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13 करोड़ लोगों को जीवित रहने के लिए मदद की है आवश्यकता: बान की मून

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2008 में विश्व मानवता दिवस मनाए जाने की शुरुआत की थी।
Author संयुक्त राष्ट्र | August 21, 2016 02:27 am
संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून। (पीटीआई फाइल फोटो)

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने विश्व मानवता दिवस पर दिए गए एक संदेश में कहा है कि रिकॉर्ड 13 करोड़ लोग जीवित रहने के लिए सहायता पर निर्भर करते है और यह आश्चर्यजनक संख्या पृथ्वी के सर्वाधिक जनसंख्या वाले दसवें देश के बराबर है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में यह दिवस मनाने के लिए शुक्रवार (19 अगस्त) रात आयोजित एक समारोह में ‘अरब आइडल’ के विजेता मोहम्मद असफ, ‘गेम ऑफ थ्रॉन्स’ में अभिनय करने वाली नाताली डोर्मर, ‘द वॉयस’ की विजेता एलिसन पोर्टर और पूर्व ‘हैमिल्टन’ स्टार लेज्ली ओडोम जूनियर के अलावा सैकड़ों राजनयिकों एवं मेहमानों ने वैश्विक पीड़ा को कम करने के प्रयास तेज करने में समर्थन देने के लिए शिरकत की।

महासभा ने वर्ष 2008 में विश्व मानवता दिवस मनाए जाने की शुरुआत की थी ताकि उन मानवीय सहायता कर्मियों को सम्मानित किया जा सके जिन्होंने अपना काम करते हुए अपनी जान गंवा दी या घायल हो गए। यह दिवस मनाने के लिए 19 अगस्त की तारीख इसलिए तय की गई थी क्योंकि इस दिन वर्ष 2003 को बगदाद में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में बमबारी हुई थी जिसमें इराक में संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष दूत सर्जियो विएरा डी मेल्लो समेत 22 कर्मी मारे गए थे।

संयुक्त राष्ट्र के उप महासचिव जान एलियासन ने कहा कि यह बलिदान एवं साहसिक कार्यों को याद रखने, ‘हमारी साझी मानवीयता’ को याद करने और विश्व भर के उन हजारों मानवीय सहायता कर्मियों को श्रद्धांजलि देने का दिन है जिन्होंने ‘संकट और घोर निराशा के बीच जरूरतमंद लोगों को जीवनरक्षक मदद मुहैया कराने के लिए अपनी जिंदगी जोखिम में डाली।’ उन्होंने बताया कि पिछले साल 109 सहायता कर्मी मारे गए, 110 कर्मी घायल हुए और 68 कर्मियों का अपहरण हुआ।

संयुक्त राष्ट्र मानवीय कार्यों के प्रमुख स्टीफन ओ’ब्रायन ने कहा, ‘सीरिया से लेकर दक्षिण सूडान तक संकट में घिरे विश्वभर के लोगों को भोजन प्राप्त के लिए हिंसा करनी पड़ती है या पनाहगाहों की तलाश करते हुए डूबने का जोखिम मोल लेना पड़ता है जिसकी हम में से अधिकतर लोग कल्पना भी नहीं कर सकते। उन्होंने विश्वभर के लोगों से ‘एकजुटता दिखाने, अपनी आवाज बुलंद करने और यह मांग करने की अपील की कि विश्व के नेता ठोस कदम उठाएं।’

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