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Thursday, 28 February 2013 09:08 |
जनसत्ता ब्यूरो, जयपुर। राजस्थान विधानसभा में मंत्रियों के अटपटे जवाबों से सरकार की किरकिरी हो रही है। मंत्रियों के तैयारी से नहीं आने और सदन में नहीं बैठने से प्रतिपक्ष के तेवर आक्रामक हो गए हैं।
विधानसभा में मंत्रियों की कार्यशैली से कई मौकों पर प्रतिपक्ष आसानी से सरकार की घेराबंदी करने में सफल हो रहा है। राज्य विधानसभा के यहां चल रहे बजट सत्र में राज्यपाल की अभिभाषण की बहस के दौरान सदस्यों की कम मौजूदगी कांग्रेस के साथ ही भाजपा के लिए चिंता बन गई है। सत्ताधारी कांग्रेस ने तो अपने सदस्यों को बहस के दौरान मौजूद रहने के लिए पाबंद तक कर दिया है। सरकारी मुख्य सचेतक रघु शर्मा ने विधायकों और मंत्रियों को विप जारी कर सदन में मौजूद रहने की हिदायत तक दी है। इसी तरह प्रतिपक्ष भाजपा ने भी सदस्यों को विधानसभा की कार्यवाही के दौरान सदन में रहने को कहा है। विधानसभा में बुधवार को तीन मंत्रियों ने तो सरकार को उलझन में डाल दिया। प्रश्नकाल के दौरान भाजपा सदस्यों के सवालों के सीधे जवाब के बजाए मंत्री असल मुद्दे से ही भटक गए। आबकारी मंत्री राजेंद्र पारीक के जवाब के दौरान तो प्रतिपक्ष ने खासा हंगामा कर दिया। इससे विधानसभा की कार्यवाही को आधे घंटे के लिए भी रोकना पड़ा। राज्य में इस साल विधानसभा चुनाव होने के कारण विधायकों के लिए मौजूदा बजट सत्र अंतिम है। इस कारण प्रतिपक्ष के विधायक ज्यादा से ज्यादा सवाल पूछकर सरकार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश में लगे हैं। शराब के ठेकेदारों पर सरकार की बकाया राशि से जुडेÞ सवाल पर तो बुधवार को आबकारी मंत्री राजेंद्र पारीक बुरी तरह घिर गए। भाजपा के जसवंत सिंह के सवाल के जवाब में पारीक सही तरीके से जवाब नहीं दे सके। प्रतिपक्ष के सदस्यों का आरोप था
कि एक जैसे दो सवालों का जवाब मंत्री अलग अलग दे रहे है। इस मसले पर प्रतिपक्षी सदस्यों ने मंत्री के खिलाफ सदन में जमकर नारेबाजी की। प्रतिपक्ष के नेता गुलाब चंद कटारिया ने दोनों जवाब सदन की मेज पर रख दिए। इससे हंगामा बढ़ गया तो अध्यक्ष दीपेंद्र सिंह शेखावत ने विधानसभा की कार्यवाही को आधे घंटे के लिए स्थगित कर दिया। हंगामें के बाद विधानसभा की कार्यवाही जब फिर शुरू हुई तो संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने सरकार का बचाव किया। उन्होंने आबकारी से जुड़े सवाल के जवाब पर भ्रम होने का हवाला दिया और अध्यक्ष से अनुरोध किया कि इस मसले पर अलग से आधे घंटे की चर्चा कराई जाए। इससे पूरी स्थिति साफ हो जाएगी। सरकार के इस अनुरोध को अध्यक्ष शेखावत ने मंजूर कर लिया। इसके बाद ही विधानसभा की कार्यवाही चल पाई। इससे पहले सतत शिक्षा से जुड़े एक सवाल पर शिक्षा मंत्री बृजकिशोर शर्मा भी जवाब देने में चूक करते रहे। इस मामले में भी प्रतिपक्ष ने शिक्षा मंत्री की जमकर खिंचाई की। शिक्षा मंत्री सतत शिक्षा के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब सर्व शिक्षा अभियान से जुड़ा जवाब देने लगे तो भाजपा सदस्यों ने उनकी खिंचाई की। विधानसभा में मंत्रियों के अधूरी तैयारी से जवाब देने पर प्रतिपक्ष के नेता गुलाब चंद कटारिया ने गहरी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि सरकार के मंत्री विभाग की पूरी जानकारी ही नहीं रखते हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार के मंत्रियों की अपने विभागों में कोई पकड़ ही नहीं है। दूसरी तरफ वरिष्ठ विधायकों का कहना है कि अंतिम बजट सत्र होने के नाते भी ज्यादातर विधायक अपने चुनाव क्षेत्रों की चिंता में लग गए हैं। इस कारण भी उनकी रूचि अन्य कामों में ज्यादा हो गई है।
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