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Monday, 25 February 2013 18:46 |
नयी दिल्ली। भारत में विकलांग लोगों को यातना और उनके साथ अमानवीय बर्ताव को लेकर एक रिपोर्ट में आज खुलासा किया गया कि घरों, स्कूलों और अस्पतालों में विकलांग लडकियां अकसर बलात्कार का शिकार बनती हैं ।
अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संगठन ईक्वल राइट्स ट्रस्ट और ह्यूमन राइट्स ला नेटवर्क की ओर से किये गये अनुसंधान की यहां जारी रिपोर्ट में कहा गया कि सरकारी और निजी मनो चिकित्सा संस्थानों में मानसिक विकलांगों को चेन से बांधा जाना और उनकी बर्बर पिटाई करना आम बात है । ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि इन संस्थानों की स्वतंत्र रूप से कोई निगरानी नहीं होती और न ही किसी कर्मचारी की कोई जवाबदेही होती है । अनुसंधान से जुडी सीमा बाकर, अंबा सलेलकर, शंपा सेनगुप्ता, रत्नबोली राय और ओलिवर लेविस ने एक प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि यूरोपीय संघ के वित्तपोषण से उन्होंने एक परियोजना हाथ में ली । इसके तहत भारत के 19 राज्यों में 49 जगहों पर रहने वाले
120 से अधिक विकलांगों के इंटरव्यू किये गये । उन्होंने बताया कि इंटरव्यू के दौरान बडे चौंकाने वाले तथ्य सामने आये । उन्होंने माना कि केन््रद और राज्य सरकार के स्तर पर विकलांगों को सुरक्षा प्रदान करने की जबर्दस्त आवश्यकता है । सीमा बाकर का कहना था कि यातना रोकथाम कानून में विकलांगों को सुनिश्चित सुरक्षा और शिकायत के तौर तरीकों में शामिल होने पर सहायता की मांग करने वाले विकलांगों को विशेष सहायता जैसे प्रावधान किये जाएं । उन्होंने कहा कि केन््रद सरकार को विकलांगों के अधिकार को लेकर संयुक्त राष्ट्र की संधि के तहत व्यक्त प्रतिबद्धताओं को पूरा करना चाहिए । केन््रद और राज्य स्तर पर विकलांगों के लिए बने केंद्रो की निगरानी के लिए कोई स्वतंत्र इकाई बनायी जाए । अंबा सलेलकर और रत्नबोली राय ने कहा कि पुलिस अधिकारियों और सेना के प्रशिक्षण की पद्धति में बदलाव की आवश्यकता है । विकलांगों के साथ विशिष्ट और मानवीय व्यवहार को लेकर प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए । (भाषा)
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