December 11, 2016

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2018 तक लागू हो पेरिस जलवायु समझौता, करीब 200 देशों ने पारित किया एक्शन प्लान

पेरिस समझौते को दिसंबर 2015 में अंतिम रूप दिया गया था और यह एक वर्ष से भी कम समय में लागू हो गया।

Author माराकेश | November 19, 2016 14:32 pm
पेरिस जलवायु समझौता पूर्व औद्योगिक काल के स्तरों की तुलना में ग्लोबल वॉर्मिंग को दो डिग्री सेल्सियस से कम और संभव हो तो डेढ़ डिग्री सेल्सियस पर रखने का आह्वान करता है। (Michel Euler/AP/File)

अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका का नाम वापस लिए जाने की आशंकाओं के बीच भारत समेत करीब 200 देशों ने यहां एक अहम संयुक्त राष्ट्र शिखर सम्मेलन में वर्ष 2018 तक इस ऐतिहासिक समझौते के क्रियान्वयन की कार्य योजना शनिवार (19 नवंबर) को पारित की। दो सप्ताह के विचार विमर्श के बाद माराकेश जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन में इस बात को भी रेखांकित किया गया कि क्योटो प्रोटोकाल में विकसित देशों की प्रतिबद्धताओं के अनुरूप उत्सर्जन कम करने के लिए उनकी ओर से शीघ्र कदम उठाए जाने की तत्काल आवश्यकता है। क्योटो प्रोटोकॉल वर्ष 2020 में समाप्त होगा। माराकेश बैठक में मुख्य रूप से प्रक्रिया संबंधी मामलों पर वार्ता की गई। यह बैठक शुक्रवार (18 नवंबर) को रात निर्धारित समय से अधिक अवधि तक चली और भारत समेत कई देशों ने कुछ मसौदा प्रस्तावों को लेकर कुछ चिंताएं व्यक्त की। इस दौरान किए गए फैसले ने पेरिस समझौते के शीघ्र क्रियान्वयन का मंच तैयार कर दिया है। पेरिस समझौते को पिछले साल दिसंबर में अंतिम रूप दिया गया था और यह एक वर्ष से भी कम समय में लागू हो गया।

अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ट्रंप के प्रशासन के तहत अमेरिका के नाम वापस लिए जाने की आशंका संबंधी रिपोर्टों का मामला इस सम्मेलन में छाया रहा। सम्मेलन के अध्यक्ष सलाहेद्दीन मेजौआर ने एक दस्तावेज पारित किया जिसमें सभी पक्षों ने ‘प्रगति की समीक्षा’ के लिए 2017 में दोबारा बैठक करने पर सहमति जताई है। इस सम्मेलन के दौरान शुक्रवार को सदस्य देशों से जलवायु परिवर्तन से ‘तत्काल प्राथमिकता’ के आधार पर निपटने की अपील की गई और यह बात रेखांकित की गई कि जलवायु ‘खतरनाक तरीके से और बेतहाशा’ दर से गर्म हो रही है। यूएनएफसीसीसी ने एक बयान में कहा, ‘इस बीच सरकारों ने आने वाले वर्षों एवं दशकों में भरोसा, सहयोग और पेरिस समझौते की सफलता सुनिश्चित करने के मकसद से इस समझौते के संचालन के लिए नियम पुस्तिका पूरी करने की खातिर 2018 तक की समय सीमा तय की।’

मैजौआर ने कहा कि मोरोक्को इस सीओपी को सफल बनाने के लिए पूरी तरह जुटा हुआ है और अध्यक्ष के रूप में अपनी भूमिका को उत्साहपूर्वक निभाएगा। उन्होंने कहा कि अंतिम 15 दिनों के परिणाम में हमारा नजरिया समेकित हुआ है और हम ठोस प्रगति करने और सफल कार्रवाई के लिए अब से 2017 के अंत तक काम करेंगे। मेजौआर ने कहा, ‘अब से लेकर वर्ष 2020 तक 100 अरब डॉलर की प्रतिबद्धता का सम्मान करना आवश्यक होगा। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए जिस स्तर पर कार्य किए जाने की आवश्यकता है, उसके अनुसार अरबों को खरबों में बदलना अत्यावश्यक है।’ उन्होंने कहा, ‘वर्ष 2017 बड़ी परियोजनाओं का वर्ष होना चाहिए जिसमें धन का प्रबंध किया जाए और वित्तीय सुविधाओं तक पहुंच बनाई जाए जो कि अनुकूलन के लिए आवश्यक होंगी।’ विश्व संसाधन संस्थान में जलवायु कार्यक्रम के वैश्विक निदेशक पाउला काबाल्लेरो ने कहा, ‘माराकेश जलवायु वार्ताओं ने अंतरराष्ट्रीय जलवायु कार्रवाई के प्रति विश्व की मजबूत प्रतिबद्धता की दृढ़ता से पुष्टि की। माराकेश में प्रतिनिधियों ने सीओपी22 से मात्र कुछ दिन पहले लागू हुए पेरिस समझौते के समर्थन की नींव के निर्माण में अहम प्रगति की है।’

इस बीच भारतीय जलवायु विशेषज्ञों ने कहा कि यह सम्मेलन कृषि, वित्त, अनुकूलन एवं 2020 से पहले के कदमों समेत अहम एजेंडो के तहत कोई महत्वपूर्ण सफलता हासिल किए बिना समाप्त हो गया। उन्होंने कहा कि सीओपी 22 का नाम ‘सीओपी ऑफ एक्शन‘ रखा गया था लेकिन मुख्य रूप से अमेरिका के चुनाव परिणाम के कारण यह ‘सीओपी ऑफ डिस्ट्रैक्शन’ बन गया। सीएसई के उप महानिदेशक चंद्र भूषण ने कहा, ‘पेरिस जलवायु समझौता प्रत्याशित समय से बहुत पहले यानी चार नवंबर को ही लागू हो गया इसलिए सदस्य देश इस बैठक के लिए तैयार नहीं थे। इसी वजह से पेरिस समझौते को लागू करने के तौर तरीकों, प्रक्रियाओं एवं दिशानिर्देशों (एमपीजी) के संबंध में खास प्रगति नहीं हुई। इसके बजाए आगामी जलवायु वार्ता पर विचार विमर्श हुआ।’ उन्होंने कहा कि जहां तक भारत की बात है तो उसकी कृषि, अनुकूलन और हानि एवं क्षति समेत यहां के गरीबों के प्रभावित होने जैसे मामलों के संबंध में कोई स्पष्ट स्थिति नहीं है। इसके बजाए पारदर्शिता के ढांचे, बाजार तंत्रों, स्थायी जीवनशैली और पर्यावरणीय न्याय जैसे प्रक्रिया संबंधी मामलों पर ध्यान केंद्रित किया गया।

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First Published on November 19, 2016 2:32 pm

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