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अदालत में हिंदी और अन्य भाषाओं में बहस की मांग पर सत्याग्रह जारी PDF Print E-mail
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Thursday, 28 February 2013 09:20

जनसत्ता संवाददाता, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट की कार्यवाही राष्ट्र भाषा हिंदी समेत भारतीय भाषाओं में करवाने के लिए न्याय और विकास अभियान के संयोजक श्याम रुद्र पाठक का सत्याग्रह यूपीए और कांग्रेस अध्यक्ष के निवास पर बुधवार को भी जारी रहा। आईआईटी की प्रवेश परीक्षा से अंग्रेजी की अनिवार्यता समाप्त करवाने से लेकर अनेक आंदोलन चलाने वाले पाठक इस सत्याग्रह के दौरान ज्यादा समय तक पुलिस की गिरफ्त में ही रहे। कांग्रेस महासचिव आस्कर फर्नांडिस ने उन्हें तब के कानून मंत्री सलमान खुर्शीद से आश्वासन भी दिलवाया। आस्कर के पत्र से पाठक संतुष्ट हुए। लेकिन इस विषय पर कोई ठोस घोषणा न होने पर वे चार दिसंबर से सत्याग्रह कर रहे हैं।
श्याम रुद्र पाठक का कहना है कि संविधान की मूल भावनाओं का उल्लंघन करके आजादी के 65 साल बाद भी न्याय पाने के लिए लोगों को जबरन अंग्रेजी का सहारा लेना पड़ता है। केवल उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार के हाई कोर्टों में हिंदी के वैकल्पिक प्रयोग की इजाजत दी गई है। छत्तीसगढ़ ने 2002 में हिंदी में, 2010 में तमिलनाडू ने तमिल में और 2012 में गुजरात ने गुजराती में विकल्प की मांग केंद्र सरकार से की लेकिन उसे ठुकरा दिया गया। पाठक ने सुप्रीम कोर्ट और देश के  सभी हाई कोर्ट में अंग्रेजी के साथ-साथ एक भारतीय भाषा को कार्यवाही का माध्यम बनाने की मांग की। किसी नागरिक का यह अधिकार है कि अपने मुकदमें के बारे में वह अदालत में बोल सके। चाहे वह वकील रखे या न रखे। अंग्रेजी की अनिवार्यता से 97 फीसद जनता का यह अधिकार छीन लिया गया है। उसे मजबूरन अंग्रेजी जानने वाले वकील रखना पड़ता है। जबकि अपना मुकदमा


बिना वकील रखे लड़ने का हर नागरिक का अधिकार है।
अंग्रेजी की अनिवार्यता के चलते इन अदालतों में महज तीन फीसद लोगों का कब्जा है। इससे संविधान में मिले आम आदमी के अधिकारों का उल्लंघन होता है और सबको समान न्याय नहीं मिल पाता है। पाठक ने सोनिया गांधी को लिखे अपने पत्र में संविधान की विभिन्न धाराओं का जिक्र करते हुए सबके लिए न्याय पाने का समान अवसर दिलवाने के लिए बड़ी अदालतों से अंग्रेजी की अनिवार्यता समाप्त करवाने की मांग की। उन्होंने इस अभियान की शुरुआत मार्च 2012 से की। इस संबंधित भारत सरकार और विभिन्न राजनीतिक दल के नेताओं को पत्र लिखा। 11 सितंबर से सोनिया गांधी के निवास पर सत्याग्रह करने की सूचना दी तो हफ्ते भर का समय मांगा गया। फिर आश्वासन मिलने, सत्याग्रह शुरू करने पर जबरन उठा कर थाने में बंद करने का जो सिलसिला शुरू हुआ वह अभी तक जारी है।
सोनिया गांधी के हस्तक्षेप पर आस्कर फर्नांडिस के आश्वासन से लगा कि मसला सुलझ जाएगा। उन्होंने 23 सितंबर 2012 से लेकर 30 अक्तूबर 2012 के बीच उन्हें पांच बार मिलने के लिए बुलाया। तब के कानून मंत्री सलमान खुर्शीद को पत्र लिखा। इस विषय पर यूपीए अध्यक्ष को 29 अक्तूबर को रिपोर्ट दी। लेकिन इस पर आगे कोई कारवाई नहीं हुई। कई बार फिर पत्र लिखने के बाद चार दिसंबर से न्याय व विकास अभियान के संयोजक पाठक यूपीए अध्यक्ष के सकारी निवास पर सत्याग्रह कर रहे हैं। पुलिस उन्हें और उनके समर्थकों को वहां चैन से बैठने नहीं दे रही है। वे इस मुद्दे पर संसद के इस सत्र में संविधान संशोधन विधेयक लाए जाने की मांग के समर्थन में अपना सत्याग्रह जारी रखे हुए हैं।

 
 

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