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अफजल गुरु की फांसी के विरोध में कश्मीरी मूल के छात्र छात्राओं ने किया मौन प्रदर्शन PDF Print E-mail
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Monday, 11 February 2013 15:31

अलीगढ। अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में अध्ययनरत कश्मीरी मूल के छात्र छात्राओं ने अफजल गुरु को फांसी तक पहुंचाने वाली देश की ’अपराध संबंधी न्याय प्रणाली ’(क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम) के विरोध में आज विश्वविद्यालय परिसर में मौन मार्च निकाला।
इस मार्च में शामिल लगभग तीन सौ प्रदर्शनकारियों ने हालांकि प्रशासन को कोई ज्ञापन नहीं दिया है , मगर ’ अलीगढ ऐक्टिविस्ट सोसाइटी ’ की ओर से एक पर्चा जरुर बांटा है, जिसमें इस संगठन की ईमेल और फेसबुक आईडी भी दी गयी है।
’ जस्टिस हैंग्ड’:न्याय को फांसी : शीर्षक से जारी इस पर्चे में कहा गया है , ’’ अफजल गुरु के विरुद्ध देश में हुए सबसे बडे आपराधिक घटनाओं में से एक में शामिल होने के आरोप में मुकदमा चलाया गया , मगर उसकी तरफ से सही अर्थो में न तो कोई न्यायिक प्रतिनिधित्व ही हो पाया और न ही सरकार के पास ऐसा कोई गवाह ही था , जिसके आधार पर उसे उक्त घटना :संसद पर हुआ आतंकी हमला : के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया


जा सके। ’’
पर्चे में यह भी लिखा है कि ’’ जिस तरीके से संविधान के रक्षकों ने भीड की मांग के आगे घुटने टेक दिये वह बेहद निराशाजनक है , और जिस तरीके से देश के कई भागो में खुशियां मनाई गयी वह मन को बहुत उदास कर देने वाला है। ’’
बीते बीस साल में विश्वविद्यालय परिसर में हुए अपनी तरह के पहले प्रदर्शन में शामिल छात्र छात्राओं ने अपने विरोध के कारणों को बताते हुए कहा है  ’’ हमें गलत न समझें .. हम किसी को सरकार के विरुद्ध न तो भडकाना चाहते है और न ही हम भारत विरोधी ही है। मगर यदि सस्ती राजनीति के प्रभाव में और सरकार की अक्षमता को छिपाने के लिए किसी को फांसी दे दी जाये तो हम इसका अर्थ क्या निकाले। ’’
बहरहाल, विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था चुस्त कर दी गयी है , खासकर इसलिए भी कि 16 फरवरी को विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल होने के लिए मुख्य अतिथि के रुप में संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी आ रही है।

 
 

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