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Wednesday, 13 February 2013 16:05 |
नयी दिल्ली (भाषा)। भारत को लगता है कि अमेरिका और ईरान के साथ उसके अच्छे संबंधों ने इन दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई को पाटने को लेकर उनके बीच एक सार्थक वार्ता कराने के लिए उसे एक ‘महत्वपूर्ण स्थान’ पर पहुंचा दिया है।
गौरतलब है कि तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच तनातनी चल रही है। विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने स्वीकार किया है कि संयुक्त राष्ट्र में ईरान के खिलाफ भारत के वोट डालने के चलते इस खाड़ी देश ने परेशानी महसूस की थी लेकिन खुर्शीद ने इस बात पर खुशी जाहिर की कि दोनों देश अपने संबंधों को कायम रखने और एक दूसरे को अच्छा मित्र मानने के लिए सक्षम हैं। ग्लोबल इंडिया फाउंडेशन द्वारा यहां आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करने के दौरान खुर्शीद ने ईरान पर लगाए गए एकपक्षीय प्रतिबंधों :अमेरिकी प्रतिबंध: को भारत द्वारा स्वीकार नहीं किये जाने और इस तेल बहुल देश के साथ संबंधों के आगे बढ़ने की बात का भी जिक्र किया। खुर्शीद ने कहा कि भारत ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि वह ईरान का पक्ष नहीं ले रहा है बल्कि एक सैद्धांतिक रूख अख्तियार कर रहा है और प्रतिबंधों के बावजूद ‘हम दोस्त बने रहेंगे।’ अमेरिका के साथ भारत के संबंधों के बारे में बात करते हुए खुर्शीद ने कहा कि दोनों देशों के बीच गठजोड़ पिछले 15 साल में
‘बहुत मूल्यवान संबंध’ के रूप में विकसित हुआ है। उन्होंने कहा कि हम अमेरिका का अच्छा मित्र बने रहेंगे और हम ईरान के साथ भी अच्छी मित्रता जारी रखेंगे, इस तरह से इसने हमें इन दोनों के बीच मौजूद अविश्वास की खाई को पाटने और उनके बीच एक सार्थक वार्ता के लिए जरूरी ‘लिंकेज’ मुहैया करने वाले एक अहम स्थान पर पहुंचा दिया है। खुर्शीद ने कहा कि हमने ईरान पर अमेरिका द्वारा एकपक्षीय तरीके से लगाए गए एकपक्षीय प्रतिबंधों को स्वीकार नहीं किया। हम असहमत हो सकते हैं और विश्व अब हमारे सहमत और असहमत होने की क्षमता को महत्व देता है। उन्होंने ईरान के बारे में कहा, ‘‘मैं जानता हूं कि वे परेशान होंगे, यदि आप किसी के नाजुक क्षणों में उसके साथ खड़े नहीं होंगे तो कोई भी परेशान हो सकता है। लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि हम ईरान के साथ वार्ता जारी रखेंगे और ईरान इस बात को समझता है कि हमने क्या किया और हम क्या कर रहे हैं।’’ खुर्शीद ने यह भी कहा कि भारत...ईरान संयुक्त आयोग की बैठक यहां कुछ हफ्तों में होगी। इसमें व्यापार बढ़ाने और व्यापार की मुद्रा के बारे में चर्चा होगी। ईरान के चाबहार बंदरगाह के बारे में उन्होंने कहा कि भारत को अमेरिका नीत नाटो सैनिकों के अफगानिस्तान से 2014 तक वापस जाने के बाद इस देश में पहुंचने के लिए कॉरीडोर और मार्ग की जरूरत पड़ेगी।
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