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नशीले पदार्थों की तस्करी व आतंकवाद के गठजोड़ का खात्मा जरूरी : भारत

जेटली ने कहा, ‘हालांकि राष्ट्रीय प्रयास कितने भी तीव्र और गंभीर क्यों न हों, वे नशीले पदार्थों की समस्या से निपटने के लिए पूरी तरह कारगर साबित नहीं हो सकते हैं।
Author संयुक्त राष्ट्र | April 20, 2016 23:34 pm
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली। (एपी फोेटो)

भारत ने वैश्विक समुदाय से अपील की है कि वह नशीले पदार्थों की संगठित तस्करी और आतंकवादी तंत्रों के बीच बढ़ते गठजोड़ के खिलाफ अपनी साझा लड़ाई को कड़ा करते हुए इनके वित्तपोषण को अवरुद्ध कर दे क्योंकि इन बुराइयों ने विभिन्न क्षेत्रों की शांति, सुरक्षा और स्थिरता पर खतरा पैदा कर दिया है।

नशीले पदार्थों की समस्या पर आयोजित संयुक्त राष्ट्र महासभा के विशेष सत्र को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा, ‘आतंकवाद आज के सभ्य समाजों के लिए सबसे खतरनाक खतरा है। आतंकवाद किसी सीमा को नहीं जानता और आतंकवादी विभिन्न महाद्वीपों में शहरों और मासूम नागरिकों पर हमला बोलना जारी रखे हुए है।’ जेटली ने कहा, ‘नशीले पदार्थों की तस्करी और आतंकी तंत्रों का बढ़ता गठजोड़ विभिन्न क्षेत्रों की शांति, सुरक्षा और स्थिरता को खतरे में डालता है।’ अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील करते हुए उन्होंने कहा, ‘हमें इन बुराइयों के खिलाफ अपनी साझा लड़ाई को जारी रखना होगा और इसे कठोर करना होगा।’

जेटली ने धन शोधन एवं अवैध वित्तपोषण को और नशीले पदार्थों की तस्करी एवं विभिन्न देशों के बीच होने वाले अन्य संगठित अपराधों को ‘बड़ी चुनौती’ बताया। 193 सदस्यों वाली इस संस्था के तीन दिवसीय सत्र में जेटली ने कहा, ‘आपराधिक तंत्रों और नशीले पदार्थों के गठजोड़ को उनका वित्तपोषण अवरुद्ध करके ही प्रभावी ढंग से ध्वस्त किया जा सकता है।’ संस्था ने नशीले पदार्थों की वैश्विक समस्या से निपटने के नए मसौदे को स्वीकार किया है। इसे पिछले माह संयुक्त राष्ट्र की संस्था कमीशन ऑन नारकोटिक ड्रग्स ने वियना में तैयार किया था। जेटली ने पिछले सप्ताह वाशिंगटन में अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष और विश्व बैंक की बैठकों में शिरकत की थी।

उन्होंने शहर में निवेशकों के साथ भी बैठकें की थीं। नशीले पदार्थों की वैश्विक समस्या पर संयुक्त राष्ट्र के 30वें सत्र को संबोधित करते हुए जेटली ने कहा कि नशीले पदार्थों की समस्या के वैश्विक आयाम हैं। इससे निपटने के लिए विभिन्न देशों के बीच सहयोग की जरूरत है क्योंकि यह उनकी वर्ष 2030 विकास एजंडा के लक्ष्यों को हासिल करने की क्षमता पर असर डालती है। जेटली ने नशीले पदार्थों पर संयुक्त राष्ट्र के तीन समझौतों के प्रति भारत की कड़ी प्रतिबद्धता जताते हुए रेखांकित किया कि दुनिया को एक निद्रा लाने वाली औषधि के विधिसम्मत कच्चे मादक पदार्थ की आपूर्ति करने वाला देश होने के नाते और पारंपरिक तौर पर विधिसम्मत अफीम उत्पादक होने के नाते, भारत किसी भी अवैध खेती के उन्मूलन, मांग घटाने और निषेधात्मक एवं प्रवर्तन उपायों को लागू करने से जुड़ी अपनी जिम्मेदारी से ‘पूरी तरह अवगत’ है।

उन्होंने कहा, ‘हालांकि राष्ट्रीय प्रयास कितने भी तीव्र और गंभीर क्यों न हों, वे नशीले पदार्थों की समस्या से निपटने के लिए पूरी तरह कारगर साबित नहीं हो सकते हैं। इस क्षेत्र में द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है।’ उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के लिए व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा स्वीकार की गई तीन संधियों ने नशीले पदार्थों की समस्या को सीमित करने और इसके प्रबंधन में बेहतर भूमिका अदा की है और सदस्य देशों को अपने घरेलू नियमों चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए पर्याप्त लचीलापन उपलब्ध करवाया है ताकि 21वीं सदी की वास्तविकताओं और चुनौतियों के अनुरूप चला जा सके। जेटली ने कहा कि मांग और आपूर्ति कम करने की गतिविधियों को मजबूत करने के साथ-साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा के जरिए उपचार और उपचार के उपरांत दी जाने वाली सुविधाओं में मजबूती लाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं।

जेटली ने कहा कि भारत चिकित्सकीय एवं वैज्ञानिक मकसद के लिए नियंत्रित पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ उनके किसी अन्य काम में इस्तेमाल किए जाने, उनके दुरुपयोग एवं उनकी तस्करी पर रोक लगाने के लिए प्रतिबंध है। भारत अत्यधिक मात्रा में नशीले पदार्थों के सेवन के पीड़ितों एवं कैंसर के मरीजों के लिए ओपिऑयड सबस्टीट्यूशन थेरैपी और दर्द निवारक के रूप में दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

जेटली ने नशीले पदार्थों एवं धन शोधन संबंधी अपराधों को रोकने में क्षेत्रीय सहयोग पर जोर देते हुए कहा कि भारत नशीले पदार्थों एवं अपराध पर संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के सहयोग से दक्षिण एशिया के लिए क्षेत्रीय समन्वय केंद्र एसएआरआइसीसी (साउथ एशिया रीजनल इंटेलिजेंस एंड कोआर्डिनेटिड सेंटर) गठित करने के उन्नत चरण पर है जिसके भारत, नेपाल, भूटान, म्यांमा, बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव संस्थापक सदस्य हैं।

उन्होंने कहा, ‘खासकर आगामी तीन वर्षों में काम वास्तव में कठिन है। मुझे भरोसा है कि यह सत्र और इसके परिणाम हमारे जीवनकाल में नशीले पदार्थों के दुरुपयोग से मुक्त विश्व का निर्माण करने और ‘हम जो चिरस्थायी भविष्य चाहते हैं’, उसे हासिल करने की दिशा में राष्ट्रीय, द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कदमों को एक नई गति देंगे।’

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