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दक्षिण एशियाई देश 20 साल में पोषण संबंधी गंभीर चुनौतियों का करेंगे सामना

खराब आहार सेहत के लिए शराब और तंबाकू सेवन से होने वाले नुकसान से कहीं ज्यादा खतरनाक है।
Author नई दिल्ली | October 8, 2016 03:48 am
प्रतिकात्मक फोटो

खराब आहार सेहत के लिए शराब और तंबाकू सेवन से होने वाले नुकसान से कहीं ज्यादा खतरनाक है। फोरसाइट की रिपोर्ट और साउथ एशियन पेपर बताते हैं कि बिगड़ती भोजन व्यवस्था व आहार अगले 20 सालों तक किस कदर स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। रिपोर्ट उन रणनीतियों की भूमिका भी बताती है जिन्हें सरकार को स्थायी विकास का लक्ष्य सामने रखने और हासिल करने के लिए अपनाना चाहिए।भारत ग्लोबल पैनल आॅन एग्रीकल्चर एंड फूड सिस्टम्स फॉर न्यूट्रीशन (पोषण, कृषि और आहार प्रणाली पर अतंरराष्ट्रीय पैनल)पर एक नई रिपोर्ट ‘भोजन प्रणाली और आहार : इक्कीसवीं सदी की चुनौतियों से मुकाबला’ के नतीजों से यह खुलासा हुआ है कि अगले 20 सालों में दक्षिण एशियाई देश पोषण बेहतर करने सहित गंभीर चुनौतियों का सामना करेंगे और आहार से सबंधित गैर-संक्रामक बीमारियों जैसे हृदय की बीमारी, कैंसर, स्ट्रोक और डायबिटीज में बढ़ोतरी से बचेंगे।

पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन आॅफ इंडिया के अध्यक्ष और पैनल सदस्य प्रो श्रीनाथ रेड्डी ने कहा कि फोरसाइट रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण एशिया में, जहां पोषण कम होने के साथ-साथ मोटापा भी मौजूद है, कुपोषण दोहरे बोझ के खतरों पर रोशनी डालता है, लेकिन उच्च आय वाले देशों ने मोटापे को कम करने के लिए जो लंबा और नुकसानदेह तरीका चुना है वह सुरक्षित व तय मार्ग नहीं है। फोरसाइट की रिपोर्ट में ग्लोबल पैनल ने ‘बेहतर भविष्य के लिए बेहतर आहार : दक्षिण एशिया में एक भोजन प्रणाली’ परिप्रेक्ष्य पर आलेख भी जारी किया। इसमें मौजूदा समस्याओं पर रोशनी डाली गई है। ये वो चुनौतियां हैं जिनका सामना तब करना होगा जब भोजन की खपत को स्थायी और दुरुस्त करना होगा। इसमें सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल के साथ-साथ एसडीजी भी शामिल है।

ब्रिटेन के पूर्व मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार और पोषण के ग्लोबल पैनल के चेयरमैन सर जान बेड्डिंगटन ने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए आवश्यक प्रयास हर स्तर पर वैसा नहीं है जैसे अतंरराष्ट्रीय समुदाय ने एचआइवी, एड्स मलेरिया और दूसरी बीमारियों के लिए किया था। वैसे तो दक्षिण एशियाई देशों में स्वास्थ्य और कुपोषण से संबंधित मुद्दों से निपटने के लिए चलाए जाने वाले अभियान ने प्रगति की है, लेकिन रिपोर्ट से पता चलता है कि खाद्य प्रणाली में स्वस्थ आहार अभी मुहैया होना बाकी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 80-85 फीसद प्रसस्ंकृत खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल होता है। इसलिए ऊर्जा से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ गया है, लेकिन पोषक पदार्थों की भारी कमी है। इस रिपोर्ट से पता चलता है कि 2030 में दक्षिण एशिया में 188 मिलियन लोग कम कैलोरी वाले होंगे। रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि दक्षिण एशिया में कार्रवाई के लिए खास प्राथमिकताएं होनी चाहिए और इनमें नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों के लिए आहार की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आहार और शिशु नीति पर ध्यान देना होगा। इसके अलावा आहार प्रणाली में आने वाली सभी नीतियों के निर्माण में किशोरियों और महिलाओं के आहार की गुणवत्ता प्राथमिकता के आधार पर बेहतर करना होगा। ग्लोबल पैनल के निदेशक प्रो सैंडी थामस ने कहा कि रिपोर्ट सरकारी मशीनरी के लिए गाइड की तरह है इससे मदद लेकर काम किया जा सकता है।

 

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First Published on October 8, 2016 3:48 am

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