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वीरप्पन के चार साथियों की फांसी पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई PDF Print E-mail
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Monday, 18 February 2013 12:47

नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने चंदन तस्कर वीरप्पन के चार सहयोगियों की मौत की सजा पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। इन्हें वर्ष 2004 में मौत की सजा सुनाई गई थी। कर्नाटक में बारूदी सुरंग का विस्फोट करने के मामले में इन्हें दोषी पाया गया था। विस्फोट में 22 पुलिसकर्मी मारे गए थे ।
पीठ ने मामले की सुनवाई बुधवार को तय की है ।
मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर और न्यायामूर्ति ए. आर. दवे एवं न्यायमूर्ति विक्रमजीत सेन की पीठ ने कहा, ‘‘तब तक चारों दोषियों के मौत की सजा पर रोक लगाई जाती है ।’’
पीठ ने कहा, ‘‘रिट याचिका पर सुनवाई परसों होने दीजिए ।’’
चारों दोषियों की तरफ से वकील सामिक नारायण ने याचिका दायर की जिन्हें इसमें संशोधन और सुधार की छूट दी गई थी । अटॉर्नी जनरल जी. ई. वाहनवती ने यािचका को स्वीकार किए जाने पर आपत्ति उठाई थी ।
वाहनवती ने तकनीकी आधार पर याचिका को स्वीकार करने पर सवाल उठाए और कहा कि याचिका की प्रति आज सुबह तक न तो केंद्र सरकार को दी गई और न ही कर्नाटक सरकार को ।
याचिकाकर्ताओं की ओर से उपस्थित हुए वरिष्ठ वकील कोलिन गोंजाल्विस ने पीठ से एक...दो दिनों के अंदर उचित याचिका तैयार करने की छूट देने की मांग की ।
संक्षिप्त सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि अगर वह नोटिस जारी करती है तो इसे पूरे मामले


की सुनवाई करनी होगी ।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि दो विकल्प हैं - या तो इस पीठ को मामले की सुनवाई करनी होगी या ऐसी पीठ को मामला भेजना होगा जिसे दया याचिका पर सुनवाई का अधिकार न हो ।
पीठ ने कहा कि इस मामले की सुनवाई का असर राजीव गांधी हत्या मामले में दोषियों की मौत की सजा पर भी पड़ेगा ।
उच्चतम न्यायालय ने 16 फरवरी को चारों दोषियों की याचिका पर त्वरित सुनवाई से इस आधार पर इंकार कर दिया कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि उन्हें कल यानी 17 फरवरी को फांसी पर लटकाया जाने वाला है ।
गोंजाल्विस ने कहा कि उन्हें सूचना मिली थी कि चारों को 17 फरवरी को फांसी पर लटकाया जाने वाला है जिसके बाद उन्होंने उच्चतम न्यायालय से संपर्क किया ।
उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रधान न्यायाधीश के आवास पर उनके समक्ष इस मामले को रखा और प्रधान न्यायाधीश ने उनसे कहा कि इस पर नियमानुसार सुनवाई होगी ।
वीरप्पन के बड़े भाई ज्ञानप्रकाश, सिमोन, मीसिकार मदैया और बिलावेन्द्रन को 2004 में मौत की सजा सुनाई गई थी । उन्हें कर्नाटक के पलार में 1993 में बारूदी सुरंग में विस्फोट मामले में सजा सुनाई गई जिसमें 22 पुलिसकर्मी मारे गए थे ।
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 13 फरवरी को उनकी दया याचिका खारिज कर दी थी।
चारों दोषी कर्नाटक के बेलगाम में एक जेल में बंद हैं ।

 

Last Updated on Monday, 18 February 2013 13:37
 
 

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