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राष्ट्रपति का अभिभाषण मजबूरी में पढ़ा गया बयान: मुलायम PDF Print E-mail
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Wednesday, 27 February 2013 17:59

नयी दिल्ली (भाषा)। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के अभिभाषण को मजबूरी में पढ़ा गया बयान करार देते हुए संप्रग सरकार को बाहर से समर्थन देने वाली समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया कि कि मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली केंद सरकार ने किसानों, मुसलमानों, देश की बाह्य एवं आंतरिक सुरक्षा, बेरोजगारी एवं गरीबों की स्थिति को सुधारने की दिशा में पहल नहीं की है। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए मुलायम ने कहा कि मनमोहन सिंह पिछले नौ साल से प्रधानमंत्री है, उन्हें लम्बा समय मिला है लेकिन
किसानों, मुसलमानों, देश की बाह्य एवं आंतरिक सुरक्षा, बेरोजगारी एवं गरीबों की स्थिति को बेहतर बनाने की दिशा में सार्थक पहल नहीं हुई है। लोग खौफ के साये में है, छात्र और युवा परेशान है, किसान बर्बाद हो गया है, महंगाई ने लोगों की कमर तोड़ दी है। लेकिन ऐसा लगता है कि सरकार को इसकी कोई चिंता नहीं है।


/>उन्होंने कहा, ‘‘ प्रधानमंत्रीजी आपको लम्बा समय मिला है, आप अर्थशास्त्री है। ऐसे में देश की सुरक्षा, गरीबों, किसानों, मुसलमानों के लिए कोई चमत्कारिक काम कर जाइयें, ताकि लोग आपको याद रखें।’’
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का अभिभाषण संवैधानिक परंपरा के मुताबिक मजबूरी में पढ़ा गया अभिभाषण है क्योंकि राष्ट्रपतिजी देश की स्थिति से वाकिफ हैं।
मुलायम ने कहा कि पड़ोसी देशों के साथ तब तक हमारे रिश्ते अच्छे नहीं होंगे तब तक सीमा पर सुरक्षा कायम नहीं हो सकती है। इस दृष्टि से भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच महासंघ बनाये जाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा, ‘‘ लेकिन भारत को अगर किसी से खतरा है तब वह चीन से है और चीन पर किसी भी स्थिति में भरोसा नहीं किया जा सकता है। क्या सरकार कह सकती है कि हमारी सीमाएं सुरक्षित है?’’
मुलायम ने सच्चर आयोग और रंगनाथ मिश्रा आयोग की रिपोर्ट को लागू करने की भी मांग की।

 
 

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