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Wednesday, 13 February 2013 15:26 |
पटना । बिहार में प्रेस की वर्तमान स्थिति पर भारतीय प्रेस परिषद :पीसीआई: के तथ्यान्वेषी दल की रिपोर्ट पर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद और लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामविलास पासवान ने आज नीतीश सरकार को आड़े हाथ लिया।
लालू प्रसाद ने प्रेस परिषद की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह रिपोर्ट नीतीश सरकार के लिए चुल्लू भर पानी में डूब मरने की स्थिति के समान है। रिपोर्ट में बिहार में प्रेस की जिस स्थिति के बारे में कहा गया है उसके अनुसार लोकतंत्र के लिए स्थिति विस्फोटक है। प्रेस काउंसिल की रिपोर्ट बता रहा है कि प्रिंट मीडिया के संवाददाताओं और उनकी रिपोर्ट को किस प्रकार दबाया गया है और छिपाया गया है। ’’ राजद नेता ने कहा कि वह प्रेस परिषद की रिपोर्ट को मंगवा रहे हैं। मोटा मोटी इस रिपोर्ट के अनुसार यह स्थिति लोकतंत्र के लिए विस्फोटक है। लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामविलास पासवान ने लालू से भी करारा प्रहार करते हुए नीतीश सरकार के खिलाफ कहा , ‘‘ हम जो कह रहे थे उससे भी बढकर प्रेस परिषद ने गंभीर आरोप लगाये हैं। आपात काल में मीडिया पर जो सेंसरशिप लगी थी बिहार में अभी उससे भी खराब हालात हैं। ’’ उन्होंने कहा कि पीसीआई ने राज्य सरकार के बारे में मीडया की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर आरोप लगाये हैं। पासवान ने प्रेस के लिए चिंताजनक हालात का आरोप लगाते हुए कहा, ‘‘प्रेस परिषद का कहना है कि
प्रिंट मीडिया पर सेंसरशिप लागू है। राज्य सरकार मीडिया के लिए विज्ञापन नीति को हथियार बना रही है और प्रिंट मीडिया नीतीश सरकार का मुखपत्र बन गया है। यहां स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता नहीं रह गयी है। ’’ पासवान ने कहा, ‘‘ प्रेस परिषद के जांच दल ने अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया है कि बिहार में पत्रकारिता नहीं रह गयी है। प्रेस परिषद ने कहा है कि बहुत से विज्ञापन कार्यक्रम के बाद दिये जाते हैं जिसका कोई औचित्य नहीं है और सुझाव दिया है कि सरकारी विज्ञापनों के लिए एक स्वतंत्र एजेंसी का निर्माण होना चाहिए। ’’ पूर्व केंदीय मंत्री ने कहा कि वह प्रेस की स्वतंत्रता और निष्पक्षता से काम करने के लिए आंदालेन करेंगे। पार्टी के भीतर इस रिपोर्ट पर चर्चा होगी। पासवान ने कहा , ‘‘ यह बहुत गंभीर है, लोजपा पीसीआई रिपोर्ट को गंभीरता से ले रही है। हम एक दो दिन के अंदर अपनी पार्टी के भीतर राय विचार कर आंदोलन का मुद्दा बनायेंगे। सेंसरशिप के खिलाफ आंदोलन छेड़ेंगे और मांग करेंगे कि मीडिया को स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से काम करने की आजादी होनी चाहिए। ’’ उल्लेखनीय है कि प्रेस परिषद के अध्यक्ष मार्कण्डेय काटजू ने बीते वर्ष बिहार में प्रेस की स्थिति, स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता के मुद्दों पर जांच करने के लिए तीन सदस्यीय एक तथ्यान्वेषी दल बनाया था। दल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बिहार में प्रेस के लिए हालात आपातकाल की तरह हैं जब प्रेस की आजादी पर सेंसरशिप लगा था। (भाषा)
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