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स्किल डवलपमेंट में भारत की मदद कर सकता है आॅस्ट्रेलिया: थिंक-टैंक

आॅस्ट्रेलिया के एक थिंक टैंक का कहना है कि आॅस्ट्रेलिया कौशल विकास सुधार के लिए भारत की मदद कर सकता है लेकिन उसे मौजूदा प्रशिक्षण व्यवस्थाओं पर मूलभूत शोध करने की जरूरत है।
Author मेलबर्न | December 13, 2016 11:21 am
प्रतीकात्मक तस्वीर

आॅस्ट्रेलिया के एक थिंक टैंक का कहना है कि आॅस्ट्रेलिया कौशल विकास सुधार के लिए भारत की मदद कर सकता है लेकिन उसे मौजूदा प्रशिक्षण व्यवस्थाओं पर मूलभूत शोध करने की जरूरत है। इसके साथ ही उसे ऐसी योजनाओं को भारत की दीर्घकालीन आर्थिक रणनीति के अनुरूप ढालना चाहिए। मेलबर्न के थिंक-टैंक आॅस्ट्रेलिया इंडिया इंस्टीट्यूट (एआईआई) ने कहा कि ‘स्किल इंडिया’ भारत सरकार की एक बड़ी नीतिगत पहल है, जिसके तहत वर्ष 2022 तक 40 करोड़ भारतीय कर्मियों को पेशेवर प्रशिक्षण देने की बात कही गई है।
एआईआई ने ‘स्थायी कौशल विकास’ विषय पर हाल ही में जारी एक शोधपत्र में कहा, ‘‘आॅस्ट्रेलिया कौशल सुधार में भारत की मदद कर सकता है लेकिन इसके लिए मौजूदा प्रशिक्षण व्यवस्थाओं पर मूलभूत शोध करने की जरूरत है और इस बारे में यह स्पष्ट बताना जरूरी है कि वह इसमें शामिल क्यों होना चाहता है? उसे कौशल विकास की योजनाओं को भारत की दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति के समरूप बनाना चाहिए।’

रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में पेशेवर एवं शैक्षणिक प्रशिक्षण में आॅस्ट्रेलियाई निवेश अकसर विफल रहे और कुछ ही छात्र अब तक भारत में मौजूद आॅस्ट्रेलियाई पंजीकृत प्रशिक्षण संगठनों से स्नातक हो पाए हैं। रिपोर्ट में आॅस्ट्रेलियन ट्रेडिंग कमीशन के हवाले से कहा गया कि भारत में काम करने की कोशिश करने वाली आॅस्ट्रेलियाई कंपनियों को अपर्याप्त अवसंरचनात्मक सहयोग, पुराना पाठ्यक्रम और उद्योग जगत की कम भागीदारी मिली। वे उस दर पर गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण उपलब्ध करवाने में विफल रहे, जिसपर स्थानीय प्रदाता उपलब्ध करवाते हैं।

आपको बता दें कि इससे पहले भारत और अमेरिका के बीच गहरे संबंध से दोनों को फायदा होने की तरफ इशारा करते हुए अमेरिका के एक शीर्ष थिंक टैंक के तीन विशेषज्ञों के समूह ने आगामी डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन से अपील की है कि ‘उभरते’ भारत के साथ यथाशीघ्र संबंध स्थापित किया जाए। सेंटर फॉर स्ट्रैटजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (सीएसआईएस) के तीन विशेषज्ञों कैथलीन एच. हिक्स, डी. सी. रिचर्ड एम. रोसो और जॉन कियस ने लिखा है, ‘उभरते और समान सोच वाले भारत के साथ जल्द से जल्द जुड़ाव होना ट्रम्प प्रशासन के लिए जल्द जीत साबित हो सकता है।’ ओप-एड में लिखा है, ‘भारत और अमेरिका को एक-दूसरे के निकट लाने के लिए सरकार के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ स्तर के अधिकारियों को सतत् प्रयास करना होगा। जैसा कि विदेश मंत्री कार्टर के भारत दौरे से पता चलता है कि दोनों देशों के बीच गहरे संबंधों का दोनों को काफी फायदा होगा।’ इसने कहा कि भारत-अमेरिका के बीच रक्षा संबंध वॉशिंगटन और दिल्ली के बीच प्रशासनिक स्तर पर बहुस्तरीय प्रयास से पिछले तीन वर्षों में काफी आगे बढ़ा है। सीएसआईएस के विशेषज्ञों ने कहा, ‘निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनके राष्ट्रीय सुरक्षा की टीम ने अपने प्रशासन की प्रमुख प्राथमिकताओं की पहचान की है, भारत-अमेरिका के बीच संबंधों को लगातार मजबूत करना उनके शीर्ष एजेंडा में शामिल होना चाहिए।’

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