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Thursday, 28 February 2013 09:19 |
नोएडा। जनसत्ता। आसमान छूती इमारतों के शहर नोएडा और ग्रेटर नोएडा में यदि आप राह चलते पानी का प्याऊ तलाश रहे हैं तो बड़ी भूल कर रहे हैं।
कंक्रीट के इस जंगल में कुछ मंदिर व सेक्टरों को छोड़ दें तो पानी की टोंटी ढूढ़ने से भी नहीं मिलेगी। सबसे अमीर प्राधिकरण वाले इन शहरों में आम आदमी के बारे में कभी कुछ सोचा ही नहीं गया। आप नोएडा या ग्रेटर नोएडा की सड़कों से गुजर रहे हैं तो पंद्रह से सत्रह रुपए का बोतल बंद पानी या फिर ठेली पर एक रुपए गिलास पानी खरीदकर पीने के अलावा आपके पास कोई विकल्प नहीं होगा। इसमें भी शुद्धता की कोई गारंटी नहीं है। कच्ची बर्फ मिलाकर ठेली पर बिकने वाले पानी से प्यास बुझाने को मजबूर लोग यहां से बीमारियां लेकर लौटते हैं। ऐसे पानी की आज तक जांच करने की भी जरुरत नहीं समझी गई। नोएडा और ग्रेटर नोएडा समेत यमुना प्राधिकरण लोगों को सुविधा देने की बात तो करते रहे हैं पर आज तक पानी की टोटी लगाने की जरुरत नहीं समझी है जिससे राहगीर पैदल चलते दो घूंट पानी पी सके। नोएडा में सेक्टर -61, 40 और 19 के साईं मंदिर, सनातन धर्म मंदिर, उद्योग मार्ग सेक्टर दो पर स्थित लाल मंदिर समेत अन्य मंदिर और दो या तीन सेक्टरों के गेट को छोड़ पूरे शहर में कहीं कोई प्याऊ की व्यवस्था नहीं है। औद्योगिक शहर होने के बाद भी औद्योगिक सेक्टरों में कहीं प्याऊ की कोई व्यवस्था नहीं है। जिला अस्पताल जैसी जगह पर भी यह सुविधा नहीं है। यहां तक कि सेक्टर-बीस के नोएडा प्राधिकरण दफ्तर में भी पेयजल का कोई इंतजाम नहीं है। यही हालत सेक्टर 5, 19 और 37 के दफ्तरों में भी है। सेक्टर छह के प्राधिकरण परिसर में पेयजल की व्यवस्था तो है लेकिन आम आदमी का प्रवेश प्रतिबंधित
है। यही हालत ग्रेटर नोएडा का है। विदेश की तर्ज पर विकसित किए जाने वाले शहर का दंभ भरने वाले शहर की सड़कों और बस स्टैंडों पर एक भी प्याऊ नहीं है। यहां तो नहाने धोने तक के लिए पानी मयस्सर नहीं हो पाता है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मास्टर प्लान में बस शेल्टरों व सार्वजनिक स्थानों पर प्याऊ बनाने की योजना है। जिसे चिन्हित करने का काम 2009 से चल रहा है। इसे राष्ट्रमंडल खेलों के पहले पूरा करना था लेकिन स्थिति आज भी वैसी ही है। आसपास के गांव के लोग अपनी रोजमर्रा की जरुरत का सामान लेने व अन्य काम से नोएडा और ग्रेटर नोएडा के विभिन्न स्थानों पर जाते हैं। इनके लिए प्याऊ बहुत बड़ी जरुरत है। लेकिन सुविधाएं देने की बात करने वाले प्राधिकरण ने मनुष्य के लिए सबसे अहम जरुरत पेयजल की व्यवस्था को आज तक दुरुस्त नहीं किया है। अगर शहर में सरकारी व गैर सरकारी इलेक्ट्रॉनिक वाटर कूलर की बात करे तो और दिलचस्प नजारा सामने आता है। सूरजपुर स्थित कलेक्ट्रेट व प्राधिकरण के आफिस में तो वाटर कूलर लगे हैं। जिससे कि आम लोगों का कोई मतलब नहीं है। इसके अलावा परी चौक से जेवर, दनकौर और रबूपुरा तक जाने वाले लोगों को कही भी यमुना प्राधिकरण ने पीने के पानी के लिए प्याऊ का इंतजाम नहीं किया है। यही हालत नोएडा और ग्रेटर नोएडा शहर में है। यहां पर तो हर हालत में आपको अगर प्यास लगती है तो रुपए खर्च करना ही पड़ेगा। किसी भी आबादी को बसाने से पहले वहां पर पानी का इंतजाम किया जाता है पर यहां तो सबकुछ राम के नाम पर चल रहा है। कुछ सेक्टरों के आरडब्लूए ने प्याऊ के नाम पर एक या दो जगह पर पीने के पानी का इंतजाम कर रखा है। बाकी तीनों शहर बिना प्याऊ के हैं।
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