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हेलिकाप्टर घोटाले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो: भाजपा PDF Print E-mail
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Thursday, 14 February 2013 14:18

नयी दिल्ली । बीजेपी  ने मांग की है कि हेलिकाप्टर खरीद में कथित रिश्वत मामले की जांच उच्चतम न्यायालय की देख रेख में होनी चाहिए।

भारतीय जनता पार्टी ने आज मांग की कि इतालवी कंपनी से हेलिकाप्टर खरीद में कथित रिश्वत खाने के मामले की जांच उच्चतम न्यायालय की देख रेख में होनी चाहिए। पार्टी प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने यहां कहा, ‘‘ इस घोटाले की जांच के सही नतीजे तभी सामने आएंगे जब उच्चतम न्यायालय की देख रेख में सारे मामले की समयबद्ध तरीके से तहकीकात कराई जाए। ऐसा नहीं होने पर मामले की लीपा पोती ही होगी। ’’
वीवीआईपी हेलीकाप्टर सौदे में घोटाले की बात सामने आने के बाद भारत ने कंपनी से बाकी बचे 2400 करोड़ रुपये के भुगतान पर रोक लगा दी। यह रोक तब तक लगी रहेगी जब तक सीबीआई जांच के परिणाम नहीं आते।
इस बीच इतालवी जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आयी है कि गुइदो हैस्के और क्रिश्चियन माइकल इस सौदे में मुख्य बिचौलिये थे और कुल 5.1 करोड़ यूरो की रिश्वत में से करीब 1.5 करोड़ यूरो का भुगतान भारतीय व्यक्तियों को किया गया।
बारह वीवीवीआई हेलीकाप्टरों की खरीद के सौदे में कथित घोटालों को लेकर छिड़े विवाद के बीच यह बात भी सामने आयी है कि वर्ष 2003 में निविदा की गुणात्मक जरूरतों में बदलाव किया गया था। बदलाव राजग सरकार के समय हुआ जब जार्ज फना’डिस रक्षा मंत्री थे।
भाजपा के वरिष्ठ नेता और वाजपेयी सरकार


में रक्षा मंत्री रह चुके जसवंत सिंह ने हालांकि इस बदलाव का पूर्ण समर्थन करते हुए कहा कि ऐसा ‘‘विशुद्ध रूप से व्यावसायिक कारणों से’’ किया गया था।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2000 की मूल निविदा में 18000 फुट उच्च्ंचे तक उड़ सकने की क्षमता वाले हेलिकाप्टर की शर्त रखी गई थी। लेकिन इस मापदंड पर विश्व की केवल एक कंपनी खरी उतरी। उन्होंने कहा बिना प्रतिस्पर्धा के केवल एक विक्रेता को इतना बड़ा सौदा देना उचित नहीं समझा गया और इसीलिए 18000 फुट के मापदंड को घटा दिया गया जिससे अन्य हेलिकाप्टर विक्रेता भी प्रतिस्पर्धा में शामिल हो सकें।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरूण जेटली ने बुधवार को कहा, ‘‘यह बोफोर्स जैसा मामला है। जब रिश्वत देने वाले को पकड़ लिया गया, लेकिन रिश्वत पाने वाले की पहचान नहीं की गई। भारत सरकार कब तक रिश्वत लेने वालों को बचाएगी। भाजपा इस मामले को संसद में उठाएगी और सरकार से यह बताने की मांग करेगी कि रिश्वत लेने वाले कौन हैं और कौन उन्हें बचा रहा है।’’
बहरहाल, कांगे्रस ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि वह दुष्प्रचार कर रही है और इस मुद्दे पर संसद को उसी तरह बाधित करने की योजना बना रही है जैसा कि 2जी और अन्य मुद्दों पर पूर्व में किया गया था।
कांगे्रस ने कहा कि सरकार ने तत्परता से सीबीआई जांच के आदेश दिये हैं और समुचित जांच के बिना किसी को भी फांसी पर नहीं लटकाया जा सकता। (भाषा)

 

 

Last Updated on Thursday, 14 February 2013 15:20
 
 

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