मुखपृष्ठ समांतर
समांतर

वाणभट्ट
जनसत्ता 18 मई, 2013: आज देश में प्रगति का माहौल है। उद्यमिता और उद्योग के इस युग में जो पीछे रह गया, वह बहुत पीछे रह जाएगा। उद्योग का सीधा तात्पर्य है मुनाफा, लागत निकालने के बाद।

 

बैसवाड़े की विरासत

आराधना चतुर्वेदी ‘मुक्ति’
जनसत्ता 17 मई, 2013: हाल ही में ‘बैसवाड़ा की शान’ कहे जाने वाले लोकप्रिय आल्हा गायक लल्लू वाजपेयी के निधन की खबर सुनी तो मन थोड़ा उदास हो गया। शायद पूरे भारत के लोग लल्लू वाजपेयी को न जानते

 

विचार का वाष्पीकरण

शचीन्द्र आर्य
जनसत्ता 16 मई, 2013: मौसम ज्यों-ज्यों गरम होगा, देह से कपड़े और छिटकते जाएंगे। अपने आप। उनका न्यूनतम अवस्था में पहुंच जाना ही ध्येय है।

 

मजबूरी के हाथ

कविता रावत
जनसत्ता 15 मई, 2013: यों रविवार छुट्टी और आराम का दिन होता है। लेकिन अगर पूछा जाए तो मेरे लिए यह सबसे ज्यादा थकाऊ और पकाऊ दिन होता है।

 

अपनी तलाश

ऋचा
जनसत्ता 14 मई, 2013: ‘तुम्हारा हंसमुख चेहरा समूचे दिन को सुखमय बनाता है...।’ आज पलट कर बीते सालों पर नजर डालती हूं तो यकीन नहीं होता।

 

शुभ का कारोबार

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
जनसत्ता 13 मई, 2013: पता नहीं यह इलेक्ट्रॉनिक टीवी चैनलों में बढ़ते ज्योतिष संबंधी कार्यक्रमों का कुप्रभाव है या फिर सामाजिक विकृतियों का असर कि दिनोंदिन समाज में अंधविश्वास की नई-नई घटनाएं

 

मां न होती तो

अनु सिंह चौधरी
जनसत्ता 11 मई, 2013: तेरह या चौदह साल की थी जब अंग्रेजी के टीचर ने एक लेख लिखने को दिया- ‘बड़ी होकर मैं क्या बनना चाहूंगी?’ मैंने बड़े मन से साढ़े तीन-चार सौ शब्दों में लिखा था- ‘मैं मां बनना चाहूंगी।’

 

कृपया घंटी बजाएं

प्रवीण पांडेय
जनसत्ता 10 मई, 2013: उत्साही ब्लॉगरों की एक संस्था है ‘इंडीब्लॉगर’, जो ब्लॉग लेखन को न केवल विचारों को परिष्कृत करने का साधन मानती है, बल्कि उसे सामाजिक कार्यों को प्रचारित-प्रसारित करने का सशक्त

 

उत्पीड़न के विरुद्ध

अभिनव श्रीवास्तव
जनसत्ता 9 मई, 2013: हाल ही में दुनिया भर में श्रमिकों के अधिकार और उनके संघर्षों की विरासत को याद करते हुए मई दिवस मनाया गया।

 

बदलाव का सिरा

शाहनवाज़ सिद्दीकी
जनसत्ता 8 मई, 2013: पिछले तीन-चार महीनों में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में जिस गति से बढ़ोतरी दर्ज की गई है, उससे हैरानी होती है कि यह इसके बावजूद हो रहा है कि बलात्कार की कुछ घटनाओं को लेकर समूचा

 

संघर्ष के सुर

संदीप नायक
जनसत्ता 7 मई, 2013: हाल ही में जब शमशाद बेगम का इंतिकाल हुआ तो बहुत कुछ पढ़ा उनके बारे में। मैंने इस बीच गायिकाओं के बारे में थोड़ा टटोला तो पाया कि हमारे यहां महान गायिकाएं हुई हैं, फिल्मी दुनिया से लेकर

 
«StartPrev12345678910NextEnd»

 

आप की राय

क्या आपको लगता है कि स्पॉट फिक्सिंग के खुलासे के बाद आईपीएल को बंद कर देना चाहिए?