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चिकित्सकों ने एमसीआई के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया PDF Print E-mail
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Friday, 22 February 2013 17:47

मुंबई। कुछ चिकित्सकों ने बंबई उच्च न्यायालय में याचिकाएं दायर कर महाराष्ट्र मेडिकल काउन्सिल के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें उसने उनका पंजीकरण करने से इस आधार पर इंकार कर दिया कि उनकी डिग्री मेडिकल काउन्सिल आॅफ इंडिया :एमसीआई: से मान्यता प्राप्त नहीं है।
न्यायमूर्ति एस एफ वजीफदार और न्यायमूर्ति मृदुला भाटकर की पीठ ने कल इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह परेशान करने वाली बात है कि सरकार द्वारा संचालित कॉलेज मेडिकल स्ट्रीम में गैर मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम संचालित कर रहे हैं जो कई चिकित्सकों को गैर मान्यता प्राप्त डिग्रियां देते हैं।
मुद्दे को गंभीर बताते हुए पीठ ने अटॉर्नी जनरल गुलाम वाहनवती और अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल डेरियस खंबाटा को इस मामले में सहायता करने का अनुरोध किया है।
न्यायमूर्ति वजीफदार ने कहा, ‘‘हम कोई ऐसा आदेश नहीं सुनाना चाहते जिसके गंभीर परिणाम होंगे। यह जानना परेशान करने वाली बात है कि राज्य :सरकार: ऐसा कर रही है। कैसे वह उन पाठ्यक्रमों को चला सकती है जिन्हें मान्यता प्राप्त नहीं है। इसके कारण अनेक छात्रों को कष्ट भुगतना पड़ेगा।’’
इन याचिकाओं में से एक डा. मनोज कशीद ने दायर की थी। उन्होंने साल 2008 में कोलाबा स्थित इंस्टीट्यूट आॅफ नेवल मेडिसीन, आईएनएचएस


से एम. एस. :हड्डी रोग: में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की थी। कशीद ने सायण स्थित लोकमान्य तिलक मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री 2001 में हासिल की थी। उसके बाद, कशीद ने एक साल की अनिवार्य इंटर्नशिप की और बाद में एम.एस. की डिग्री हासिल की।
कशीद के वकीलों वी एम थोराट और पूजा ने दलील दी कि 1999 में पास होने वाले कई छात्रों को भी कष्ट उठाना पड़ रहा है क्योंकि एमसीआई ने मेडिकल स्ट्रीम में 44 से अधिक पाठ्यक्रमों को मान्यता देने से इंकार कर दिया।
थोराट ने दलील दी कि कई सरकारी कॉलेज ऐसे कोर्स चलाते हैं जिन्हें एमसीआई से मान्यता प्राप्त नहीं है या एमसीआई ने उनकी मान्यता खत्म की है।
कशीद ने मांग की है कि एमसीआई एम.एस. :आॅर्थोपेडिक: पाठ्यक्रम को मान्यता दे और कई छात्रों का पंजीकरण कराए जिन्हें इंस्टीट्यूट आॅफ नेवल मेडिसीन ने डिग्री प्रदान की है। इसके अलावा उन्होंने प्रतिवादियों सरकार, इंस्टीट्यूट आॅफ नेवल मेडिसीन और मुंबई विश्वविद्यालय से उनका कैरियर बर्बाद करने के लिए मुआवजा मांगा है।
कशीद ने याचिका में आरोप लगाया है कि दाखिले के समय छात्रों को आश्वस्त किया गया था कि पाठ्यक्रम को मान्यता देने के लिए आवेदन दिया गया है और इसे जल्द ही मान्यता मिलेगा। (भाषा)

 
 

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