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Tuesday, 26 February 2013 09:50 |
तिरुचिरापल्ली। भारत-रूस के संयुक्त उपक्रम ब्रह्मोस एअरोस्पेस ने आवाज की गति से पांच से सात गुना तेज गति वाले ब्रह्मोस के हाइपरसोनिक संस्करण की तकनीक विकसित करने का प्रयास शुरू किया है।
कंपनी के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी शिवाथानु पिल्लै ने बताया कि आवाज की गति से पांच से सात गुना ज्यादा गति वाली मिसाइलों को तैयार करने और डिजाइन करने से पहले कंपनी जरूरी तकनीकों के लिए सिद्धांतविदों से राय ले रही है। उन्होंने कहा कि ये मिसाइल आवाज की गति से 2.8 से 3.5 गुना ज्यादा गति वाले ब्रह्मोस की मौजूदा मिसाइलों का अगले संस्करण होंगी। उन्होंने कहा कि मिसाइल के निर्माण के लिए उच्च तापमान वाली सामग्री के लिए तकनीक विकसित करने के लिए 20 सदस्यों की वैज्ञानिक टीम बंगलूर की भारतीय विज्ञान संस्थान कंपनी के साथ सहयोग करेगी। इस उद्देश्य के साथ आईआईएस में एक अलग केंद्र की
स्थापना की गई है जबकि रूसी समकक्ष मास्को इंस्टीट्यूट आॅफ एविएशन हाइपरसोनिक संस्करण के प्रणोदन और गतिज ऊर्जा के लिए तकनीक तैयार करने का काम करेगी। पिल्लै ने कहा कि इन पहलुओं को पूरा होने में कम से कम पांच साल का समय लगेगा। शीर्ष अधिकारी ने कहा कि इस बीच ब्रह्मोस उत्पादन केंद्र की स्थापना, जरूरी उपकरणों की आपूर्ति के लिए वेंडरों को चुनने और निवेश संरचना के लिए रूपरेखा तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि इन आॅपरेशनों के बाद ब्रह्मोस उन मिसाइलों पर काम करना शुरू करेगा जो लक्षित निशाने को नष्ट करने के बाद वापस लौट पाएंगी। उन्होंने कहा कि हैदराबाद और तिरुवनंतपुरम में उत्पादन केंद्रों को आधुनिक बनाने और विस्तार करने का काम भी एजंडे में है क्योंकि घरेलू बाजार में मांग बढ़ी है। अधिकारी ने बताया कि भारतीय वायुसेना ने भी ब्रह्मोस के लिए आर्डर देना शुरू किया है जबकि सेना और नौसेना नियमित ग्राहक हैं।
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