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भारत के हितों को नुकसान पहुंचा रहे हैं पाकिस्तान और चीन: आरएसएस PDF Print E-mail
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Monday, 25 February 2013 10:58

भुवनेश्वर। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ ने आज कहा कि पाकिस्तान और चीन भारत के हितों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। जहां पाकिस्तान सीमा पार से आतंकवाद को बढ़ावा देकर भारत को नुकसान पहुंचा रहा है, वहीं चीन भारतीय बाजार को अपने सस्ते उत्पादों से पाटकर देश की अर्थव्यवस्था को तहस-नहस करने की कोशिश कर रहा है।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, ‘‘जहां पाकिस्तान ने भारत विरोधी नीतियां अपनायी हुई हैं और खुलकर देश की संप्रभुता को चुनौती दे रहा है, वहीं चीन ने चालाकी के साथ उपमहाद्वीप में आर्थिक युद्ध छेड़ रखा है।’’
नियंत्रण रेखा पर हाल में जारी तनातनी की ओर इशारा करते हुए भागवत ने कहा, ‘‘पाकिस्तानी सेना सीमा पर आतंकवादियों को लेकर आती है और वे :आतंकवादी: सैनिकों के सिर काट देते हैं। पाकिस्तान की नीतियां भारतीय संप्रभुता के लिए खुली चुनौती हैं।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि जहां पाकिस्तान हमेशा से भारत विरोधी नीतियां अपनाता रहा है, वहीं भारत में जब भी कुछ बुरी घटना होती है तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय भारत से संयम बरतने के लिए कहता है।
भागवत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘आप पाकिस्तान से भारत विरोधी नीतियां छोड़ने के लिए क्यों नहीं कहते।’’
उन्होंने साथ ही कहा कि पाकिस्तान की विदेश मंत्री भारत और दूसरे देशों की यात्रा के दौरान उन विषयों पर बात करती हैं जिन पर उन्हें बात नहीं करनी चाहिए।
भागवत अपना चार दिवसीय ओड़िशा दौरा खत्म करते हुए यहां जनसभा में


बोल रहे थे।    भागवत ने कहा कि भारत केवल शोर मचाता है और पाकिस्तान की नृशंस गतिविधियों :सैनिकों के सिर काटना: को खत्म करने के लिए कार्रवाई नहीं करता। भारत के लोगों का देश की सुरक्षा को लेकर चिंतित होना जायज है।
उन्होंने कहा कि भारत दो तरह के दुश्मनों से जूझ रहा है जिनमें एक दिखता है, जबकि दूसरा नहीं दिखता।
चीन को ‘अदृश्य शत्रु’ करार देते हुए संघ प्रमुख ने कहा, ‘‘चीन दुनिया भर में भारत को नीचा दिखाने की तैयारी करता रहा है। चीन ने पहले ही भारत के पड़ोसी देशों को प्रभाव में लेकर भारत की ताकत को कम करने के लिए घेराबंदी कर दी है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘चीन देश को अपने सस्ते उत्पादों से पाटकर भारत की अर्थव्यवस्था को नष्ट करने की तैयारी कर चुका है। चीन ने अपने फायदे के लिए भारत के पानी का रूख मोड़ने की भी कोशिश की है।’’
संघ प्रमुख ने चीन का सामना करने के लिए भारत की तैयारियों को लेकर कहा कि भारत को चीन की गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत की सुरक्षा गंभीर चिंता का विषय है। सतह और समुद्र दोनों में भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमा पूरी तरह अभेद्य नहीं है जिससे हथियारों, मादक पदार्थों और दूसरी चीजों की तस्करी संभव है।
भागवत ने कहा कि देश में बड़ी संख्या में घुसपैठिए आते हैं लेकिन ना तो केंद्र सरकार ना ही राज्य सरकारों के पास इसे रोकने के लिए कोई तंत्र है। (भाषा)

 
 

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