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ईश निंदा मामला: ‘मौत की सज़ा’ पर पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट में आसिया बीबी की सुनवाई टली

2009 में आसिया बीबी को ईश निंदा का दोषी पाया गया था और 2010 के बाद से वे मौत की सजा की कतार में हैं।
Author इस्लामाबाद | October 13, 2016 18:37 pm
पंजाब प्रांत ननकाना क्षेत्र की निवासी आसिया बीबी पांच बच्चों की मां है। [Adrees Latif/Reuters/File]

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने ईसाई महिला आसिया बीबी के ईश निंदा से संबंधित मामले में सुनवाई टाल दी है। ऐसा इस मामले से एक न्यायमूर्ति के हटने के बाद किया गया। ईश निंदा का यह मामला साल 2010 का है जिसमें महिला को मौत की सजा दी गई है और उन्होंने सजा को पलटने के लिए अपील दायर की है। पंजाब प्रांत ननकाना क्षेत्र की निवासी आसिया बीबी पांच बच्चों की मां है। 2009 में उन्हें ईश निंदा का दोषी पाया गया था और 2010 के बाद से वे मौत की सजा की कतार में हैं।

लाहौर हाईकोर्ट ने साल 2014 में उनकी सजा को बरकरार रखा था जिसके बाद उन्होंने शीर्ष न्यायालय में अपील दायर की थी। इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ को शुरू करनी थी लेकिन उनमें से एक न्यायमूर्ति इकबाल हामिद उर रहमान ने यह तर्क देते हुए मामले से हटने का फैसला लिया कि उन्होंने ही पंजाब के उदारवादी गवर्नर सलमान तासीर के मामले की सुनवाई की थी। तासीर की हत्या कर दी गई थी। न्यायमूर्ति रहमान ने कहा कि उन्होंने प्रधान न्यायाधीश से पीठ में किसी और न्यायमूर्ति को नियुक्त करने का आग्रह किया है। मामले की सुनवाई कब शुरू होगी अभी इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।

साल 2011 में आसिया बीबी के दोषी ठहराए जाने के बाद तासीर ने उनसे मुलाकात की थी और ईश निंदा कानून को ‘काला कानून’ बताया था जिसके बाद उनकी सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों में से एक मुमताज कादरी ने उनकी हत्या कर दी थी। कादरी को तासीर की मौत का दोषी माना गया था और सुप्रीम कोर्ट द्वारा उसकी अपील ठुकरा देने के बाद इस साल कादरी को फरवरी में फांसी पर चढ़ा दिया गया था। जस्टीस इकबाल हामिद उर रहमान फैसला सुनाने वाली पीठ का हिस्सा थे। मुस्लिम बहुत पाकिस्तान में ईश निंदा संवेदनशील मुद्दा है।

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