December 03, 2016

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ट्रंप की जीत के बाद मुसलमान होने के कारण अमेरिका में शिक्षक ने पांच साल के बच्चे का गला दबाने की कोशिश की

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की जीत के बाद सिलसिलेवार हुयी नस्लीय घटनाओं में एक ताजा मामले में एक महिला शिक्षक ने पांच वर्षीय एक बच्चे को कथित तौर पर गरदन पकड़कर उठा लिया और उसका गला दबाने लगी।

Author वाशिंगटन | November 25, 2016 01:48 am
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अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की जीत के बाद सिलसिलेवार हुयी नस्लीय घटनाओं में एक ताजा मामले में एक महिला शिक्षक ने पांच वर्षीय एक बच्चे को कथित तौर पर गर्दन पकड़कर उठा लिया और उसका गला दबाने लगी। देश के सबसे बड़े मुस्लिम मानवाधिकार समूह कौंसिल ऑन अमेरिकन इस्लामिक रिलेशन (सीएआईआर) ने घटना की जांच का आह्वान किया है। उत्तर कैरोलीना में शारलोट मैकेनबर्ग एलीमेंट्री स्कूल में केजी के मुस्लिम छात्र पर महिला शिक्षक ने हमला किया। शारलोट ऑब्जरवर के मुताबिक सीएआईआर के मुताबिक नार्थ शारलोट में डेविड कॉक्स रोड एलीमेंटरी स्कूल में घटना की शुरुआत स्कूली वर्ष शुरू होने पर हुई लेकिन हालिया घटना पिछले सप्ताह हुई।

संगठन के वकील माहा सैयद ने बताया कि शारलोट-मैकेनबर्ग बोर्ड ऑफ एडुकेशन को लिखा, ‘स्कूली वर्ष के पहले दो महीने में (मुस्लिम छात्र) को सहपाठियों के साथ शिक्षकों ने भी डराया धमकाया।’ सैयद ने लिखा है कि शिक्षक उसे सहपाठियों से अलग कर भारी वजन ढोने को कहते । पीछे में जो बैग लटकाने दिया जाता उसमें भारी किताब और हेडफोन होते जिससे कुछ दिनों बाद (छात्र को) कमर में दर्द होने लगा।

गौरतलब है कि भारत में जन्मी पेप्सिको की मुख्य कार्यकारी अधिकारी इंद्रा नूयी का कहना है कि राष्ट्रपति चुनावों में हिलेरी क्लिंटन की हार और डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति चुने जाने से अमेरिका में उनकी बेटियों, समलैंगिकों, कर्मचारियों और गोरों को छोड़ बाकी लोगों को अपनी सुरक्षा को लेकर ‘गंभीर चिंता’ है। न्यूयॉर्क टाइम्स डीलबुक सम्मेलन में 10 नवंबर को इंद्रा से पूछा गया कि नौ नवंबर को जब ट्रंप की विजय के बारे में उन्हें पता चला तो उन्हें कैसा महसूस हुआ। इसके जवाब में उन्होंने कहा, ‘क्या आपके पास यहां (आंसू पोंछने के लिए) कागज की रुमाल का पैकेट है।’गौरतलब है कि इंद्रा हिलेरी की कड़ी समर्थक हैं। इंद्रा देखने से ही निराश लग रही थी। उन्होंने कहा कि हिलेरी की हार ने उनकी बेटियां और पेप्सिको के कर्मचारियों में घोर निराशा है। कंपनी के कर्मचारियों, विशेषकर अश्वेत कर्मचारियों के मन में ट्रंप के राष्ट्रपति बनने से अमेरिका में अपनी सुरक्षा को लेकर बड़ा भय घर कर गया है। उन्होंने कहा, ‘मुझे अपनी बेटियों और कर्मचारियों के कई प्रश्नों के जवाब देने पड़े थे। वे सभी रो रहे हैं। हमारे सारे कर्मचारी रो रहे हैं। वे प्रश्न पूछ रहे हैं कि क्या अश्वेत, महिलाएं और समलैंगिक समूह के लोग सुरक्षित हैं।

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First Published on November 24, 2016 11:51 pm

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