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Wednesday, 13 February 2013 21:51 |
नयी दिल्ली। सीबीआई ने रक्षा मंत्रालय से प्रेस कतरनों के अलावा अन्य सामग्री प्रदान करने को कहा है ताकि जांच एजेंसी 3600 करोड़ की लागत से वीवीआईपी हेलिकॉप्टरों की खरीद से जुड़े सौदे में दलाली के आरोपों की जांच शुरू कर सके।
इससे ही जुड़ी घटना में सीबीआई ने इटली में भारतीय मिशन से दस्तावेज प्रदान करने के लिए संपर्क किया है। यह आने वाले दिनों में प्राथमिक जांच :पीई: दर्ज करने में मदद कर सकता है। सीबीआई सूत्रों ने बताया कि उन्होंने रक्षा मंत्रालय द्वारा प्रदान की गई शिकायत को पढ़ लिया है और पाया कि उन्होंने प्रेस कतरनों के अलावा कोई सामग्री प्रदान नहीं की है। यह मामले में प्राथमिक जांच शुरू करने के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने बताया कि एजेंसी ने इटली में भारतीय मिशन से संपर्क किया है ताकि वह वहां की जांच और अभियोजन एजेंसियों से सामग्री एकत्र करे। सूत्रों ने बताया कि उनसे जांच से संबंधित उन दस्तावेजों को भी हासिल करने को कहा गया है जो मामले में सार्वजनिक हैं और आधिकारिक माध्यम से सामग्री हासिल करने में सफल नहीं हो सके हैं। सूत्रों ने कहा कि सीबीआई लोक अभियोजक यूजेनियो फुस्को की ओर से दायर रिपोर्ट को हासिल करने का प्रयास कर रही है जिसके आधार पर फिनमेकैनिका के चेयरमैन और सीईओ ग्यूसेप
ओर्र्सी को गिरफ्तार किया गया था क्योंकि यह उन भारतीयों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद कर सकती है जिन्हें कथित तौर पर रिश्वत मिली है। सीबीआई सूत्रों ने बताया कि इससे पहले दिन में एजेंसी को रक्षा मंत्रालय से एक शिकायत मिली जिसमें फिनमेकैनिका की सहायक कंपनी अगस्तावेस्टलैंड से 12 हेलिकॉप्टरों की खरीद में कथित दलाली की जांच की मांग की गई है। भारत ने फरवरी 2010 में वायु सेना की एलीट कम्युनिकेशन स्क्वाड्रन के लिए अगस्तावेस्टलैंड से तीन इंजनों वाले 12 एडब्ल्यू-101 हेलिकॉप्टरों की खरीद के लिए करार पर हस्ताक्षर किया था। यह हेलिकॉप्टर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य अति विशिष्ट लोगों को लाता-ले जाता है। सौदा तब इतालवी एजेंसियों के जांच के दायरे में आया जब भारत में रिश्वत दिए जाने के आरोप सामने आए। एजेंसियों ने इतालवी रक्षा और एयरोस्पेस कंपनी फिनमेकैनिका के प्रमुख ग्यूसेप ओर्सी को अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार के संबंध में अपनी जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किया। यह आरोप लगाया है कि करार के समय कंपनी के सीईओ रहे ओर्सी रिश्वत दिए जाने के मामले में शामिल थे। रिश्वत के रूप में कथित तौर पर तकरीबन पांच करोड़ यूरो :तकरीबन 362 करोड़ रुपये: दिए गए ताकि इस बात को सुनिश्चित किया जा सके कि कंपनी को अनुबंध मिले। रिश्वत के तौर पर दी गई रकम सौदे का तकरीबन 10 फीसदी है। (भाषा)
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