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प्रवर्तन निदेशालय की नजर में है वीवीआईपी हेलीकॉप्टर सौदा PDF Print E-mail
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Wednesday, 13 February 2013 21:55

नयी दिल्ली। इतालवी रक्षा कंपनी से वीवीआईपी हेलीकाप्टर खरीद के संकट में पडेÞ सौदे पर प्रवर्तन निदेशालय की भी नजर है और संभावना है कि एजेंसी 3600 करोड़ रुपये के इस सौदे में रिश्वत दिये जाने के आरोपों की जांच के लिए एक आपराधिक मामला दर्ज कर सकती है।
एजेंसी सूत्रों ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय ने उन दस्तावेजों पर गौर करना शुरू कर दिया है जो उसे अमेरिकी अटॉर्नी जनरल एडमंड एलेन से प्राप्त हुए थे। एलेन पूर्व में हथियार डीलर अभिषेक वर्मा से जुड़ा हुआ था और दस्तावेजों से यह संकेत मिले थे कि कंपनी अगस्तावेस्टलैंड द्वारा हेलीकाप्टर सौदे में रिश्वत दी गई।
कंपनी का उल्लेख भारतीय रक्षा और सुरक्षा आवश्यकताओं के लिए उपयोगी साजोसामान और सैन्य हेलीकाप्टरों की कथित खरीद के संदर्भ में किया गया था जो कि इतालवी रक्षा एवं एयरोस्पेस कंपनी फिनमेकैनिका के मुख्य कार्यपालक अधिकारी ग्यूसेप ओर्सी की गिरफ्तारी को लेकर खबरों में है।
सूत्रों ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय सीबीआई के प्राथमिकी दर्ज करने के बाद धन शोधन निरोधक अधिनियम की कठोर धाराओं के तहत एक मामला दर्ज करने के संबंध में फैसला करेगा और वह विदेशी मुद्रा विनिमय प्रबंधन अधिनियम :फेमा: के तहत चल रही मौजूदा जांच पर भी


गौर करेगा।
प्रवर्तन निदेशालय देश में किये गए हेलीकॉटर सौदे में हुए विदेशी मुद्रा विनिमय कानूनों के कथित उल्लंघन की जांच गत वर्ष से ही कर रहा है तथा उस जांच को कथित कंपनी के अन्य लेन देनों तक ‘‘विस्तारित कर दिया गया है।’’
एजेंसी ने अभिषेक वर्मा से इस कंपनी से उनके लेनदेने के बारे में भी पूछताछ की थी लेकिन सूत्रों ने कहा कि इस मामले में कुछ ही सुराग मिले थे। वर्मा ने कोई गलत कार्य करने से इनकार किया था।
इसके साथ ही यह भी समझा जाता है कि एजेंसी ने वीवीआईपी सेवा के वास्ते फिनमेकैनिका की सहायक कंपनी अगस्तावेस्टलैंड द्वारा निर्मित 12 हेलीकाप्टरों की वर्ष 2010 में खरीद के संबंध में किये गए लेनदेन के संबंध में कुछ सुराग जुटाये हैं। 
सूत्रों के अनुसार एक बार धनशोधन निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज करने के बाद प्रवर्तन निदेशालय विदेशी अधिकारियों से सम्पर्क करेगा क्योंकि यह उसे आर्डर के लिए दी गई रिश्वत के लाभ की पहचान करने का ठोस आधार प्रदान करेगा। 
सूत्रों ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय ने आधिकारिक रिकॉर्ड के लिए इटली में अपने विदेशी समकक्ष से संपर्क भी किया है लेकिन एजेंसी को वांछित मदद मिलनी अभी बाकी है। (भाषा)

 
 

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