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चीन से तनाव के बीच ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम की पहली खेप भारत के लिए रवाना, परमाणु ऊर्जा बनाने के लिए होगा इस्तेमाल

ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री जूली बिशप ने कहा, 'भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच व्यावसायिक समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम की पहली खेप इंडिया के लिए रवाना हो चुकी है।
प्रतीकात्मक चित्र

भारत-चीन के दरम्यान चल रहे डोकलाम विवाद के बीच हिन्दुस्तान को एक अहम कूटनीतिक और सामरिक कामयाबी मिली है। ऑस्ट्रेलिया ने भारत को पहली बार यूरेनियम की खेप भेजी है। यूरेनियम ही वो तत्व है जिससे एटम बम और परमाणु ऊर्जा तैयार की जाती है। भारत ऑस्ट्रेलिया से मंगाये गये इस यूरेनियम का इस्तेमाल शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के उत्पादन में करेगा। भारत दौरे पर आई ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री जूली बिशप ने कहा, ‘भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच व्यावसायिक समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम की पहली खेप इंडिया के लिए रवाना हो चुकी है। ऑस्ट्रेलिया में यूरेनियम की सप्लाई के लिए संसदीय अनुमति पहले ही मिल गई थी।’ इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक विदेश मंत्री जूली बिशप ने कहा कि दोनों देश परमाणु सुरक्षा समझौते पर भी सहमत हुए हैं। ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री ने मौजूदा भारत चीन तनाव पर भी अपनी राय रखी और कहा कि चीन आक्रामक विदेश नीति का पालन कर रहा है, चीन को अंतर्राष्ट्रीय कायदे कानून का पालन करना चाहिए। सिक्किम में डोकलाम विवाद पर जूली बिशप ने कहा कि दो देशों के बीच सीमा विवाद शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम नहीं चाहते हैं कि दो देशों के बीच विवाद बढ़े, लेकिन कोई भी गड़बड़ी स्थानीय शांति के लिए अच्छा नहीं है।

बता दें कि भारत और ऑस्ट्रेलिया ने 2014 में सिविल न्यूक्लियर पैक्ट पर समझौता किया है। ऑस्ट्रेलिया न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप देशों के क्लब में भारत को सदस्य बनाने का भी समर्थक है। भारत यूरेनियम का इस्तेमाल देश में बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए करने वाला है। बता दें कि भारत में 21 न्यूक्लियर रियेक्टर हैं, जिससे भारत 5 हजार 780 मेगावाट बिजली का उत्पादन कर सकता है। इसमें से 3 हजार 380 मेगावाट बिजली पैदा करने वाले 13 रियेक्टर अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं की निगरानी में हैं और आयात किये हुए यूरेनियम पर निर्भर हैं। भारत अपनी न्यूक्लियर ऊर्जा बनाने की क्षमता को बढ़ाना चाहता है, लेकिन कच्चे माल की कमी वजह से इसमें बाधा आ रही है। 2008 में अमेरिका से सिविल न्यूक्लियर डील करने के बाद भारत ने ब्रिटेन, कनाडा, जापान और ऑस्ट्रेलिया से भी समझौता किया है।

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