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संपादकीय
साझेदारी और संशय

जनसत्ता 22 मई, 2013: चीन के प्रधानमंत्री ली केचियांग के तीन दिन के भारत दौरे में दोनों देशों की प्राथमिकताएं अलग-अलग थीं।

 

घपले के स्मारक

जनसत्ता 22 मई, 2013: उत्तर प्रदेश में मायावती के शासनकाल के दौरान जब दलित स्मारकों के निर्माण में घोटालों के आरोप लगे थे तब तत्कालीन सत्ताधारी पार्टी की ओर से इसे विरोधियों की साजिश और पूर्वग्रह कह कर नकार दिया गया था।

 
ली के साथ

ली के साथ

जनसत्ता 21 मई, 2013: मार्च में चीन के प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद ली क्विंग ने अपनी विदेश यात्रा के लिए सबसे पहले भारत को चुना।

 

सट्टे पर शिकंजा

जनसत्ता 21 मई, 2013: क्रिकेट में पैसे की भूमिका लगातार बढ़ती गई है। यह कहा जाता रहा है कि किसी भी बेहद लोकप्रिय खेल की यह अनिवार्य परिणति है।

 
देर से सुध

देर से सुध

जनसत्ता 20 मई, 2013: भारत की श्रम-शक्ति में असंगठित क्षेत्र में लगे लोगों का हिस्सा नब्बे फीसद से भी अधिक है। जाहिर है, हमारी अर्थव्यवस्था की गाड़ी उनकी मेहनत के बगैर नहीं चल सकती।

 

कक्षा में क्रूरता

जनसत्ता 20 मई, 2013: सभी अभिभावक अपने बच्चों को बेहतर इंसान बनाने और उनका भविष्य संवारने के मकसद से स्कूल भेजते हैं। लेकिन ऐसे अनेक मामले सामने आते रहे हैं जिनमें बेहद मामूली बात पर या बाल-सुलभ हरकत पर स्कूल में शिक्षक के

 
अभिव्यक्ति के सामने

अभिव्यक्ति के सामने

जनसत्ता 18 मई, 2013: साल भर के भीतर यह चौथी घटना है जिसमें किसी मसले पर अपनी राय जाहिर करने के लिए इंटरनेट या सोशल मीडिया का सहारा लेने वाले व्यक्ति को गिरफ्तारी का सामना करना पड़ा।

 

पैसे की पिच

जनसत्ता 18 मई, 2013: क्रिकेट में फिक्सिंग का खेल नया नहीं है। कई अंतरराष्ट्रीय मैच इसकी वजह से संदेह के घेरे में आ चुके हैं और अनेक खिलाड़ियों पर इसका दाग लग चुका है।

 
चीन का साथ

चीन का साथ

जनसत्ता 17 मई, 2013: चीन के प्रधानमंत्री ली क्विंग की भारतीय युवा प्रतिनिधियों से बातचीत उत्साहजनक कही जा सकती है। ली क्विंग दो दिन बाद भारत की यात्रा पर आने वाले हैं।

 

खेल और खामी

जनसत्ता 17 मई, 2013: करीब पांच महीने पहले जब आइओसी यानी अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने ओलंपिक प्रतियोगिताओं से भारत को निलंबित कर दिया था तो यह अफसोसजनक जरूर था, लेकिन भारत में खेल संगठनों पर जिस तरह के लोग लंबे समय से

 
असग़र अली इंजीनियर

असग़र अली इंजीनियर

जनसत्ता 16 मई, 2013: कुछ लोग अपनी जिंदगी के मकसद को ऐसी चमक दे जाते हैं जो उनकी गैर-मौजूदगी में भी बनी रहती है। असग़र अली इंजीनियर का नाम उन्हीं चंद लोगों में शुमार किया जा सकता है।

 
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आप की राय

क्या आपको लगता है कि स्पॉट फिक्सिंग मामले में दोषी खिलाड़ियों पर आजीवन प्रतिबंध लगा देना चाहिए?