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Wednesday, 27 February 2013 19:44 |
नयी दिल्ली । हेलीकाप्टर सौदे में रिश्वत मामले की जांच कराने के सरकार के प्रस्ताव को आज राज्यसभा ने मंजूरी दे दी।
अगस्तावेस्टलैंड हेलीकाप्टर सौदे में कथित तौर पर रिश्वत दिये जाने के मामले की संयुक्त संसदीय समिति से जांच कराने के सरकार के प्रस्ताव को आज राज्यसभा ने मंजूरी प्रदान कर दी हालांकि राजग, तृणमूल, अन्ना्रदमुक, वाम दलों ने इसका विरोध करते हुए सदन से वाक आउट किया। संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ ने अगस्तावेस्टलैंड से वीवीआईपी हेलीकाप्टरों की खरीद में कथित तौर पर रिश्वत दिये जाने के आरोपों की जांच संयुक्त संसदीय समिति से कराने का प्रस्ताव किया। उन्होंने कहा कि जेपीसी इस मामले में सीबीआई द्वारा की जा रही जांच की निगरानी करेगी ताकि मामले का सत्य शीघ्र सामने आ सके। विपक्ष के नेता अरूण जेटली ने सरकार के इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि जेपीसी गठित करने से मामले की जांच में और विलंब होगा। उन्होंने कहा कि जेपीसी के पास गिरफ्तारी सहित विभिन्न अधिकारी नहीं होते, इसलिए वह मामले की सच्चाई जल्द सामने ला पायेगी, इसमें संदेह है। अन्ना्रदमुक नेता वी मैत्रेयन ने कहा कि सरकार इस मामले में जब प्राथमिकी भी दर्ज नहीं कर पायी तो वह जेपीसी गठित करने पर क्यों जल्दबाजी दिखा रही है। जेपीसी गठित करने के विरोध में राजग, तृणमूल, अन्ना्रदमुक, वाम दलों ने इसका विरोध करते हुए सदन से वाक आउट किया। इसके बाद सदन ने जेपीसी गठित करने के प्रस्ताव को ध्वनिमत से मंजूरी प्रदान कर दी। इससे पहले इसी मुद्दे पर हुई अल्पकालिक चर्चा का जवाब देते हुए रक्षा मंत्री ए के एंटनी ने कहा कि सरकार मामले को छिपाने का प्रयास नहीं कर रही है। इस मामले में जो कोई भी जिम्मेदार होगा, उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। एंटनी ने इस मामले की पूरी जांच कराने का आश्वासन देते हुए कहा, ‘‘हम इस मुद्दे की तह तक जायेंगे।’’ उन्होंने इस मामले में चाहे कोई भी संलिप्त हो, उसके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी। उन्होंने कहा कि उनके मंत्रालय में जब भी इस तरह का कोई विवाद उठता है तो वह शर्मिन्दगी महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच के संदर्भ में सीबीआई से रिपोर्ट मिलने के बाद हम फिनेमेक्केनिका के साथ हुए इंटेग्रिटी संधि के तहत कठोरतम कदम उठायेंगे। उन्होंने कहा कि कंपनी को सरकार ने जो कारण बताओ नोटिस जारी किया था, उसका जो जवाब दिया गया, उस पर हमें कोई भरोसा नहीं है। एंटनी ने कहा कि रक्षा मंत्रालय के पास जो भी शिकायत आती है, उसकी प्राथमिक जांच की जाती है। इस जांच के नतीजों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाती है। रक्षा मंत्री ने कहा कि उनके कार्यकाल में छह शक्तिशाली कंपनियों को काली सूची में डाला गया है। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रालय के कदमों के कारण ही अभिषेक वर्मा पर कार्रवाई की गयी। उन्होंने कहा कि सीबीआई ने इस मामले में प्राथमिक जांच शुरू कर दी है। साथ ही इटली में भी गोपनीय जांच चल रही है।
जांच पूरा होने के बाद ही इटली हमारे साथ सूचनाएं साझा करेगा। इसके आधार पर हम कड़ी कार्रवाई कर सकेंगे। एंटनी ने साथ ही यह भी कहा कि इस सौदे का जो भी हश्र हो लेकिन सेना के आधुनिकीकरण के प्रयासों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। एंटनी ने कहा कि इस मामले में उन्हें अपनी सरकार और पार्टी का पूरा समर्थन प्राप्त है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन का भी उन्हें पूरा समर्थन मिल रहा है। रक्षा मंत्री के जवाब के बाद कमलनाथ ने इस मामले की जेपीसी से जांच कराने का प्रस्ताव करते हुए कहा कि इसमें लोकसभा के 20 और राज्यसभा के 10 सदस्यों को शामिल किया जायेगा। जेपीसी रिश्वत दिये जाने के मुद्दे के साथ साथ बिचौलियों की भूमिका की भी जांच करेगी। उन्होंने कहा कि जेपीसी से तीन माह के भीतर रिपोर्ट देने के लिए कहा जायेगा। जेपीसी गठन का विरोध करने के लिए भाजपा को आड़े हाथ लेते हुए कमलनाथ ने कहा कि 2जी स्पेक्ट्रम मामले की जांच जेपीसी के कराने की मांग पर मुख्य विपक्षी दल ने एक माह तक संसद नहीं चलने दी। आज जब सरकार हेलिकाप्टर मामले की जेपीसी से जांच कराने का प्रस्ताव कर रही है तो वह उसका विरोध कर रही है। विपक्ष के नेता अरूण जेटली ने जेपीसी के गठन का विरोध करते हुए कहा कि जब इस मामले में सरकार ने अपने हाथ खड़े कर लिए हैं तो यह उम्मीद कैसे की जा सकती है कि जेपीसी इस मामले में सत्य का पता लगा लेगी। उन्होंने कहा कि जेपीसी के पास गिरफ्तारी सहित कई अधिकार नहीं होते। जेटली ने कहा कि जेपीसी गठित करने से मामले की जांच में विलंब होगा। इससे दोषियों को इस मामले के सबूत मिटाने का पर्याप्त समय मिल जायेगा। उन्होंने कहा कि मीडिया में यह मामला पिछले एक साल से उठ रहा है। लेकिन सरकार ने कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की। जेटली ने कहा कि इटली ने तो घूस देने वालों को गिरफ्तार कर लिया है लेकिन हमारी सरकार आज तक घूस लेने वालों का पता ही नहीं लगा पायी है। जदयू के शिवानंद तिवारी ने कहा कि यदि सरकार विपक्ष के नेता को जेपीसी का अध्यक्ष बनाती है तो उनकी पार्टी इसके गठन के प्रस्ताव का समर्थन करने को तैयार है। तृणमूल कांगे्रस के डेरेक ओ ब्रायन ने भी जेपीसी के गठन के प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि सरकार इस मामले को ढंकने तथा जांच में विलंब का प्रयास कर रही है। अन्ना्रदमुक के वी मैत्रेयन ने कहा कि सरकार इस समय जेपीसी बनाने में जो शीघ्रता दिखा रही है, उसे मामले की प्राथमिकी दर्ज करने में भी वहीं शीघ्रता दिखानी चाहिए थी। तेदेपा के देवेन््रद गौड़ टी और माकपा के प्रशांत चटर्जी ने भी इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि जेपीसी से जांच में विलंब होगा। मामले की जांच जेपीसी से कराये जाने के प्रस्ताव का सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे सपा और बसपा के सदस्यों ने ध्वनिमत से अनुमति लेते समय अनुमोदन किया। (भाषा)
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Last Updated on Wednesday, 27 February 2013 19:52 |