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नए प्रमुख गुटेरेस ने कहा, संयुक्त राष्ट्र ने यौन हिंसा, शोषण जैसे अपराधों को रोकने का प्रयास नहीं किया

संरा के नए प्रमुख एंटोनिया गुटेरेस ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र को प्रक्रिया से ज्यादा ध्यान परिणाम पर ध्यान देना चाहिए।
Author संयुक्त राष्ट्र | December 13, 2016 11:55 am
संरा के नए प्रमुख एंटोनिया गुटेरेस

संरा के नए प्रमुख एंटोनिया गुटेरेस ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र को प्रक्रिया से ज्यादा परिणाम पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने, लंबे समय से चले आ रहे विवादों का हल निकालने के लिए उन पर ‘व्यक्तिगत रूप से ध्यान देने’ और वर्तमान वैश्विक चुनौतियों से निबटने के लिए 71 वर्ष पुराने विश्व निकाय में बदलाव करने का भी संकल्प लिया। कल, 193 सदस्यीय विश्व निकाय के यहां हुए विशेष सत्र में महासभा के अध्यक्ष पीटर थॉमसन ने गुटेरेस को पद की शपथ दिलवाई थी जिसके साथ ही वह संयुक्त राष्ट्र के नौंवे महासचिव बन गए। वह वर्ष 2005 से 2015 तक संयुक्त राष्ट्र में शरणार्थी मामलों के उच्चायुक्त रहे और वर्ष 1995 से 2002 तक पुर्तगाल के प्रधानमंत्री रहे।

उन्होंने महासचिव बान की मून की जगह ली है जिनका कार्यकाल इस महीने के अंत में समाप्त हो रहा है। मून बीते दस वर्षों से इस निकाय की कमान संभाले हुए थे। इस पद के लिए गुटेरेस का चयन गत अक्तूबर माह में हुआ था और यह जिम्मेदारी वह एक जनवरी, 2017 से संभालेंगे।
गुटेरेस ने संयुक्त राष्ट्र से ‘‘बदलाव के लिए तैयार रहने’’ का आह्वान करते हुए संगठन के कामकाज में विकास को केंद्र में रखने का संकल्प लिया और सुनिश्चित किया कि अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के समक्ष खड़ी चुनौतियों से प्रभावी रूप से निबटने के लिए संरा में बदलाव किया जाएगा।
शपथ लेने के बाद गुटेरेस ने कहा, ‘‘संयुक्त राष्ट्र को चुस्त, दक्ष और प्रभावी बनना होगा। उसे प्रक्रिया से ज्यादा ध्यान परिणाम पर देना होगा, नौकरशाही से ज्यादा लोगों पर ध्यान देना होगा और बड़े पैमाने पर जो चुनौतियां मुंह बाए खड़ी हैं उनसे निबटने के लिए हमें संरा में सुधार की निरंतर और गहन प्रक्रिया पर मिलकर काम करना होगा।’

संरा प्रमुख एंटोनिया गुटेरेस ने कहा कि वैश्विकरण और तकनीकी प्रगति के कारण असमानता बढ़ी है, कई देश बेरोजगार युवाओं की समस्या से जूझ रहे हैं और वैश्विकरण के कारण संगठित अपराध तथा तस्करी बढ़े हैं जबकि जनता और सियासी प्रतिष्ठानों के बीच की खाई गहरी हुई है। उन्होंने कहा, ‘‘कुछ देशों में अस्थिरता, सामाजिक अशांति-यहां तक कि हिंसा और विवाद बढ़ा है। हर जगह मतदाता यथास्थिति को और सरकार द्वारा जनमत संग्रह के लिए रखे गए किसी भी प्रस्ताव को अस्वीकार कर रहे हैं। कईयों ने ना केवल अपनी सरकार में बल्कि संरा समेत वैश्विक संस्थानों में भी भरोसा खो दिया है।

गुटेरेस ने कहा कि वर्तमान वैश्विक माहौल में दुनियाभर में लोगों के फैसलों के पीछे की वजह खौफ है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादों के निबटारे के लिए उनका कार्यालय मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा। गुटेरेस ने कहा कि जहां बचाव काम नहीं करता वहां विवादों का समाधान निकालने के लिए कुछ और प्रयास करने की जरूरत है। सीरिया, यमन, दक्षिणी सूडान में गहन संकट से लेकर इस्राइल-फलस्तीन समेत और कहीं भी लंबे समय से चले आ रहे विवादों में मध्यस्थता और रचनात्मक कूटनीति अपनाए जाने की जरूरत है।
उन्होंने संगठन के लिए तीन रणनीतिक प्राथमिकताओं पर प्रकाश डाला- अमन, सतत विकास को बढ़ावा देना और आतंरिक प्रबंधन में सुधार के लिए काम करना।

उन्होंने कहा कि संरा ने अभी भी यौन हिंसा और शोषण जैसे अपराधों को रोकने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए हैं। गुटेरेस ने संरा समेत पूरे विश्व में लैंगिक समानता और सशक्तिकरण की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एक ओर पूरी दुनिया का आपस में संपर्क बेहतर हो रहा है वहीं दूसरी ओर समाज खंड-खंड हो रहे हैं। ज्यादा से ज्यादा लोग अपनी ही दुनिया में जी रहे हैं। संरा के नए महासचिव का चुनाव पारंपरिक तौर पर बंद दरवाजे के भीतर कुछ शक्तिशाली देशों द्वारा ही किया जाता है लेकिन इतिहास में पहली बार इस चयन में जन चर्चाओं को शामिल किया गया।

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