमाल के लिए कर सके।

 

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