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Saturday, 23 February 2013 12:01 |
जनसत्ता ब्यूरो नई दिल्ली । शिंदे ने शुक्रवार को संसद के दोनों सदनों में कहा कि विस्फोट की साजिश रचने वालों और इसे अंजाम देने वालों को पकड़ने की कोशिशें जारी हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने शुक्रवार को संसद के दोनों सदनों में दिए गए बयान में हैदराबाद में बम विस्फोटों के बाद स्थिति को नियंत्रण में बताते हुए दावा किया कि विस्फोट की साजिश रचने वालों और इसे अंजाम देने वालों को पकड़ने की कोशिशें जारी हैं। सरकार सुनिश्चित करेगी कि दोषियों को कानून के मुताबिक सजा मिले। शिंदे ने संसद में सरकार की तरफ से दिए बयान में कहा कि दोनों विस्फोटों में अब तक 16 व्यक्तियों की मौत हो चुकी है और 117 अन्य घायल हैं। घायलों में से चार की हालत गंभीर है। इसके पहले हैदराबाद में गुरुवार शाम हुए बम विस्फोटों पर संसद में सभी दलों की तरफ से गहरी चिंता जताई गई। सरकार के बयान से असंतुष्ट विपक्ष ने इस मुद्दे पर चर्चा की मांग को लेकर हंगामा किया जिससे दोनों सदनों की बैठक स्थगित करनी पड़ी। गृह मंत्री ने दोनों सदनों में दिए बयान में कहा कि विस्फोट के तत्काल बाद राज्य सरकार ने 25 एंबुलेंस सहित आपात चिकित्सा प्रतिक्रिया दल तैनात किया। राज्य पुलिस और एनआईए की हैदराबाद इकाई की एक टीम तुरंत मौके पर पहुंची और पूरे इलाके को घेरकर साक्ष्य जुटाए। राज्य की फोरेंसिक टीम भी मौके पर पहुंची। उन्होंने कहा कि एनआईए की एक टीम रात साढ़े नौ बजे एक विशेष विमान से दिल्ली से हैदराबाद भेजी गई। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) की विस्फोटों की जांच करने वाली विशेषज्ञ टीम भी शामिल थी। लोकसभा में शिंदे के बयान पर सवाल पूछने की इजाजत नहीं दिए जाने पर सदस्यों ने हंगामा कर दिया, जिससे सदन की बैठक दोपहर लगभग ढाई बजे एक घंटे के लिए स्थगित करनी पड़ी। शिंदे के बयान के बाद नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने उनसे कई सवालों के जवाब मांगे। सुषमा ने कहा कि यह समय दोषारोपण का नहीं है बल्कि आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर लड़ाई लड़ने का है। लेकिन इसके लिए सोच में समानता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अफसोस है कि इसे लेकर सरकार और विपक्ष की सोच में समानता नहीं है। सुषमा ने कहा कि गुरुवार को विस्फोटों के तुरंत बाद शिंदे ने कहा था कि राज्य सरकार को पहले ही जानकारी दे दी गई थी कि आतंकी वारदात की आशंका है। ऐसे में राज्य सरकार को अलर्ट होना चाहिए था। ये अनुमान था कि जब नौ साल के लंबे अंतराल के बाद अफजल गुरु को फांसी दी गई है तो कोई न कोई प्रतिक्रिया होगी ही। संवेदनशील इलाकों में प्रतिक्रिया की आशंका थी। ऐसे में हैदराबाद में तो अलर्ट होना ही चाहिए था। उन्होंने पूछा कि केंद्र ने केवल राज्य सरकार को सूचित कर दिया लेकिन आतंकी हमले को रोकने के लिए क्या किया। आतंकवाद कानून व्यवस्था का साधारण मामला नहीं है। साथ ही उन्होंने सवाल किया कि क्या घटना के बाद भी हम चेते हैं। सुषमा ने पूछा कि गुरुवार के विस्फोट का हैदराबाद में कुछ दिन पहले एमआईएम के एक विधायक के भड़काऊ भाषणों से तो कोई संबंध नहीं है? उन्होंने मांग की कि आतंकवाद के पीड़ितों को मुआवजे की राशि एक जैसी होनी चाहिए। किन्हीं मामलों में मुआवजा कम दिया जाता है तो किन्हीं में ज्यादा। उन्होंने कहा कि सरकार गुरु को नौ साल के अंतराल के बाद फांसी देने का औचित्य सरकार समझाए। कभी तो मजहब के आधार पर आतंकवाद को लेकर हम बंट जाते हैं तो कभी पकड़े गए आतंकवादियों के मानवाधिकार का सवाल खड़ा कर उनसे नरमी बरतने की पैरवी की जाती है। सुषमा के बाद सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव इस मुद्दे पर अपनी बात रखना चाहते थे। लेकिन उपाध्यक्ष करिया मुंडा ने नियम-372 का हवाला देते हुए कहा कि मंत्री के बयान के तुरंत बाद चर्चा करने की परंपरा नहीं है। शिंदे को राज्यसभा में भी बयान देना है, इसलिए सदस्य इस पर बाद में चर्चा कर सकते हैं। संसदीय कार्य मंत्री कमल नाथ ने कहा कि सदन अगर इस विषय पर चर्चा चाहता है तो सरकार तैयार है। मुंडा ने भी कहा कि सदस्य कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में तय करें कि इस मुद्दे पर चर्चा कब की जानी है। सदस्य चर्चा का नोटिस दें और चर्चा करा दी जाएगी। लेकिन सपा
सदस्य अड़े रहे और आसन के सामने आकर मुलायम को बोलने की इजाजत देने की मांग करने लगे। इस बीच गरमागरमी बढ़ती देख मुंडा ने सदन की बैठक दोपहर साढ़े तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी। राज्यसभा में सदस्यों ने गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे के बयान देने से पहले चर्चा कराने की मांग की। हालांकि बाद में हंगामे के बीच ही शिंदे ने बयान दिया और उसके बाद चर्चा शुरू हुई। हैदराबाद की घटना पर चर्चा की मांग को लेकर तीन बार के स्थगन के बाद दोपहर तीन बजे जब सदन की बैठक शुरू हुई तो सभापति हामिद अंसारी ने घोषणा की कि गृह मंत्री हैदराबाद की घटना पर एक बयान देंगे। इस पर भाजपा के एम वेंकैया नायडू सहित विभिन्न दलों के सदस्यों ने आपत्ति जताई। नायडू ने कहा कि यह गंभीर मुद्दा है और इसे हल्के तौर पर नहीं लिया जा सकता। अंसारी ने कहा कि पहले मंत्री को अपना बयान देने दिया जाए। इस पर नायडू ने कहा कि इस मुद्दे पर लोकसभा में चर्चा हो गई और राज्यसभा में इसकी अनुमति नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा राज्यों की परिषद है और यहां सदस्यों को अपनी चिंता जताने का पूरा हक है। लेकिन सरकार जो रवैया अपना रही है, उससे वे क्षुब्ध हैं और सदन से वाकआउट करते हैं। इतना कह कर नायडू सदन से बाहर चले गए। हालांकि बाद में वे वापस आ गए। राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा कि आतंकवादी हमले भारत की संप्रभुता और पहचान के लिए गंभीर चुनौती हैं। हमें आतंकवाद से निपटने के कदमों को राजनीति से परे रखना चाहिए। सरकार को देश के खुफिया तंत्र को मजबूत करके आतंकवादी माड्यूलों को नष्ट करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सीमा पार तमाम तरह के पक्ष हैं जो आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं। हमें अपनी चौकसी को हरगिज कम नहीं करना चाहिए। देश में फांसी की दो घटनाओं के बाद इस तरह के हमलों की आशंका थी। सरकार को बताना चाहिए कि उसने इन मामलों में खुफिया तंत्र का इस्तेमाल किस तरह किया था। सपा नेता रामगोपाल यादव ने कहा कि देश में बार-बार इस तरह के हमले यह दिखाते हंै कि हममें दृढ़ इच्छाशक्ति का अभाव है। तेदेपा के देवेंद्र गौड़ टी ने कहा कि इस मामले में गृह मंत्री का बयान बिल्कुल गंभीर नहीं लग रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को मृतकों के परिजनों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि को बढ़ाना चाहिए और घायलों के इलाज का सारा खर्चा खुद उठाना चाहिए। कांग्रेस की रेणुका चौधरी ने कहा कि यह एक बेहद कायरतापूर्ण हमला है। लेकिन ऐसे हमलों से आतंकवाद के खिलाफ लड़ने का हमारा संकल्प हरगिज कमजोर नहीं पड़ेगा। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पूरे देश के एकजुट होने की बात की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि हम आतंकवादियों के मंसूबों को कभी सफल नहीं होने देंगे। भाकपा के डी राजा ने कहा कि सरकार को दक्षिणपंथी आतंकवाद से निपटने के लिए एक रणनीति तैयार करनी चाहिए। केवल बयान देने से काम नहीं होगा। खुफिया तंत्र सहित सभी सरकारी एजंसियों को मजबूत बनाने की जरूरत है। बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि ऐसे हमले बार बार होते हैं। इनसे निपटने के लिए हमें व्यापक नीति तैयार करनी होगी और केंद्र व राज्यों के बीच समन्वय बेहतर करना होगा। निचले सदन में माकपा के बासुदेव आचार्य ने कहा कि हैदाराबाद में आतंकी हमलों की तीन घटनाएं हो चुकी है और इसके बावजूद वहां खुफिया तंत्र बार-बार चूक रहा है। उन्होंने कहा कि हैदराबाद में राष्ट्रीय अपराध निरोधक केंद्र की मैजूदगी के बावजूद वहां बार-बार हो रही इन घटनाओं के लिए केंद्र और राज्य दोनों को जवाब देना होगा। सपा नेता मुलायम सिंह यादव ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि आतंकवादी हमले की आशंका की खुफिया सूचना मिलने के बावजूद आतंकी अपने कारनामों को अंजाम देने में कैसे सफल हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि जब-जब आतंकी हमले हुए हैं, पूरा देश और सदन सरकार के साथ होता है। सभी दलों का समर्थन मिलने के बावजूद आतंकी हमलों को सरकार क्यों नहीं रोक पा रही है, इसका वह जवाब दे। वह बताए कि उसकी क्या कमजोरी है। जद (एकी) के शरद यादव ने कहा कि आतंकी हमलों की आशंकाओं की सूचना मिलने के बावजूद ऐसी घटनाएं हो जाना इस बात का साफ संकेत हंै कि यह सरकार ‘लुंज पुंज’ है।
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