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नीतीश ने हेकड़ी से मांगा सूबे के लिए विशेष दर्जा PDF Print E-mail
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Sunday, 17 March 2013 11:47

प्रियरंजन
नई दिल्ली । बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को हेकड़ी के साथ अपने सूबे के लिए केंद्र से विशेष राज्य का दर्जा मांगा। दीन हीन या याचक बनने के बजाय उन्होंने इसे अपना अधिकार बताते हुए केंद्र की मनमोहन सरकार को चेतावनी भी दे दी। राजधानी के रामलीला मैदान में जद (एकी) की अधिकार रैली में नीतीश ने दिल्ली की सरकार को ललकारते हुए कहा- जो पिछड़े राज्यों के लिए सोचेंगे, वे ही 2014 के चुनाव के बाद केंद्र में शासन करेंगे। विशेष दर्जे के मुद्दे पर अपना लहजा कड़ा करते हुए नीतीश बोले- या तो अभी दे दें नहीं तो 2014 के बाद तो यह दर्जा देना ही पड़ेगा। अधिकार रैली में आए लोगों ने नीतीश के आह्वान पर बिहार को विशेष दर्जा दिए जाने की मांग वाला प्रस्ताव ध्वनि मत से पारित कर दिया।
नीतीश ने कहा  कि वे न तो भीख मांग रहे हैं और न ही कर्ज। वे तो विशेष राज्य का दर्जा मांग रहे हैं। रैली में पारित संकल्प में भी केंद्र से बेबाकी के साथ आग्रह किया गया है- बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने के लिए हम समयबद्ध कार्रवाई चाहते हैं। रैली को पहले पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने संबोधित किया।  उन्होंने साफ किया कि इस रैली के औचित्य पर केवल नीतीश कुमार ही बोलेंगे। नीतीश ने रैली को ‘अधिकार रैली’ नाम देने की विस्तार से व्याख्या की। 
बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा कि देश बिहार के गौरवशाली इतिहास का गवाह है। फिर उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कारण है कि आजादी के बाद यह राज्य पिछड़ता गया? लोग शिक्षा और रोजगार के लिए बिहार से बाहर जाने को मजबूर हुए। बिहार के विभाजन के बाद उसके पास न तो खनिज संपदा रही और न ही उद्योग-धंधे बचे। बिहार ‘लैंड लॉक्ड’ (बगैर बंदरगाह व समुद्री सीमा वाला) राज्य है। पूरी दुनिया में ‘लैंड लॉक्ड’ राज्यों के साथ विशेष बर्ताव होता है तो हमारे देश में क्यों नहीं? उन्होंने कहा कि हमने बिहार को विशेष दर्जा देने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री और योजना आयोग तक हर जगह गुहार लगाई। सभी से मिले और सबके दरवाजे पर गए। अधिकार नहीं मिला तभी सड़क  पर आए हैं।
उन्होंने विशेष राज्य का दर्जा देने के केंद्र सरकार के मापदंड को बदलने पर जोर दिया। उन्होंने साफ कहा कि इस मापदंड को जल्द बदला जाए। उन्होंने इसकी जगह  ‘पिछड़ेपन’ मसलन प्रति व्यक्ति आय, प्रति व्यक्ति व्यय, प्रति व्यक्ति बिजली की खपत, प्रति व्यक्ति सड़क, प्रति व्यक्ति रेल लाइन, मानव विकास आदि को मापदंडों में शामिल करने का भी सुझाव दे दिया। पिछड़े राज्यों को लामबंद करने की मंशा से नीतीश बोले कि इसका लाभ सिर्फ बिहार को नहीं बल्कि बिहार जैसे अन्य पिछड़े राज्यों को भी होगा। यह सही मायने में देश के समावेशी विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा। फिर ऐसा नहीं होगा कि कुछ का विकास तो हो जाए और कुछ पिछड़े रह जाएं। सनद रहे कि विशेष दर्जा प्राप्त राज्यों में देश के ग्यारह पर्वतीय राज्य ही शमिल हैं। इन राज्यों को उनके आर्थिक व औद्योगिक विकास के लिए विभिन्न करों या शुल्कों में केंद्र से खास रियायतें मिलती हैं।
विशेष दर्जे की मांग पर जनता से एकजुट होकर आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए नीतीश ने कहा कि दिल्ली की गद्दी पर वही बैठेगा जिसके मन में पिछड़ेपन और पिछड़े राज्यों के प्रति दर्द होगा, हमदर्दी


होगी। एक मंजे राजनीतिज्ञ की तरह नीतीश ने कहा- हमें दाएं-बाएं नहीं देखना है। हमें सीधे देखना है। दिल्ली की सरकार ऐसी होनी चाहिए जो हमारे साथ न्याय करे। रामलीला मैदान में जुटी भीड़ की ओर इशारा करते हुए नीतीश ने कहा कि यह तो झांकी है। अभी तो पूरी लड़ाई बाकी है।
उन्होंने कहा- हम तब तक चैन से नहीं बैठेंगे, जब तक बिहार को विशेष दर्जा नहीं मिल जाता। केंद्र की ओर से बिहार की लंबे समय से उपेक्षा का आरोप लगाते हुए नीतीश ने सवाल किया कि क्या 21वीं सदी सिर्फ महानगरों में रहने वाले लोगों के लिए होगी या समस्त भारतवासियों के लिए होगी। फिर खुद ही समाधान पेश करते हुए बोले कि अगर नीतियों में बदलाव होगा तो 21वीं सदी सभी के लिए होगी। नीतीश ने 22 मिनट के अपने भाषण में कहा कि पहली बार दिल्ली में इतनी बड़ी तादाद में बिहारियों ने अपने हक को हासिल करने के लिए अपनी ताकत दिखाई है।
बिहार के मुख्यमंत्री का कहना था कि हाल में पेश आर्थिक सर्वेक्षण और बजट भाषण में पिछड़े राज्य का दर्जा दिए जाने के मानदंडों में बदलाव लाने पर विचार करने का संकेत दिया गया है। अब यह सरकार पर है कि वह इस पर कितना कायम रहती है। वैसे भी बिहार के लोग कोई भीख नहीं मांग रहे हैं। हम अपना हक मांग रहे हैं। क्या बिहार को विकास का हक नहीं मिलना चाहिए? उन्होंने भारत और इंडिया के रूप में विभाजित देश को अस्वीकार करते हुए कहा कि हमें इंडिया और भारत का विभाजन मंजूर नहीं। हम एक जैसा हिंदुस्तान चाहते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री हमेशा समावेशी विकास की बात करते हैं। लेकिन इसके लिए सभी क्षेत्रों का विकास होना चाहिए। ऐसा नहीं हो सकता कि कुछ का विकास हो जाए और कुछ  पिछड़े रह जाएं।
नीतीश ने कहा कि दिल्ली में बैठे लोगों को बिहारियों की ताकत को पहचानना चाहिए। बिहार के विकास की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपने सीमित संसाधनों से आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है। अगर केंद्र इस समय उसे विशेष दर्जा देता है तो   बिहार विकसित सूबों में शामिल हो सकता है। उन्होंने शिकायती लहजे में कहा कि विशेष राज्य की उनकी मांग को तकनीकी आधार पर खारिज किया जाता है। कहा जाता है कि बिहार को अगर दर्जा देंगे तो दूसरों को भी देना होगा।
इससे पहले बिहार के पिछड़ेपन के लिए एक तरह से केंद्र की नीतियों को जिम्मेदार ठहराते हुए शरद यादव ने पूछा कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में बिहार के लोग दिल्ली और दूसरे राज्यों में रोजगार के लिए रहने को क्यों मजबूर हुए। एक जमाना था कि सत्ता बिहार से चलती थी लेकिन बिहार लगातार पिछड़ता गया। आखिर बिहार के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए विशेष रूप से क्यों नहीं सोचा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिहार फिर धुरी बनेगा।
रैली में जद (एकी) की ओर से एक संकल्प पारित किया गया। इसमें कहा गया है- हम आज संकल्प लेते हैं कि विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त कर बिहार की जनता के बेहतर जीवन स्तर और रोजगार के अवसर सुनिश्चित करने के लिए विकास के अधिकार की इस लड़ाई को जीत कर ही दम लेंगे। रैली को पार्टी की बिहार इकाई के अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने भी संबोधित किया। जद (एकी) के कई सांसद, बिहार सरकार के कई मंत्री, विधायक और दूसरे वरिष्ठ नेता भी मंच पर मौजूद थे।

Last Updated on Monday, 18 March 2013 09:30
 
 

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