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26/11 मुम्बई हमला: जांच के दायरे में ‘अल-फौज’ नौका, पाकिस्तान अदालत ने दी इजाजत

नौका अल-फौज कराची में पाकिस्तानी अधिकारियों की हिरासत में है
Author इस्लामाबाद | July 28, 2016 18:46 pm
26/11 मुंबई हमले में 166 लोग मारे गए थे।

पाकिस्तान की एक आतंकवाद निरोधक अदालत के आदेश को पलटते हुए वहां की एक शीर्ष अदालत ने वर्ष 2008 के मुम्बई हमले को अंजाम देने के वास्ते भारत पहुंचने के लिए लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकवादियों द्वारा इस्तेमाल में लायी गयी नौका का परीक्षण करने की इजाजत दे दी है। मुम्बई हमला मामले में अभियोजन प्रमुख चौधरी अजहर ने कहा,‘इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने एक आयोग को मुम्बई हमले के आतंकवादियों द्वारा उपयोग में लायी गयी अल-फौज नौका का निरीक्षण करने के लिए कराची भेजने से इनकार करने के निचली अदालत के फैसले को दरकिनार कर दिया है।’ अजहर ने बताया कि हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को ‘त्रुटिपूर्ण और कानून के असंगत’ बताया तथा कराची के बंदरगाह पर नौका का परीक्षण करने की इजाजत दे दी।’

अभियोजन ने मुम्बई हमले के आतंकवादियों द्वारा प्रयुक्त नौका ‘अल-फौज’ का परीक्षण करने के वास्ते आयोग के गठन की अपनी अर्जी निचली अदालत से खारिज हो जाने को मई में चुनौती थी। अभियोजन ने यह अर्जी इसलिए दी थी कि ताकि इस नौका को ‘मामले का सबूत’ बनाया जा सके। अल-फौज कराची में पाकिस्तानी अधिकारियों की हिरासत में है। यहीं से ही ए के- 47 राइफलों और हथगोलों से लैस 10 आतंकवादी मुम्बई में हमला करने के लिए रवाना हुए थे और इस हमले में 166 लोगों की जान गयी थी। हालांकि इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया कि नौका के परीक्षण के लिए अभियोजन एवं बचाव पक्ष के वकीलों को मिलाकर एक आयोग बनाना जरूरी है या नहीं।

एक अन्य अदालती अधिकारी ने कहा, ‘निचली अदालत अल-फौज के निरीक्षण के लिए अदालती अधिकारियों को भेज सकती है क्योंकि उसे इस काम के लिए आयोग गठन का कोई निर्देश नहीं मिला है।’ इस अधिकारी ने कहा, ‘निचली अदालत सात सितंबर की सुनवाई में नौका के निरीक्षण के वास्ते अधिकारियों को नामित करेगी।’ निचली अदालत ने रावलपिंडी की अडियाला जेल में कल मुम्बई हमले की सुनवाई की थी। यह सूचित किया गया है कि इस मामले में अपना बयान दर्ज कराने के वास्ते भारत के 24 गवाहों को यहां भेजने के बारे में पाकिस्तान को भारत से कोई जवाब नहीं मिला है। अदालत ने सात सितंबर तक के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी। अदालतों में फिलहाल एक माह का अवकाश है तथा केवल अतिमहत्वपूर्ण प्रकृति के मामलों पर ही इस अवकाश के दौरान सुनवाई होगी।

संघीय जांच एजेंसी के मुताबिक हमलावरों ने कराची से मुम्बई पहुंचने के लिए अल-फौज समेत तीन नौकाओं का इस्तेमाल किया था। उसने यह भी बताया कि सुरक्षा एजेंसियों ने एक दुकान और उसके मालिक का पता लगाया है जहां से अपराधियों ने इंजन एवं नौका खरीदे। सुरक्षा एजेंसियों को एक बैंक एवं मुद्रा विनिमय कंपनी का भी पता चला है जिनका इस्तेमाल मुद्रा के विनिमय के लिए किया गया। लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकवादी 23 नवंबर, 2008 को नौका से कराची से रवाना हुए थे। अपने गंतव्य के रास्ते में उन्होंने एक अन्य नौका के चालक दल के चार सदस्यों की हत्या कर उसे (नौका को) अगवा कर लिया। उन्होंने अपहृत नौका के कैप्टन को भारतीय तट पर ले जाने के लिए मजबूर किया। जब यह नौका मुम्बई पहुंची तब उन्होंने कैप्टन को मार डाला।

मुम्बई हमला मामले में बहुत देरी हो रही है क्योंकि कोई भी कार्यवाही व्यावहारिक रूप से तीन महीने से ज्यादा से नहीं हो पायी है। मुम्बई मामले की सुनवाई सप्ताह में एक बार होनी है। मुम्बई हमले के षडयंत्रकर्ता जकीउर रहमान लखवी, अब्दुल वाजिद, मजर इकबाल, हमाद अमीन सादिक, शाहिद जमील रियाज, जमील अहमद और युनूस अंजुम हत्या, हत्या की कोशिश और मुम्बई हमले के लिए उकसाने का आरोप है। लखवी एक साल पहले जेल से रिहा होने के बाद से किसी अज्ञात स्थान पर रह रहा है। अन्य छह संदिग्ध रावलपिंडी की अडियाला जेल में हैं। यह मामला छह साल से भी अधिक समय से चल रहा है।

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