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सिर्फ 15 सेंकेंड चार्ज होने के बाद 2 किमी चलती है यह बस

फ्लैश चार्जिंग के साथ यह बस महज 15 सेकेंड में 600 किलोवाट ऊर्जा प्राप्त कर लेती है।
इस बस के इस्तेमाल से कार्बन डाई ऑक्साइड के उत्सर्जन में भारी कटौती की जा सकती है। (PHOTO: ABB)

साल 2017 तक जेनेवा में ऐसी बसें होंगी जो पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सूरत बदल देंगी। इन बसों की खासियत होगी कि सिर्फ 15 सेकेंड चार्ज करके इन बसों से 2 किमी की दूरी तय की जा सकेगी। इस तकनीक पर भारतीय पर्यावरणविदों की भी नजर रहेगी। इस तकनीक से भारत को भी खासा फायदा हो सकता है। इस तकनीक से भारत 3.7 मिलियन टन कार्बनडाई ऑक्साइड के उत्सर्जन पर लगाम लगा सकता है। जेनेवा पब्लिक ट्रांसपोर्ट, ऑफिस ऑफ प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्रीज एंड टेक्नोलॉजी, द जनेवा पॉवर यूटीलिटी मिलकर इन बसों का निर्माण करेंगे। इन बसों को TOSA नाम से जाना जाएगा। इनका पूरा नाम ट्रॉली बस ऑप्टिमाइजेशन सिस्टम एलीमिनेशन होगा। खास बात यह है कि फ्लैश चार्जिंग तकनीक के जरिए सिर्फ 15 सेंकेंड की चार्जिंग से इन बसों की बैट्री को 600 किलोवाट की ऊर्जा दी जा सकेगी।

इतनी पॉवर से 130 लोगों को लेकर यह बस 2 किमी तक जा सकेगी। इन बसों की सेवा शुरुआत हो जाने के बाद जेनेवा में लगभग 1000 टन कार्बन डाई के उत्सर्जन पर रोक लग सकेगी। इन बसों की सेवा पूरी तरह शुरु हो जाने के बाद इन बसों में 10, 000 यात्री रोजाना यात्रा करेंगे। इस तकनीक पर भारतीय पर्यावरणविदों की भी नजर है अगर यह तकनीक भारत में इस्तेमाल की जा सकेगी तो भारत में कार्बन डाई ऑक्साइड के उत्सर्जन पर लगाम कसने में आसानी हो जाएगी। भारत में प्रदूषण की समस्या दिन प्रति दिन बढ़ती जा रही है। राजधानी दिल्ली में प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए कई प्रयास किए गए हैं। दिल्ली सरकार ने इवन ऑड का फॉर्म्यूला अपनाया था पर यह कामयाब नहीं हो सका। राजधानी में लगातार गाड़ियों की संख्या बढ़ रही है और साथ ही बढ़ रही है प्रदूषण की समस्या। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के मुताबिक भारत में 150,000 लाख डीजल बसें चलती हैं और अगर इन्हें इलेक्ट्रिक बस से रिप्लेस कर दिया जाए तो भारत कार्बन डाई ऑक्साइड के उत्सर्जन में 3.7 टन की कमी आ सकती है।

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