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संप्रग बैठक में राजा के आग्रह का समर्थन करेगी द्रमुक PDF Print E-mail
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Sunday, 24 February 2013 17:06

नयी दिल्ली (भाषा)। मंगलवार को संप्रग समन्वय समिति की बैठक में अगर पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा के टू जी स्पेक्ट्रम मामले में गवाह के तौर पर संयुक्त संसदीय समिति :जेपीसी: के समक्ष उपस्थित होने के आग्रह का मुद्दा उठा तब दमुक उनका समर्थन करेगी। यह पूछे जाने पर कि क्या दमुक इस विषय को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में होने वाली संप्रग समन्वय समिति की बैठक में उठायेगी, पार्टी प्रावक्ता एवं सांसद टी के इलानगोवन ने कहा, ‘‘ अगर कांग्रेस इस मुद्दे को उठाती है.. हमसे पूछती है, तब हमें राजा के साथ खड़ा होना चाहिए।’’
इलानगोवन ने कहा कि जेपीसी के समक्ष उपस्थित होने का राजा का आग्रह नया घटनाक्रम है और हमारे नेता हमें भविष्य की रणनीति के बारे में बतायेंगे।
दमुक प्रवक्ता ने कहा कि उनकी पार्टी संप्रग समन्वय समिति की बैठक में श्रीलंकाई तमिलों और तमिलनाडु के किसानोें की आत्महत्या के विषय को उठायेंगे।
लोकसभा में ्रदमुक के सदस्य राजा टू जी स्पेक्ट्रम मामले में मुख्य आरोपी है और वह जमानत पर रिहा होने से पहले कई महीने तिहार जेल में रहे हैं।
टू जी स्पेक्ट्रम घोटाला मामले में मुख्य और पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा संयुक्त संसदीय समिति :जेपीसी: के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने की जोरदार पैरवी करते हुए कहा था कि ‘बिना सुने ही’ उनकी निंदा की गई है।
राजा ने लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार से उनके दफ्तर में मुलाकात की थी और जेपीसी के समक्ष गवाह के तौर पर उपस्थित होने की इच्छा व्यक्त की।
सीबीआई की विशेष अदालत में उपस्थित


दूसरे गवाहों ने टू जी स्पेक्ट्रम घोटाले के मामले में राजा को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने कहा था, ‘‘ इससे सबसे बड़ी मिसाल यह है कि सम्मानीय उच्चतम न्यायालय ने दो फरवरी, 2012 को मेरे खिलाफ विशेष और पूर्वाग्रह से भरी टिप्पणी की और मुझे सुनने का मौका भी नहीं दिया गया।’’
जेपीसी में दमुक सदस्य टी आर बालू और टी शिवा की ओर से राजा को गवाह के तौर पर बुलाने के लिए समिति के अध्यक्ष पी सी चाको पर दबाव दिया जा रहा था। इनकी यह भी मांग थी कि अटार्नी जनरल जी ई वाहनवती को समिति के समक्ष फिर से बुलाया जाए। वाहनवती ने इस महीने जेपीसी के समक्ष कहा था कि राजा ने 2008 में टू जी लाइसेंस से संबंधित विवादास्पद प्रेस नोट को अंतिम क्षणों में बदल दिया था।
वाहनवती उस समय सालिसिटर जनरल थे। चाको संभवत: राजा को गवाह के तौर पर बुलाने के खिलाफ हैं।
समझा जाता है कि उन्होंने सदस्यों को बताया कि एक आरोपी के तौर पर उन्हें कानूनी संरक्षण प्राप्त है और वह किसी समिति के समक्ष नया खुलासा नहीं कर सकते हैं। इसलिए राजा को बुलाने का कोई मतलब नहीं है।
लेकिन चाको को अभी इस विषय पर अंतिम फैसला करना है।
चाको ने हाल ही में कहा था, ‘‘अगर राजा को बुलाया जायेगा, वह अंतिम गवाह होंगे।’’
बहरहाल, संसद सूत्रों ने बताया कि लोकसभा अध्यक्ष समिति को किसी व्यक्ति को गवाह के तौर पर बुलाने का निर्देश नहीं दे सकती हैं। इस स्थिति में वह राजा के पत्र को चाको को भेज सकती हैं।

 
 

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