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Wednesday, 20 February 2013 10:47 |
सुरेंद्र सिंघल, देवबंद। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी के ताजे बयान से यहां उलमा में बेचैनी है।
दारूल उलूम के प्रवक्ता अशरफ उस्मानी ने साफ कर दिया कि सियासी मामलों पर संस्था की प्रतिक्रिया न देने की परंपरा है। दारूल उलूम वक्फ के विद्वान मौलाना अब्दुल्ला जावेद महमूद मदनी के बयान को ज्यादा तवज्जो नहीं देना चाहते। उलमा का मानना है कि भाजपा नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के रास्ते में आने वाली बाधाओं के दूर करने की कोशिशों में लगी है। महमूद मदनी का बयान उसी कोशिशों का हिस्सा लगता है। दिल्ली में नरेंद्र मोदी की ताजपोशी में आ रही बाधाओं को दूर करने की कोशिशें नाकाफी साबित हो रही हैं। जाहिर है भाजपा को अभी और कड़ी मशक्कत करनी होगी। मौलाना अब्दुल्ला जावेद ने दो टूक कहा कि भाजपा जब तक अपने बने बनाए घरौंदे से बाहर नहीं आएगी, तब तक देश उसे स्वीकार नहीं करेगा। वह नरेंद्र मोदी को, सुषमा स्वराज को या अरुण जेटली को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करें तो भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा। जावेद कहते हैं कि देश को अटल बिहारी वाजपेयी जैसा चेहरा चाहिए। छह साल के वाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व काल पर समाज के किसी तबके को आपत्ति नहीं थी। भाजपा को ऐसी बातें छोड़नी होंगी जिन्हें मुसलिम समाज पसंद नहीं करता। जावेद ने महमूद मदनी की तरह यह माना कि गुजरात विधानसभा चुनाव में मुसलमानों ने भाजपा को वोट दिया है लेकिन इतने से ही मोदी देश को स्वीकार नहीं हो जाएंगे। उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी का अनुसरण करना होगा और यदि भाजपा खुद को बदल लेती है, तो वह देश की सबसे अच्छी और पहली पसंद की पार्टी होगी। महमूद मदनी और उनका संगठन राष्ट्रवादी और मुख्यधारा की बात करने वाला रहा है। एक टीवी चैनल को हाल में दिए इंटरव्यू में महमूद मदनी ने कहा कि गुजरात की स्थिति दूसरे राज्यों से यकीनन
बेहतर है और मुसलमानों का नरेंद्र मोदी के प्रति सोच में भी बदलाव आ रहा है जिस वजह से मुसलमानों ने कई इलाकों में भाजपा को वोट दिया है। इसी तरह बिहार में भी जहां मुसलमानों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को वोट दिया, वहीं उनकी साझीदार भाजपा को भी वोट दिया। महमूद मदनी ने कहा कि भले ही गुजरात और बिहार में मुसलमानों के सोच में बदलाव हुआ है लेकिन यह बात राष्ट्रीय के स्तर पर नहीं कही जा सकती। नरेंद्र मोदी पर देवबंदी उलमा अपनी राय देने में बहुत सतर्कता बरतते हैं। महमूद मदनी ने भी सहजता से मोदी पर अपनी राय नहीं जताई। बहुत घुमा फिरा कर और बच कर उन्होंने मोदी संबंधी सवालों का जवाब दिया। उनका यह भी कहना था कि अभी तो भाजपा ने मोदी को प्रधानमंत्री पद का दावेदार भी घोषित नहीं किया है, ऐसे में यह कहना बड़ी जल्दबाजी होगी कि गुजरात की तरह मुसलमान देश में भी उन्हें स्वीकार कर लेगा। दारूल उलूम वक्फ से जुड़े बुजुर्ग आलिम मौलाना अब्दुल्ला जावेद कहते हैं कि महमूद मदनी देश के आम मुसलमानों के सोच की नुमाइंदगी नहीं करते हैं। उनकी राज्यसभा की सदस्यता खत्म हो चुकी है। भाजपा ने नजमा हेपतुल्ला और मुख्तार अब्बास नकवी जैसे कई मुसलमानों को राज्यसभा में बैठाया हुआ है। हो सकता है कल महमूद मदनी भी उनकी कृपा से वहां बैठ जाए। उलमा से इतर आम मुसलमानों ने महमूद मदनी के नरेंद्र मोदी पर दिए बयान पर अभी कोई राय नहीं बनाई है जबकि भाजपा के पूर्व जिला संयोजक रामपाल पुंडीर ने कहा कि भाजपा और नरेंद्र मोदी दोनों धर्मनिरपेक्ष हैं। दूसरे दल राजनीतिक स्वार्थवश उनकी भगवा छवि पेश करते हैं। उन्होंने कहा कि जैसे वाजपेयी देश को स्वीकार हुए, वैसे ही नरेंद्र मोदी भी स्वीकार होंगे। आखिर गुजरात भी देश का हिस्सा है। जब मुसलमानों ने वहां उन्हें कबूल कर लिया तो अवसर आने पर वह वैसा ही समर्थन पूरा देश भी देगा।
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