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Wednesday, 20 February 2013 21:21 |
नयी दिल्ली । खाप पंचायतों ने कहा है कि वे झूठी शान की खातिर कोई आदेश नहीं देती है।
महिलाओं के प्रति कथित रूप से फरमान जारी करने के कारण न्यायिक समीक्षा के दायरे में आयी खाप पंचायतों ने उच्चतम न्यायालय से कहा है कि वे झूठी शान की खातिर हत्या करने और समाज में महिलाओं द्वारा मोबाइल के इस्तेमाल या उनके जीन्स पहनने के खिलाफ कोई आदेश नहीं देती है। सर्वजातीय सर्व खाप पंचायत ने इस संबंध में शीर्ष अदालत में दाखिल हलफनामे में कहा है कि उसने इस तरह का फरमान जारी करके कभी भी कानून का उल्लंघन नहीं किया है। हलफनामे में कहा गया है कि उसे एक ही गोत्र में विवाह को लेकर कुछ आपत्ति है और हिन्दू विवाह कानून को ऐसे विवाहों को प्रतिबंधित करना चाहिए। हलफनामे के अनुसार लोक अदालतों की तरह ही खाप पंचायतें भी अदालत से बाहर न्याय करने के लिये फैसले लेती हैं और उन गरीबों तथा निरक्षरों के साथ
न्याय करती हैं जो अदालत तक नहीं पहुंच सकते हैं। हलफनामे में कहा गया है, ‘‘भीतरी इलाकों में रहने वाले अधिकतर लोग गरीब और निरक्षर हैं और उनके पास अदालत तक पहुंचने का कोई जरिया नहीं है। इसलिए वे अपनी खाप पंचायत, सर्व खाप पंचायत या सर्व जातीय सर्व खाप पंचायत के जरिये न्याय मांगते हैं।’’ सर्वजातीय सर्व खाप पंचायत ने महिलाओं के प्रति फरमान जारी करने से खाप पंचायतों को रोकने के लिये दायर गैर सरकारी संगठन शक्ति वाहिनी की जनहित याचिका पर शीर्ष अदालत के निर्देशानुसार यह हलफनामा दाखिल किया है। जनहित याचिका में महिलाओं को कथित रूप से परेशान करने और प्रेम विवाह करने वाले युगलों की हत्या करने वाली खाप पंचायतों के खिलाफ सरकार को कार्रवाई का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। इस याचिका पर पांच मार्च को अंतिम रूप से सुनवाई होनी है। इससे पहले, शीर्ष अदालत ने कहा था कि महिलाओं के पहनावे और उनके मोाबाइल लेकर नहीं चलने के बारे में खाप पंचायतों का आदेश गैरकानूनी है। (भाषा)
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