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Wednesday, 27 February 2013 14:43 |
नयी दिल्ली। सरकार का किशोर न्याय कानून के तहत आरोपी की आयु सीमा 18 साल से घटा कर 16 साल करने का कोई विचार नहीं है।
महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री कृष्णा तीरथ ने आज राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान कहा कि पूरे देश में बाल अपराध दर दशमलव एक फीसदी है। उन्होंने कहा ‘बच्चे देश का भविष्य होते हैं। जघन्य अपराध करने वाले बच्चों की संख्या नगण्य है और छोटे मोटे अपराध करने पर उन्हें समझाना ज्यादा बेहतर होता है।’ तीरथ ने जयप्रकाश नारायण सिंह के पूरक प्रश्न के उत्तर में कहा ‘बच्चों को बेहतर नागरिक बनाने पर जोर दिया जाना चाहिए।’ सिंह ने 16 दिसंबर की रात चलती बस में हुए सामूहिक बलात्कार की घटना में एक आरोपी के अवयस्क होने के संदर्भ में जानना चाहा था कि क्या सरकार किशोर न्याय कानून के तहत आरोपी की आयु सीमा 18 साल से घटा कर 16 साल करने पर विचार करेगी। तीरथ ने कहा ‘गृह मंत्रालय ने चार जनवरी 2013 को राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों की एक बैठक आयोजित की थी जिसमें किशोरों की आयु घटना का सुझाव दिया गया था। लेकिन सरकार ने यह सुझाव खारिज कर दिया।’ तीरथ ने कहा कि न्यायमूर्ति जे एस वर्मा :सेवानिवृत्त: की अगुवाई में गठित आपराधिक कानून संशोधन समिति ने भी 23 जनवरी 2013 को पेश अपनी सिफारिशों में कानून का उल्लंघन करने वालों बच्चों के लिए किशोर न्याय कानून में आयु सीमा घटाने के सुझाव का समर्थन नहीं किया। इस पर जयप्रकाश नारायण सिंह ने कहा कि उनका तात्पर्य
बलात्कार एवं हत्या जैसे जघन्य अपराधों के आरोपी किशारों के लिए किशोर न्याय कानून में आयु सीमा घटाने से था। सिंह ने यह भी पूछा कि इस मुद्दे पर अन्य सुझावों को शामिल करने में कितना समय लगेगा। इस पर तीरथ ने कहा कि मंत्रालय सुझावों पर विचार कर रहा है। तीरथ ने कहा कि गंभीर अपराध करने वाले किशोरों को अलग किशोर संरक्षण गृहों में तीन साल तक रखा जाता है और बेहतर नागरिक बनने के लिए उन्हें प्रशिक्षण दिया जाता है। ‘हम बच्चों को अपने दिल के करीब रखना चाहते हैं ताकि वह बेहतर नागरिक बनें।’ जदयू के शिवानंद तिवारी ने कहा कि ऐसे कितने बच्चों को सरकार दिल के करीब रखना चाहती है। इस पर तीरथ का जवाब था ‘बाल कल्याण समिति के तहत रखे गए ऐसे बच्चों की संख्या 617 और किशोर न्याय बोर्ड के तहत रखे गए बच्चों की संख्या 607 है। सरकार की एकीकृत बाल सुरक्षा योजना :आईसीपीएस: के तहत 2012..13 में 74,742 बच्चों की मदद की गई।’ कांग्रेस के राम प्रकाश ने पूछा कि क्या किशोर संरक्षण गृहों से निकले बच्चों का वहां से निकलने के बाद कोई आपराधिक रिकॉर्ड रखा गया है। इस पर तीरथ ने कहा ‘इन बच्चों पर 18 साल की उम्र होने तक नजर रखी जाती है और देखा जाता है कि उनका आचरण कैसा है।’ अवतार सिंह करीमपुरी के पूरक प्रश्न के उत्तर में तीरथ ने कहा कि कानून में प्रस्तावित छोटे संशोधनों पर विचार किया जा रहा है और जरूरत के अनुसार विचारविमर्श कर संशोधन किए जाएंगे। इसमें समय लगेगा। (भाषा)
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