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बांग्लादेश में तीन सूफी मुसलमानों पर हमला, हालत गंभीर

ढाका से करीब 240 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एकतारपुर गांव में आठ से दस हमलावरों ने मध्यरात्रि के करीब कई बाउलों पर उनके निवास स्थान पर धारधार हथियारों और लोहे की छड़ों से हमला कर दिया।
Author ढाका | July 17, 2016 20:37 pm
चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।

बांग्लादेश में भारत की सीमा से सटे एक शहर में अज्ञात लोगों ने धारदार हथियारों से दो महिलाओं समेत तीन बुजुर्ग सूफी मुसलमानों पर हमला कर दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। मुसलमान बहुल इस देश में अल्पसंख्यक समुदाय पर हो रहे हमलों के क्रम में यह ताजा मामला है। यहां से करीब 240 किलोमीटर दूर एकतारपुर गांव में आठ से दस हमलावरों ने आधी रात को कई बाउलों (स्थानीय बाउल शैली के गायकों) पर उनके निवास स्थान पर धारधार हथियारों और लोहे की छड़ों से हमला कर दिया।

एक पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘जब बदमाशों ने अखड़ा (बाउलों के निवासस्थान) पर हमला किया तब वे लाठी, कुल्हाड़ियों से लैस थे। इस हमले में तीन गायक घायल हो गए, वे गहरी नींद में थे।’ रशीदा खातून (60), अब्दुर रहीम (65) और उनकी पत्नी बुलु बेगम (50) घायल हो गए। उनका स्थानीय स्वास्थ्य केन्द्र में उपचार चल रहा है। द डेली स्टार के अनुसार चाउदंगा सदर अस्पताल के डॉक्टर अनीसुर रहमान ने बताया कि सभी तीन घायलों की स्थिति नाजुक है।

अखड़ा (बाउलों के निवास स्थान) के मकान मालिक मुकुल हुसैन ने बताया कि अन्य बाउल भागने में सफल रहे। हुसैन ने बताया कि इस बात का पता नहीं लगाया जा सका है कि बाउलों पर किसने और क्यों हमला किया। बाउल समुदाय सार्वभौमिक सौहार्द्र का संदेश फैलाते हुए आध्यात्मिक गीत गाते हैं। वे मुस्लिम सूफी विचारों के करीब होते हैं और वे नियमित इस्लामिक रीति-रिवाजों का पालन नहीं करते। किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। वैसे पुलिस को कट्टरपंथी मुसलमानों पर संदेह है जो सूफीवाद की निंदा करते हैं। बुलु बेगम ने संवाददताओं को बताया कि सात-आठ लोग अखड़ा में घुस गए और वे लोहे की छड़ से पीटने लगे।

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