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Tuesday, 26 February 2013 18:43 |
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पटना । नीतीश कुमार ने कहा कि रेल बजट में केवल कांग्रेस शासित प्रदेशों को मदद दी गयी है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रेल बजट 2013-14 को आज निराशाजनक करार देते हुए कहा कि इसमें केवल कांग्रेस शासित प्रदेशों को मदद दी गयी है जबकि बिहार की उपेक्षा हुई है। केंद में राजग सरकार के रेल मंत्री रह चुके नीतीश ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘रेल बजट 2013-14 निराशाजनक है। इस बजट में कांग्रेस शासित राज्यों के लिए कई प्रकार की योजनाओं की घोषणा है जबकि बिहार की उपेक्षा की गयी है। ’’ उन्होंने आरोप लगाया कि संप्रग 2 में साहस की कमी है और इसने जनवरी महीने में ही रेल किराये में बढ़ोतरी कर चालाकी की थी। अब यह संसद में कह रही है कि रेल किराये में बढ़ोतरी नहीं की गयी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पवन कुमार बंसल के बजट में कोई विजन नहीं है। यह केवल स्टाप गैप व्यवस्था है। इस बजट के कारण अगले वर्ष लोकसभा चुनाव के बाद सत्ता में आने वाली नयी सरकार के लिए समस्या होगी। इस बजट में बिहार के लिए कोई नयी ट्रेन नहीं दी गयी है, जबकि बड़ी संख्या में बिहार के यात्री ट्रेन से सफर करते हैं। इसके अलावा गंगा नदी पर पटना और मुंगेर में रेल पुलों के लिए राशि की घोषणा नहीं की गयी है, जबकि दोनो पुरानी परियोजनाएं हैं।’’ परोक्ष रूप से राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद पर हमला करते हुए नीतीश ने कहा, ‘‘संप्रग 1 के कार्यकाल से ही रेलवे की हालत बिगड़ती गयी है।’’ लालू संप्रग 1 में रेल मंत्री थे। ट्रेनों में टक्कर निरोधी यंत्र लगाने की घोषणा के लिए नयी तकनीक विकसित करने की घोषणा पर मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘सरकार को बताना चाहिए कि कोंकण रेलवे ने ट्रेनों में टक्कर निरोधी यंत्र लगाने की शुरुआत की थी इसके अच्छे परिणाम आये थे तो रोक क्यों दिया गया। कें्रद सरकार राजस्व अधिशेष बजट का दावा कर रही है लेकिन बताया नहीं गया है किस प्रकार यह राजस्व अधिशेष
है।’’ नीतीश ने कहा, ‘‘रेलवे सार्वजनिक निजी भागीदारी को योजनाओं के लिए बढावा दे रहा है इससे साबित होता है कि वित्तीय हालात ठीक नहीं हैं।’’ उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान शुरू किये गये कारपोरेट सेफ्टी प्लान :2003-13: को समाप्त करने पर भी सवालिया निशान लगाये। उन्होंने कहा कि सरकार बिना राशि और अन्य प्रकार के क्लीयरेंस के बिना केवल नयी योजनाओं की घोषणा कर रही है। बहरहाल उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘रेल बजट में बिहार की घोर उपेक्षा की गयी है। इस बजट के बाद गरीब राज्य अब सपना भी नहीं देख सकते हैं कि उनके राज्य में रेल से जुडा कोई उद्योग लगेगा। क्योंकि कें्रद द्वारा घोषणा की गयी है कि जो भी रेल कारखाने लगेंगे उनमें राज्य को भी अपना राज्यांश देना पड़ेगा। अब राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद और लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामविलास पासवान को कें्रद सरकार को समर्थन देने पर फिर से विचार करना चाहिए। ’’ मोदी ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘रेल बजट के अनुसार अगले 10 वर्ष तक बिहार में कोई नयी रेल परियोजना नहीं आयेगी। यह दुखद है। 88 नयी लाइन बिछाने और 36 दोहरणीकरण सहित कुल 136 योजनाएं हैं। विद्युतीकरण, लाइन परिवर्तन और दोहरीकरण में बिहार के लिए कोई भी योजना नहीं आयेगी। बजट में बिहार के लिए केवल हाजीपुर से रामदयालु रेल लाइन का जिक्र है, जो पुरानी घोषणा है। पूर्व रेल मंत्री रामविलास इसकी घोषणा कर चुके हैं।’’ उन्होंने कहा कि बिहार के लिए जो छह ट्रेन घोषित हैं, उनमें से पांच साप्ताहिक हैं। अधिकांश ट्रेन बिहार के छोटे हिस्से से गुजरती हैं। राज्यों में लगने वाले रेल कारखानों के लिए अधिकांश में राज्य सरकार की हिस्सेदारी को अनिवार्य कर दिया गया है। यहां तक कि फुट ओवर ब्रिज के लिए भी यदि राज्य सरकार पैसा देगी तब बनेगा, नहीं तो नहीं बनेगा। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि किराए के संबंध में भी केन्द्र ने बड़ी चालाकी की है। जनवरी में रेल बजट से पहले ही किराया बढ़ा दिया गया था। (भाषा)
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